Doctor Protest Bhopal : वाटर कैनन चलाने के मामले में जांच के आदेश, DCP विकास सहवाल करेंगे निष्पक्ष जांच

भोपाल: राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल गेट के पास 7 सितंबर 2026 को प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर पुलिस द्वारा वाटर कैनन का प्रयोग करने और डॉक्टरों के घायल होने के मामले में पुलिस प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। मध्य प्रदेश शासन के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल द्वारा इस संवेदनशील मामले को संज्ञान में लाए जाने के तुरंत बाद भोपाल पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए पुलिस उपायुक्त (DCP) जोन-2 विकास सहवाल को जांचकर्ता अधिकारी नियुक्त किया गया है। पुलिस आयुक्त कार्यालय द्वारा 8 सितंबर 2026 को जारी आदेश (क्रमांक: पुआ/पीए/जांच/2026-231) के तहत जांच अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे घटना से जुड़े सभी पक्षों की बातें सुनकर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत करें।

Welfare Schemes Monitoring: जनकल्याण योजनाओं की निगरानी का बनेगा मजबूत सिस्टम

नई दिल्ली/पणजी। देश में Welfare Schemes और Public Welfare Programmes का लाभ पात्र लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं, इसकी निगरानी को लेकर केंद्र सरकार ने अपना फोकस और मजबूत करने के संकेत दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि अब Zonal Councils सिर्फ राज्यों के बीच विवादों को सुलझाने का मंच नहीं रह गए हैं, बल्कि इन्हें जनकल्याणकारी योजनाओं के implementation और monitoring का प्रभावी माध्यम बनाया जा रहा है।

अमित शाह ने सोमवार को गोवा के पणजी में Western Zonal Council की 28वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव के प्रशासक प्रफुल्ल के. पटेल सहित केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

Zonal Councils में तीन गुना बढ़ी Meetings

अमित शाह ने बताया कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच Zonal Councils और उनकी Standing Committees की कुल 25 बैठकें हुई थीं। वहीं वर्ष 2014 के बाद अब तक 71 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। यानी बैठकों की संख्या में करीब तीन गुना बढ़ोतरी हुई है।

इन बैठकों में अब तक 1,893 मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें से 1,445 मामलों का समाधान किया जा चुका है। गृह मंत्री के मुताबिक यह राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और Central Ministries के बीच बेहतर coordination और cooperative federalism को दर्शाता है।

Welfare Schemes की Ground Level Monitoring पर जोर

Western Zonal Council की बैठक में Public Welfare Schemes की implementation और उनके ground-level impact से जुड़े कई मुद्दों की समीक्षा की गई। इनमें बच्चों में Malnutrition, Underweight और Stunting को कम करना प्रमुख विषय रहा।

इसके अलावा Aadhaar coverage और पात्र लोगों तक Ayushman Bharat Cards की पहुंच की भी monitoring पर जोर दिया गया। सरकार का उद्देश्य Welfare Schemes का लाभ सही beneficiary तक समय पर पहुंचाना और implementation में आने वाली practical problems को राज्यों के साथ मिलकर दूर करना है।

Ayushman Bharat और गरीबों के लिए Healthcare पर फोकस

बैठक में Ayushman Bharat–Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (AB-PMJAY) के implementation को लेकर भी चर्चा हुई। खास तौर पर Public Hospitals की योजना में participation और eligible beneficiaries तक healthcare benefits पहुंचाने के मुद्दे पर ध्यान दिया गया।

इसके साथ ही गांवों में निर्धारित दूरी के भीतर Brick-and-Mortar Banking Facilities उपलब्ध कराने का मुद्दा भी बैठक के एजेंडे में शामिल रहा, ताकि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को Banking और Financial Services तक बेहतर पहुंच मिल सके।

Poshan Abhiyaan और School Dropout भी Agenda में

Social Welfare के लिहाज से बैठक में Poshan Abhiyaan के जरिए बच्चों में malnutrition खत्म करने और school-going बच्चों के dropout rate को कम करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

