राष्ट्रपति से संसद भवन उद्घाटन का हक छीन रहे हैं मोदी : खड़गे

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दिल्ली, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से नये संसद भवन का उद्घाटन नहीं कराके उनके हक को छीना है और संसदीय प्रणाली को ध्वस्त किया है।खड़गे ने कहा, “मोदी जी, संसद, जनता द्वारा स्थापित लोकतंत्र का मंदिर है। महामहिम राष्ट्रपति का पद संसद का प्रथम अंग है। आपकी सरकार के अहंकार ने संसदीय प्रणाली को ध्वस्त कर दिया है।”उन्होंने कहा, “देश के 140 करोड़ लोग जानना चाहते हैं कि भारत के राष्ट्रपति से संसद भवन के उद्घाटन का हक़ छीनकर आप क्या जताना चाहते हैं।”इस बीच पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी कहा, “नई संसद के उद्घाटन कार्यक्रम से राष्ट्रपति को अलग रखना गलत है, उनका घोर अपमान है, लोकतंत्र पर प्रहार है। इस बात का विरोध आज हर राजनीतिक दल कर रहा है।”

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा नए संसद भवन का मामला, राष्ट्रपति से उद्घाटन कराने की मांग

 

दिल्ली, उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है जिसमें शीर्ष अदालत से यह निर्देश देने की मांग की गई है कि नए संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्थान पर देश के राष्ट्रपति से कराया जाएं।याचिकाकर्ता और पेशे से उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता सी आर जया सुकिन ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है और कहा कि लोकसभा सचिवालय ने उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति को आमंत्रित नहीं करके भारतीय संविधान का उल्लंघन किया है। ऐसा करके संविधान का सम्मान नहीं किया जा रहा है।”

याचिकाकर्ता अधिवक्ता ने अपनी याचिका में दावा किया, “लोकसभा सचिवालय द्वारा 18 मई को जारी किया गया बयान और नए संसद भवन के उद्घाटन के बारे में लाेकसभा महासचिव द्वारा जारी किया गया निमंत्रण एक मनमाना रवैया है, बिना रिकॉर्ड के उचित अध्ययन किए बिना ऐसा करना कदापि उचित नहीं है।”
याचिकाकर्ता अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले की जल्द ही उच्चतम न्यायालय में सुनवाई होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि उत्तरदाताओं, केंद्र सरकार और लोकसभा सचिवालय सभी ने इस मामले में भारतीय संविधान का उल्लंघन किया है और इसका सम्मान नहीं किया जा रहा है।
याचिका में कहा गया है कि संसद भारत का सर्वोच्च विधायी निकाय है। भारतीय संसद में राष्ट्रपति और दो सदन राज्यसभा (राज्यों की परिषद) और लोक सभा (जनता का सदन)शामिल हैं। राष्ट्रपति के पास किसी भी सदन को बुलाने और सत्रावसान करने की शक्ति है। साथ ही संसद या लोकसभा को भंग करने की शक्ति भी राष्ट्रपति के ही पास है।
याचिकाकर्ता सुकिन ने अपनी याचिका में कहा, “राष्ट्रपति संसद का एक अभिन्न अंग हैं, लेकिन राष्ट्रपति को शिलान्यास समारोह से भी दूर रखा गया और अब वह उद्घाटन समारोह का हिस्सा भी नहीं है, सरकार का यह मनमाना फैसला कदापि उचित नहीं है।”
इससे पहले बुधवार को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजू जनता दल (बीजद) ने राजधानी में नवनिर्मित नए संसद भवन के उद्घाटन के “ऐतिहासिक अवसर” पर आयोजित का कार्यक्रम में भाग लेने की घोषणा की थी और कहा कि राष्ट्रपति तथा संसद जैसी संस्था को किसी ऐसे विवाद से अलग रखना चाहिए जिससे उनके गरिमा और सम्मान पर प्रभाव पड़ता हो।
समान विचारधारा वाले विपक्ष के 19 दलों ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में संसदीय लोकतंत्र पर कुठाराघात हुआ है और नये भवन के निर्माण में विपक्षी दलों के साथ कोई सलाह मशविरा तक नहीं किया गया, इसलिए समान विचारधारा वाले दलों ने नये संसद भवन के उद्घाटन समारोह का सामूहिक रूप से बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
विपक्षी दलों ने कल एक संयुक्त वक्तव्य में कहा, “नये संसद भवन का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण अवसर है। विपक्ष मानता है कि मोदी सरकार लोकतंत्र के लिए खतरनाक स्थिति पैदा कर रही है। इस सरकार ने निरंकुश तरीके से नये संसद का निर्माण किया है इसके बावज़ूद विपक्ष उद्घाटन समारोह के अवसर पर मतभेदों को भुलाने को तैयार था, लेकिन सरकार ने नये संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पूरी तरह से दरकिनार कर प्रधानमंत्री से इसका उद्घाटन कराने का निर्णय लिया है और यह हमारी लोकतांत्रिक परंपरा पर सीधा हमला है।”

आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2023:- 18 जून से वर्ल्ड कप क्वालीफायर राउंड की शुरुआत

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आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2023 (World Cup 2023) अक्टूबर-नवंबर के महीने में भारत में खेला जाएगा. मेजबान भारत को वर्ल्ड कप में सीधे एंट्री मिली है. वहीं, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, बांग्लादेश, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान और साउथ अफ्रीक की टीमों ने भी वर्ल्ड कप 2023 के लिए क्वालीफाई कर लिया है. अभी दो टीमों को क्वालीफाई करना बाकी है. 18 जून से वर्ल्ड कप क्वालीफायर राउंड की शुरुआत होगी, जिसके जरीए बाकी दो टीमों का फैसला होगा. इस टूर्नामेंट के लिए आयरलैंड ने अपनी टीम का ऐलान कर दिया है.

वर्ल्ड कप 2023 क्वालीफायर के लिए टीम का ऐलान

जिम्बाब्वे में 18 जून से 9 जुलाई तक होने वाले क्वालीफायर इवेंट में 10 टीमें वनडे वर्ल्ड कप 2023 में दो शेष स्थानों के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगीं. क्रिकेट आयरलैंड ने बुधवार को घोषणा की कि दाएं हाथ के बल्लेबाज स्टीफन डोहेनी जिम्बाब्वे में होने वाले आगामी वर्ल्ड कप क्वालीफायर के लिए एंड्रयू बालबर्नी की कप्तानी वाली 15 सदस्यीय टीम से बाहर हो गए हैं. आयरलैंड की टीम श्रीलंका, स्कॉटलैंड, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के साथ ग्रुप बी में है. वहीं, ग्रुप ए में मेजबान जिम्बाब्वे, 1975 और 1979 के वर्ल्ड कप विजेता वेस्टइंडीज, नीदरलैंड, नेपाल और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं.

ऐसे खेले जाएंगे क्वालीफायर मैच

प्रत्येक टीम अपने ग्रुप की अन्य टीमों से एक बार खेलेगी, प्रत्येक ग्रुप से टॉप तीन सुपर सिक्स चरण में आगे बढ़ेंगी. सुपर सिक्स में, वे उस टीम से खेलेंगे जो उन्हें ग्रुप चरण में नहीं मिली थी. ग्रुप चरण में जीते गए सभी अंक सुपर सिक्स चरण में शामिल होने में विफल रहने वाली टीमों के खिलाफ प्राप्त अंकों के अलावा सुपर सिक्स चरण में ले जाए जाएंगे. सुपर सिक्स चरण के बाद दो टॉप टीमें फाइनल खेलेंगी, और दोनों भारत में वर्ल्ड कप 2023 में आगे बढ़ेंगी. इस टूर्नामेंट में पहली बार सुपर सिक्स चरण से सभी मैचों के लिए डीआरएस का इस्तेमाल किया जाएगा. 19-27 जून तक अपने ग्रुप-स्टेज मैचों में खेलने से पहले आयरलैंड को संयुक्त राज्य अमेरिका और नीदरलैंड के खिलाफ क्रमश: 13 और 15 जून को वार्म-अप मैच खेलने हैं. सुपर सिक्स मैच 29 जून से शुरू होंगे.