इससे साफ है कि Zonal Councils का फोकस अब केवल administrative coordination तक सीमित नहीं है। Education, Nutrition, Healthcare, Banking Access और Welfare Schemes की delivery जैसे मुद्दों को भी इसके agenda में प्रमुखता मिल रही है।

1,445 मुद्दों का समाधान, राज्यों के बीच Coordination मजबूत

अमित शाह ने कहा कि Zonal Councils की सक्रियता से राज्यों के बीच कई पुराने विवादों को सुलझाने में भी मदद मिली है। Western Region में राज्यों के बीच अब कोई विवाद लंबित नहीं होने को उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि Team India और Cooperative Federalism की भावना के साथ केंद्र और राज्य मिलकर Development तथा Public Welfare के काम को आगे बढ़ा रहे हैं।

Women and Child Safety पर भी चर्चा

Western Zonal Council की बैठक में महिलाओं और बच्चों से जुड़े गंभीर मामलों पर भी चर्चा हुई। Rape cases की speedy investigation और trial के लिए Fast Track Special Courts के प्रभावी implementation का मुद्दा भी agenda में शामिल रहा।

इसके अलावा ERSS-112, Food Safety Standards, Railway Development Projects, Environmental Clearances, Electricity Supply और Urban Master Planning जैसे विषयों पर भी विचार किया गया।

Social Welfare Schemes की Delivery होगी और बेहतर

केंद्र सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य Welfare Schemes को केवल policy level तक सीमित न रखकर उनकी ground-level implementation और monitoring को मजबूत करना है। Zonal Councils के जरिए राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर coordination से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि Health, Nutrition, Education, Financial Inclusion और Social Security से जुड़ी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक प्रभावी तरीके से पहुंचे।

अमित शाह के अनुसार Zonal Councils अब Development और Public Welfare के लिए Action-oriented Platform के रूप में आगे बढ़ रहे हैं।

 

आदिवासी अंचल में दौड़ी MEMU ट्रेन, PM मोदी ने वर्चुअली दिखाई हरी झंडी

धार। मध्य प्रदेश के धार जिले के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। आजादी के बाद पहली बार जिले की धरती पर नियमित यात्री ट्रेन का संचालन शुरू हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडोदरा से वर्चुअल माध्यम के जरिए प्रताप नगर (वडोदरा) से टांडा रोड (धार) के बीच चलने वाली MEMU ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

रेल सेवा शुरू होने के साथ ही धार जिले का लंबे समय से चला आ रहा रेल कनेक्टिविटी का इंतजार खत्म हो गया। खासतौर पर धार के आदिवासी बहुल और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इससे आवागमन में बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। टांडा रोड स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने।

दशकों पुराना सपना हुआ पूरा

धार में रेल पहुंचना क्षेत्रवासियों के लिए सिर्फ परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई रेल सेवा से धार और आसपास के क्षेत्रों का गुजरात तथा अन्य इलाकों से संपर्क मजबूत होगा। इससे यात्रियों के साथ व्यापार, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

रिपोर्टों के अनुसार, प्रताप नगर से टांडा रोड के बीच MEMU सेवा शुरू की गई है। यह कनेक्टिविटी धार जिले को भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में अहम उपलब्धि है।

आदिवासी अंचल को भी मिलेगा फायदा

धार और आसपास का बड़ा क्षेत्र आदिवासी बहुल है। रेल सेवा शुरू होने से विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और आम यात्रियों के लिए लंबी दूरी का सफर आसान होने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर इसे क्षेत्र के विकास और बेहतर कनेक्टिविटी की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

पर्युषण महापर्व का शुभारंभ, आठ दिनों तक तप-साधना और आत्मचिंतन में जुटेगा जैन समाज

जैन धर्म के प्रमुख आध्यात्मिक पर्व पर्युषण महापर्व का मंगलवार, 8 सितंबर से शुभारंभ हो गया। श्वेतांबर जैन परंपरा में यह पर्व 8 से 15 सितंबर तक मनाया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु तप, उपवास, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण और ध्यान के माध्यम से आत्मशुद्धि का प्रयास करेंगे।