तीन-चार माह के भालू के गले में चेनलिंक फेंसिंग तार फंसने से मौत, जांच में जुटी वन विभाग

 

धमतरी। एक भालू के गले में चेनलिंक फेंसिंग तार फंसने से मौत हो गई। यह घटना गंगरेल के आक्सीवन क्षेत्र में हुई है। वन विभाग की टीम जांच में जुट गई है। मृत भालू की उम्र तीन से चार माह है। वहीं चेनलिंक तार को पांच-छह साल पुराना बताया जा रहा है, जो टूट चुका है। भालू के शव का पोस्टमार्टम पश्चात अंतिम संस्कार किया जाएगा। बताया जा रहा है कि यहां से बड़े भालू निकल गए होंगे, लेकिन छोटे भालू की तार में फंसने की वजह से मौत हो गई।

धमतरी रेंज के रेंजर महादेव कन्नौजे से मिली जानकारी के अनुसार 24 मई को गंगरेलबांध के आक्सीवन क्षेत्र में एक भालू की मौत चेनलिंक फेंसिंग तार में फंसने से हो गई है। सुबह जब ग्रामीण उस मार्ग से गए, तो भालू को मृत हालत में देखा। लोगों और राहगीरों की भीड़ ने घटना की जानकारी वन विभाग को दी। खबर पाकर रेंजर महादेव कन्नौजे व वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर मुआयना किया, तो पाया कि एक तीन-चार माह का भालू चेनलिंक तार में फंसकर मरा हुआ था। गले में तार फंसने की वजह से मौत हुई है। रेंजर ने बताया कि घटना आक्सीवजन क्षेत्र गंगरेल मार्ग का है। यहां लगाया गया तार फेंसिंग करीब पांच से छह साल पुराना है, जो कई जगह से टूट चुका है। टूटे हुए तार भालू के गले में फंसने की वजह से मौत हुई है।

कोल समाज के मान-सम्मान और प्रतिष्ठा की प्रतीक कोलगढ़ी का होगा जीर्णोद्धार – मुख्यमंत्री चौहान

 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कोल समाज के मान-सम्मान और प्रतिष्ठा की प्रतीक त्योंथर की कोलगढ़ी का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके लिए तीन करोड़ 12 लाख रूपए स्वीकृत किए गए हैं। भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस 9 जून से जीर्णोद्धार का कार्य शुरू हो जाएगा। प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर कोल भवन बनाए जाएंगे, इसकी शुरुआत रीवा से होगी। कोल समाज की प्रगति और उत्थान के लिए सरकार और समाज मिल कर काम करेंगे। शिक्षा, रोजगार, स्व-रोजगार और स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष गतिविधियाँ चलाई जाएंगी।

मुख्यमंत्री चौहान निवास परिसर में कोल जनजाति सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप जला कर और भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री निवास पधारे कोल जनजाति के भाई-बहनों का मुख्यमंत्री ने पुष्प-वर्षा कर समाज के वरिष्ठ सदस्यों तथा जनजातीय कलाकारों का पुष्प-गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। मुख्यमंत्री चौहान को समाज की ओर से मंगेश गोटिया ने स्वनिर्मित मुख्यमंत्री का चित्र भेंट किया। मुख्यमंत्री चौहान को साफा पहना कर और तीर-कमान भेंट कर कोल समाज की ओर से अभिवादन किया गया।

कोल समाज राम-भक्त और देश-भक्त समाज

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि कोल समाज की महिमा अद्भुत है। यह वह समाज है जिसने भगवान को भी घर दिया। भगवान श्रीराम के वनवास के समय कोल समाज ने ही उन्हें फल-फूल और आश्रय देने का काम किया। साथ ही समाज बंधुओं ने ही भगवान श्रीराम के लिए पर्ण कुटी का निर्माण किया। कोल समाज राम-भक्त और देश-भक्त समाज है। अंग्रेजों को खदेड़ने में भी कोल समाज आगे रहा है। वर्ष 1831 में बुधु भगत और मदारा महतो के नेतृत्व में हुआ कोल विद्रोह कई जनजातियों के लिए अंग्रेजों के अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का प्रेरणा स्रोत बना। कोल समाज का अपना इतिहास है, इसके संरक्षण के लिए निरंतर कार्य जारी रहेगा। भले और भोले कोल समाज का सम्मान और प्रतिष्ठा पुनर्स्थापित होगी।

जिन व्यक्तियों के पास रहने के लिए जमीन नहीं है, उनका सर्वे कराया जाएगा

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री भू-आवासीय अधिकार योजना में पट्टा देकर जमीन का मालिक बनाया जा रहा है। कोल समाज के जिन व्यक्तियों के पास रहने के लिए जमीन नहीं है, उनका सर्वे कराने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति को प्लॉट दिया जाएगा, पट्टे के साथ ही घर बनाने के लिए भी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। शासकीय भूमि उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में जमीन खरीद कर प्लॉट उपलब्ध कराए जाएंगे।

जिन्दगी बदलने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे : समाज भी हो सजग

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई, सभी के स्वास्थ्य, युवाओं के रोजगार और स्व-रोजगार पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने समाजजन को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें अपनी जिन्दगी बदलने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे, हम गरीब रहने के लिए पैदा नहीं हुए हैं। बच्चों की शिक्षा, रोजगार और स्व-रोजगार के लिए लक्षित प्रयासों से ही आने वाली पीढ़ी समय के साथ चल सकेगी। इसके लिए समाज को सजग होना होगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कोल विकास प्राधिकरण को मेधावी बच्चों की पढ़ाई, सरकारी नौकरी तथा मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेजों में भर्ती के लिए कोचिंग की व्यवस्था की दिशा में पहल करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं के स्व-रोजगार केलिए आवश्यक प्रशिक्षण और लोन की व्यवस्था कर उन्हें रोजगार मांगने वाला नहीं रोजगार देने वाला बनाना है। मुख्यमंत्री चौहान ने कोल समाज की महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया और लाड़ली बहना योजना की जानकारी दी। मुख्यमंत्री चौहान ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए।

भक्तिमय हुए मुख्यमंत्री चौहान

जनजातीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भजन -‘आगे-आगे राम चलत हैं – पीछे लक्ष्मण भाई रे – शोभा बरन न जाई रे’ को सुर देते हुए मुख्यमंत्री चौहान ने भी भजन की पंक्तियाँ गाईं। मुख्यमंत्री ने अतिथियों का मुख्यमंत्री निवास पधारने के लिए आभार माना।

राज्य स्तरीय कोल जनजाति प्राधिकरण के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान कोल समाज की प्रगति के लिए प्रतिबद्ध हैं। राज्य शासन द्वारा जनजातीय समाज के मान-सम्मान और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए विभिन्न गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं। अन्य जन-प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। सम्मेलन में विधायक शरद कोल, अध्यक्ष जिला पंचायत सतना राम खिलावन कोल, अध्यक्ष जिला पंचायत रीवा श्रीमती नीता कोल, भारिया विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष दिनेश अगरिया, जनजातीय कार्य विभाग की प्रमुख सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल सहित बड़ी संख्या में कोल समाज के भाई-बहन उपस्थित थे।

26 मई को रिलीज होगी अरविंद अकेला कल्लू और आम्रपाली दुबे स्टारर ‘शादी मुबारक’