पर्युषण पर्व को जैन समाज में आत्मचिंतन, संयम, त्याग और क्षमा का विशेष अवसर माना जाता है। इन दिनों श्रद्धालु सांसारिक गतिविधियों को सीमित कर अपने विचारों, वाणी और कर्मों की समीक्षा करते हैं। अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम जैसे जैन सिद्धांतों के पालन पर विशेष जोर दिया जाता है।

तप और साधना का विशेष महत्व
पर्युषण के दौरान जैन मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, प्रवचन, स्वाध्याय और प्रतिक्रमण के आयोजन होंगे। अनेक श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपवास, एकासन और अन्य तप-साधनाएं करते हैं। इस अवधि को बाहरी आडंबर से दूर रहकर आत्मा के निकट जाने और आत्मनिरीक्षण का समय माना जाता है।

15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व
आठ दिवसीय पर्युषण पर्व का समापन 15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व के साथ होगा। इस दिन जैन समाज में आत्मालोचना और क्षमायाचना की विशेष परंपरा है। श्रद्धालु वर्षभर में जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगते हुए ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’ कहते हैं।

पर्युषण महापर्व का संदेश केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, अहिंसा, करुणा, क्षमा और बेहतर आचरण की प्रेरणा देता है। पर्व के दौरान जैन समाज के लोग आध्यात्मिक साधना के साथ अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लेते हैं।

यूपी को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाने की तैयारी, लखनऊ में जुटेंगे दिग्गज; CM योगी करेंगे UPTEX-2026 का शुभारंभ

उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल और गारमेंटिंग हब के रूप में विकसित करने की दिशा में योगी सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में UPTEX-2026 का आयोजन 8 और 9 सितंबर को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को इस दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।

UPTEX-2026 में देशभर के प्रमुख टेक्सटाइल निर्माता, कारोबारी, निवेशक और उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। सम्मेलन के जरिए प्रदेश में वस्त्र उद्योग के विस्तार, निवेश आकर्षित करने, उत्पादन और निर्यात बढ़ाने तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर मंथन किया जाएगा।

50 नई और विस्तार करने वाली इकाइयों को मिलेगा समर्थन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 50 नई एवं विस्तार करने वाली टेक्सटाइल इकाइयों को Letters of Comfort (LoCs) भी प्रदान करेंगे। सरकार के मुताबिक अब तक संबंधित नीतियों के तहत 214 इकाइयों को LoCs जारी किए जा चुके हैं और 157 इकाइयों को 416.75 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है।

निवेश और रोजगार पर रहेगा फोकस
UPTEX-2026 के जरिए सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश की पारंपरिक हथकरघा, पावरलूम और रेशम उद्योग की क्षमता को आधुनिक टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग सेक्टर से जोड़ना है। सम्मेलन में निवेश, उत्पादन, निर्यात, तकनीकी नवाचार और कारोबारी माहौल से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। इससे प्रदेश में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

सरकार पीएम मित्र पार्क समेत टेक्सटाइल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बढ़ावा दे रही है। इसके माध्यम से उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक वस्त्र एवं परिधान उद्योग के मानचित्र पर मजबूत स्थान दिलाने की कोशिश की जा रही है।

UPTEX-2026 को प्रदेश के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है, जहां सरकार, उद्योग और निवेशकों के बीच संभावित साझेदारियों और नए निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।

‘मिर्जापुर: द मूवी’ का बॉक्स ऑफिस पर भौकाल, चार दिनों में 100 करोड़ के पार पहुंची कमाई

लोकप्रिय वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ की कहानी को बड़े पर्दे पर आगे बढ़ाने वाली फिल्म ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त प्रदर्शन किया है। 4 सितंबर 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म ने महज चार दिनों में भारत में 100 करोड़ रुपये के नेट कलेक्शन का आंकड़ा पार कर लिया है।