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मुंबई,  अरविंद अकेला कल्लू और आम्रपाली दुबे स्टारर ‘शादी मुबारक’ 26 मई को रिलीज होगी।निर्माता रौशन सिंह और निर्देशक आनंद सिंह की भोजपुरी फिल्म ‘शादी मुबारक’ 26 मई को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म में अरविंद अकेला कल्लू और आम्रपाली दुबे मुख्य भूमिका में हैं।फिल्म की सह निर्माता शर्मिला आर सिंह ने बताया कि फिल्म ‘शादी मुबारक’ भोजपुरी बॉक्स ऑफिस की बड़ी फिल्मों में से एक होने वाली है। फिल्म के ट्रेलर में इसकी एक झलक सबों ने देखी है, जिसके बाद से लोगों को फिल्म के रिलीज होने का इंतजार था। अब हम इसके लिए तैयार हैं। फिल्म इसी सप्ताह में रिलीज होगी। आशा करती हूं कि अपने पसंदीदा स्टार के साथ फिल्म को सभी लोग थियेटर में जाकर देखें। इस फिल्म में शानदार गीत संगीत और दिल को छू लेने वाली कहानी है। यकीन मानिए, भोजपुरी में किसी ने इस तरह की कहानी और भव्यता के सात मेकिंग एक्सपेक्ट नहीं किया होगा। इसलिए मैं अपील करूंगी कि सब लोग फिल्म को सिनेमाघरों में ही जाकर देखें।

एस आर के म्यूजिक फिल्म्स प्रस्तुत ‘शादी मुबारक’ में अरविंद अकेला कल्लू और आम्रपाली दुबे के साथ विनोद मिश्रा, समर्थ चतुर्वेदी, सृष्टि पाठक, विद्या सिंह, सोनू पांडे, जय सिंह, बबलू खान, राजेश तोमर, विजयालक्ष्मी, दिवाकर श्रीवास्तव, स्वीटी सिंह, रितु चौहान, सोना पांडे, सौम्या पांडे और मौसम मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म की कहानी श्याम देहाती ने लिखी है। फिल्म में संगीत ओम झा का है। इस फिल्म के गानों के गीतकार प्यारे लाल यादव, अरविंद तिवारी, श्याम देहाती, आजाद सिंह, यादव राज, आशुतोष तिवारी और शेखर मधुर हैं। स्क्रीनप्ले और डायलॉग अरविंद तिवारी का है जबकि सिद्धार्थ सिंह इस फिल्म के डीओपी हैं।

चेन्नई के लिए हमेशा हाजिर रहेंगे : धोनी

 

चेन्नई, चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने भले ही आईपीएल में अपने भविष्य पर अंतिम फैसला न लिया हो, लेकिन उन्होंने कहा है कि वह इस फ्रेंचाइजी के लिये हमेशा उपलब्ध रहेंगे।धोनी ने मंगलवार को पहले क्वालीफायर में गुजरात पर 15 रन की जीत के बाद कहा, “मैंने अभी (आईपीएल में अपना भविष्य) सोचा नहीं है। मेरे पास फैसला लेने के लिये आठ-नौ महीने हैं। छोटी नीलामी दिसंबर के आस-पास होगी। मेरे पास फैसला लेने के लिये बहुत समय है।”उन्होंने कहा, “मैं हमेशा चेन्नई के लिये हाज़िर रहूंगा। अब मैं मैदान पर या कहीं बाहर बैठा मिलूंगा, यह अभी नहीं मालूम। सच कहूं तो यह काफी मुश्किल हो जाता है। मैं पिछले चार माह से घर से बाहर हूं। मैं 31 जनवरी को घर से निकला, दो या तीन मार्च से अभ्यास शुरू कर दिया। बहुत मुश्किल हो जाती है, लेकिन मेरे पास सोचने के लिये समय है।”चेन्नई ने गुजरात को हराकर 10वीं बार आईपीएल फाइनल में जगह बनायी। यह आईपीएल में धोनी का आखिरी साल इसलिये भी माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने घुटने की चोट से जूझते हुए पूरा सीजन खेला है और चेन्नई के आखिरी लीग मैच के बाद वह घुटने पर पट्टी बांधे हुए भी नज़र आये थे। जब धोनी से पूछा गया कि क्या इतने बार फाइनल खेलने के बाद वह इसके आदि हो गये हैं, तो उन्होंने कहा, “आईपीएल ऐसा कहने के लिये बहुत बड़ा है। यह नहीं भूलना चाहिये कि एक समय पर आठ शीर्ष टीमें हुआ करती थीं, और अब (10 टीमें होने के बाद) यह और मुश्किल हो गया है। मैं यह नहीं कहूंगा कि यह बस फाइनल ही है।”उन्होंने कहा, “यह दो महीने से ज्यादा की मेहनत है जो हमें यहां तक लेकर आयी है। टीम के खिलाड़ियों ने अपना कौशल दिखाया है। मेरा मानना है कि हर किसी ने मेहनत की है। मध्यक्रम को भले ही पर्याप्त मौके न मिले हों, लेकिन सभी को थोड़ा-बहुत योगदान देने का एक-एक अवसर जरूर मिला है और उन्होंने योगदान दिया भी है।”चेन्नई ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए गुजरात के सामने 173 रन का लक्ष्य रखा। यह स्कोर गुजरात के लिये बहुत बड़ा साबित हुआ और वह 157 रन पर ऑलआउट हो गयी। स्कोर की रक्षा करते हुए धोनी ने अपने स्पिनरों और फील्डरों का बेहतरीन उपयोग किया, जिससे बने दबाव से गुजरात नहीं उभर सकी।धोनी ने कहा, “आप विकेट देखते हैं, परिस्थितियां देखते हैं और उसी के हिसाब से फील्ड बदलते रहते हैं। मैं बतौर कप्तान कभी-कभी आपको बहुत परेशान कर सकता हूं क्योंकि मैं फील्डर को बार-बार एक या दो फीट इधर-उधर करता रहता हूं। सोचिये आप फील्डिंग कर रहे हों और हर दूसरी या तीसरी गेंद पर मैं आपसे कहूं, दो फुट दाईं तरफ हो जाओ, तीन फुट दाईं तरफ हो जाओ। आप थोड़ा झुंझला सकते हैं। मैं हमेशा कहता हूं कि मैं अपने ऊपर विश्वास रखता हूं, विकेट देखता हूं और ज्यादातर मेरी योजना काम करती है। मैं फील्डर से बस यही कहता हूं कि मेरे ऊपर नज़र रखो। अगर कैच छूट भी गया तो कोई बात नहीं, बस मेरे ऊपर नज़र रखो।”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 25 को खूंटी में महिला सम्मेलन में स्वयं सहायता समूह के साथ संवाद करेंगी