फिल्म की कमाई में रिलीज के बाद लगातार तेजी देखने को मिली। पहले दिन फिल्म ने करीब 25.75 करोड़ रुपये, दूसरे दिन 32 करोड़ रुपये और तीसरे दिन करीब 36 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। चौथे दिन सोमवार को भी फिल्म ने मजबूत पकड़ बनाए रखी और करीब 15.50 करोड़ रुपये की कमाई की। इसके साथ भारत में फिल्म का नेट कलेक्शन करीब 109.25 करोड़ रुपये पहुंच गया है।

फिल्म की इस सफलता में ‘मिर्जापुर’ फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता का बड़ा योगदान माना जा रहा है। पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु और रवि किशन जैसे कलाकारों की मौजूदगी ने दर्शकों की दिलचस्पी को और बढ़ाया है। फिल्म ने रिलीज से पहले ही अपने चर्चित किरदारों और कहानी को लेकर जबरदस्त बज बनाया था।

बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की रफ्तार ने कई दूसरी फिल्मों के लिए भी मुकाबला मुश्किल कर दिया है। पहले वीकेंड में ही फिल्म ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2026 की बड़ी ओपनिंग वीकेंड फिल्मों में अपनी जगह बनाई। तीसरे दिन तक इसका भारत नेट कलेक्शन करीब 93.75 करोड़ रुपये था और दुनियाभर में कमाई 132 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई थी।

चौथे दिन 100 करोड़ का आंकड़ा पार करना फिल्म के लिए बड़ी उपलब्धि है। ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म अब आने वाले दिनों में 150 करोड़ रुपये के वैश्विक आंकड़े की ओर बढ़ रही है। दर्शकों के बीच ‘मिर्जापुर’ के किरदारों का क्रेज बरकरार रहने से फिल्म की कमाई आगे भी मजबूत रहने की उम्मीद है।

ग्लोबल 6G पहल से जुड़ा भारत, अमेरिका समेत 25 देश तय करेंगे अगली पीढ़ी की तकनीक की दिशा

भारत ने अगली पीढ़ी की मोबाइल संचार तकनीक यानी 6G के विकास और वैश्विक मानकों को आकार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारत अब अमेरिका के नेतृत्व वाली उस अंतरराष्ट्रीय पहल का हिस्सा बन गया है, जिसमें अमेरिका के साथ कुल 25 देश 6G तकनीक के भविष्य को लेकर सहयोग करेंगे।

इस पहल का उद्देश्य 6G नेटवर्क से जुड़ी तकनीक, सुरक्षा, मानकों और भविष्य की तैनाती को लेकर समान दृष्टिकोण विकसित करना है। 5G के बाद आने वाली 6G तकनीक को अधिक तेज, कम विलंबता वाली और AI आधारित कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत की भागीदारी ऐसे समय में हुई है जब दुनिया के प्रमुख देश 6G की तकनीकी दिशा और वैश्विक मानकों में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इस सहयोग के जरिए भारत को नई तकनीकों के विकास, शोध और वैश्विक मानकीकरण की प्रक्रियाओं में अपनी विशेषज्ञता और प्राथमिकताओं को सामने रखने का अवसर मिलेगा।

भारत पहले से ही Bharat 6G Alliance के माध्यम से स्वदेशी 6G इकोसिस्टम विकसित करने पर काम कर रहा है। जुलाई 2026 तक इस गठबंधन में 90 सदस्य शामिल हो चुके थे, जिनमें दूरसंचार कंपनियां, उपकरण निर्माता, स्टार्टअप, शोध संस्थान और अकादमिक संस्थान शामिल हैं।

सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत को 6G तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में पहुंचाना है। भारत ने 6G से जुड़े वैश्विक पेटेंट में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने की महत्वाकांक्षा भी व्यक्त की है।

इस वैश्विक साझेदारी को भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। इससे देश को भविष्य की डिजिटल कनेक्टिविटी, AI-आधारित नेटवर्क और उन्नत दूरसंचार तकनीकों के विकास में अपनी भूमिका और मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की तातारस्तान के प्रमुख रुस्तम मिन्निखानोव से अहम मुलाकात, निवेश और साझेदारी पर चर्चा