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रांची, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 25 मई झारखंड के खूंटी जिले के बिरसा मुंडा कॉलेज स्टेडियम में आयोजित जनजातीय कार्य मंत्रालय के तत्वावधान में भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम द्वारा आयोजित महिला एसएचजी सम्मेलन में महिला स्वयं सहायता समूह के साथ संवाद करेंगी।राष्ट्रपति लाइव डेमो बूथ और स्टाल का दौरा भी करेंगी।इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा, जनजातीय कार्य राज्य मंत्री रेणुका सिंह सरूता, झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित गणमान्य व्यक्ति भाग लेंगे।कार्यक्रम के दौरान, ट्राइफेड, एनएसटीएफडीसी और केंद्र/राज्य सरकार के अन्य मंत्रालयों/विभागों के विविध जनजातीय शिल्प के साथ-साथ जनजातीय कला और शिल्प के लाइव प्रदर्शनों को प्रदर्शित करने वाले बूथ स्थापित करने की योजना है। इस आयोजन का उद्देश्य महिला उद्यमियों को वनों के बारे में उनके अधिकारों, वीडीवीके के लाभ, वित्तपोषण और बाजार के संभावित मार्गों और पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं के बारे में शिक्षित करना है।इवेंट में प्रदर्शित प्रदर्शनों में निम्नलिखित शामिल होंगे: जनजातीय उत्पादों का शिल्पवार प्रदर्शन: यह प्रदर्शन 20 स्टालों में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके लिए झारखंड और बिहार राज्यों के 20 आपूर्तिकर्ताओं और वीडीवीके को उनके उत्पादों के साथ भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। इसमें देश भर के आदिवासी उत्पादों को प्रदर्शित करने के अलावा विभिन्न शिल्प वार स्टॉल शामिल होंगे। शिल्प का प्रदर्शन: शिल्प प्रदर्शन की व्यवस्था वस्त्र, बांस की टोकरी, जैविक खरसावां।हल्दी बनाने, योग मैट बनाने, सबाई घास उत्पाद बनाने, मोती खेती डेमो, सोहराई पेंटिंग,संगीत वाद्ययंत्र बनाने और लाख के आभूषण बनाने के लिए की गई है। भारतीय प्राकृतिक रेजिन और गोंद संस्थान द्वारा लाख की खेती को बढ़ावा देना, एनएसटीएफडीसी, एनएसआईसी, एनआईईएसबीयूडी, कौशल क्षेत्र परिषद , डाक विभाग और एमएसएमई मंत्रालय के स्टॉल |हेल्थ कॉर्नर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए, जनजातीय समुदायों में प्रचलित आनुवंशिक या जीवन शैली की बीमारियां, जैसे सिकल सेल एनीमिया, तपेदिक, मलेरिया और कुपोषण आदि पर जागरूकता पैदा करने के लिए हेल्थ कॉर्नर आयोजित किया जाएगा और एससीडी की स्क्रीनिंग भी आयोजित होगा। स्क्रीनिंग के बाद, प्रभावित व्यक्तियों को रोगों और इसके प्रबंधन के बारे में निदान, परामर्श और जानकारी प्राप्त होगी।इस अवसर का उत्साह बढ़ाने के लिए, सम्मेलन जनजातीय नृत्यों के साथ एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम की मेजबानी भी करेगा।इसके अतिरिक्त, 25,000 से अधिक आदिवासी सदस्यों के राष्ट्रपति के साथ जुड़ने और उत्साह और उत्सव के साथ इस कार्यक्रम में भाग लेने की उम्मीद है।

मोदी करेंगे उत्तराखंड की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का शुभारंभ

देहरादून, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी गुरुवार को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से दिल्ली के लिए पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।श्री मोदी कल सुबह 11 बजे वीडियो लिंक के माध्यम से देहरादून स्टेशन से दिल्ली के आनंद विहार स्टेशन के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखा कर शुभारंभ करेंगे। इस मौके पर उत्तराखंड के राज्यपाल (लेफ्टिनेंट जनरल) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौजूद होंगे। स्थानीय सांसद और विधायक भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।यह उत्तराखंड की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन होगी।जो पौने पांच घंटे में यह दूरी तय करेगी। मार्ग में यह गाड़ी हरिद्वार, रुड़की, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ ठहरेगी। यह आठ कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन विश्व स्तरीय सुविधाओं से लैस है। यह ट्रेन यात्रियों, विशेष रूप से राज्य की यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए आरामदायक यात्रा अनुभव के एक नए युग की शुरुआत करेगी। ट्रेन पूरी तरह स्वदेश में निर्मित है और कवच तकनीक समेत सभी उन्नत सुरक्षा सुविधाओं से लैस है।सार्वजनिक परिवहन के स्वच्छ साधन उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से प्रेरणा लेकर भारतीय रेल देश में रेल मार्गों को पूरी तरह से विद्युतीकृत करने की ओर बढ़ रही है। इसी कड़ी में श्री मोदी उत्तराखंड में नव विद्युतीकृत रेल लाइन खंडों —पीलीभीत-टनकपुर (62.17 रूट किलोमीटर),लालकुँआ- भोजीपुरा (65.07 रूट किलोमीटर),रामपुर-लालकुँआ (66.01 रूट किलोमीटर),लालकुँआ-काठगोदाम (21.48 रूट किलोमीटर),लालकुँआ-काशीपुर (57.35 रूट किलोमीटर) तथामुरादाबाद-काशीपुर-रामनगर (72.701 रूट किलोमीटर) का लोकार्पण करेंगे। इससे राज्य का पूरा रेल मार्ग 100 शत प्रतिशत विद्युतीकृत हो जाएगा। विद्युतीकृत खंडों पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन द्वारा चलाई जाने वाली ट्रेनों से न सिर्फ ट्रेनों की गति में वृद्धि होगी, बल्कि ढुलाई क्षमता भी बढेगी।