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई में आयोजित AIM Congress-2026 के दौरान रूसी गणराज्य तातारस्तान के प्रमुख (रईस) एच.ई. रुस्तम मिन्निखानोव से उच्चस्तरीय द्विपक्षीय मुलाकात की। बैठक में मध्य प्रदेश और तातारस्तान के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक का प्रमुख उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के बीच सेक्टर-विशिष्ट रणनीतिक साझेदारियों की संभावनाएं तलाशना और मध्य प्रदेश में तातारस्तान के निवेश को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, पेट्रोकेमिकल्स, इंजीनियरिंग, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, कृषि, कौशल विकास और आधुनिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रुस्तम मिन्निखानोव को मध्य प्रदेश की औद्योगिक क्षमता और निवेश के अनुकूल वातावरण से अवगत कराया। उन्होंने तातारस्तान को आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS)-2027 में भाग लेने का निमंत्रण भी दिया। तातारस्तान की ओर से मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल को रूस-भारत TIME फोरम में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया।

दोनों पक्षों ने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए B2B और G2G स्तर पर दीर्घकालिक साझेदारी, द्विपक्षीय बिजनेस मिशन तथा संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इसके लिए अधिकृत नोडल अधिकारियों के माध्यम से समन्वय को तेज करने की दिशा में भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह मुलाकात मध्य प्रदेश में विदेशी निवेश आकर्षित करने और राज्य को वैश्विक औद्योगिक एवं निवेश साझेदारियों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल के वर्षों में मध्य प्रदेश और रूस के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस बने कृष्न राम महापात्र, राज्यपाल ने दिलाई पद की शपथ

छत्तीसगढ़ की न्यायपालिका को नया नेतृत्व मिल गया है। राज्यपाल रमेन डेका ने न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह रायपुर स्थित लोकभवन के छत्तीसगढ़ मंडपम् में आयोजित किया गया।

शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल ने मुख्य न्यायाधीश महापात्र को राष्ट्रपति द्वारा जारी मूल वारंट की प्रति सौंपी और उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। न्यायाधिपति महापात्र इससे पहले उड़ीसा हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे।

समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री तोखन साहू सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं ने भी समारोह में हिस्सा लिया।

मुख्य सचिव विकास शील ने राष्ट्रपति द्वारा जारी वारंट का वाचन किया। कार्यक्रम में राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाईकोर्ट के अधिवक्ता भी उपस्थित रहे। कृष्ण राम महापात्र छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 16वें मुख्य न्यायाधीश बने हैं।

न्यायमूर्ति महापात्र के मुख्य न्यायाधीश पद संभालने के साथ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में न्यायिक प्रशासन को नया नेतृत्व मिला है। न्यायपालिका से जुड़े लोगों ने उनके लंबे अनुभव और न्यायिक कार्यक्षमता को महत्वपूर्ण माना है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर तेल और भू-राजनीतिक तनाव का दबाव, निवेशकों में बढ़ी चिंता

वैश्विक बाजारों में सोमवार को तेल की बढ़ती कीमतों और मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें छह सप्ताह के उच्च स्तर के करीब पहुंच गई हैं।

100 डॉलर के करीब पहुंचा कच्चा तेल
ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। तेल की कीमतों में तेजी का प्रमुख कारण मध्य-पूर्व से आपूर्ति बाधित होने की आशंका और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ता तनाव है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नजर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां जहाजों की आवाजाही को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता पैदा कर दी है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया हमलों के बाद निवेशक इस क्षेत्र में किसी भी नए घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

महंगे तेल से बढ़ सकता है महंगाई का दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी का असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहता। परिवहन, विनिर्माण और अन्य क्षेत्रों की लागत बढ़ने से दुनिया भर में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती का फैसला भी मुश्किल हो सकता है।

शेयर बाजार भी दबाव में
तेल की तेजी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर शेयर बाजारों पर भी पड़ा। भारतीय बाजार में सोमवार को सेंसेक्स करीब 0.50 प्रतिशत और निफ्टी 0.50 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। निवेशकों की नजर अब तेल की कीमतों के साथ-साथ अमेरिका की महंगाई संबंधी आगामी आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के अगले कदम पर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ता है तथा तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगी।

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