विपक्षी दलों का नये संसद भवन के उद्घाटन समारोह के बहिष्कार का निर्णय

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नयी दिल्ली, विपक्ष के 19 दलों ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में संसदीय लोकतंत्र पर कुठाराघात हुआ है और नये भवन के निर्माण में विपक्षी दलों के साथ कोई सलाह मशविरा तक नहीं किया गया इसलिए समान विचारधारा वाले दलों ने नये संसद भवन के उद्घाटन समारोह का सामूहिक रूप से बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों ने बुधवार को यहां संयुक्त वक्तव्य में कहा , “नये संसद भवन का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण अवसर है। विपक्ष मानता है कि मोदी सरकार लोकतंत्र के लिए खतरनाक स्थिति पैदा कर रही है। इस सरकार ने निरंकुश तरीके से नये संसद का निर्माण किया है इसके बावज़ूद विपक्ष उद्घाटन समारोह के अवसर पर मतभेदों को भुलाने को तैयार था। सरकार ने नये संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पूरी तरह से दरकिनार कर नये भवन का उद्घाटन श्री मोदी से कराने का निर्णय लिया है और यह हमारी लोकतांत्रिक परंपरा पर सीधा हमला है।”
विपक्षी दलों ने कहा ,“नया संसद भवन महामारी के दौर में बड़ा खर्च कर बनाया गया है। इसमें भारत के लोगों या सांसदों से कोई परामर्श नहीं लिया गया है। जब लोकतंत्र की आत्मा को संसद से निष्कासित कर दिया गया है, तो हमें नयी इमारत में कोई मूल्य नहीं दिखता इसलिए हम नए संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार करने के अपने सामूहिक निर्णय की घोषणा करते हैं। हम इस निरंकुश प्रधानमंत्री और उनकी सरकार के खिलाफ शब्दों और भावनाओं में लड़ना जारी रखेंगे और अपना संदेश सीधे लोगों तक ले जाएंगे।”
बयान में लिखा है कि संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार संघ के लिए एक संसद होगी जिसमें राष्ट्रपति और दो सदन होंगे जिन्हें क्रमशः राज्यों की परिषद और लोगों की सभा के रूप में जाना जाएगा।
विपक्षी दलों ने कहा , “राष्ट्रपति न केवल भारत में राज्य का प्रमुख होता है बल्कि संसद का एक अभिन्न अंग भी होता है। वह संसद को बुलाती हैं, सत्रावसान करती हैं और संबोधित करती हैं। संक्षेप में राष्ट्रपति के बिना संसद कार्य नहीं कर सकती है। फिर भी प्रधानमंत्री ने उनके बिना नये संसद भवन का उद्घाटन करने का निर्णय लिया है। यह अशोभनीय कृत्य राष्ट्रपति के उच्च पद का अपमान करता है और संविधान के पाठ और भावना का उल्लंघन करता है। यह सम्मान के साथ सबको साथ लेकर चलने की उस भावना को कमज़ोर करता है जिसके तहत देश ने अपनी पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति का स्वागत किया था।”
प्रधानमंत्री पर सीधा हमला करते हुए बयान में कहा गया है कि संसद को लगातार खोखला करने वाले प्रधानमंत्री के लिए अलोकतांत्रिक कृत्य नयी बात नहीं है। संसद में विपक्षी सदस्यों ने लोगों के मुद्दों को उठाया तो उनको अयोग्य, निलंबित और मौन कर दिया गया है। सत्ता पक्ष के सांसदों ने संसद को बाधित किया है। तीन कृषि कानूनों सहित कई विवादास्पद विधेयकों को लगभग बिना बहस के पारित कर दिये और संसदीय समितियों को व्यावहारिक रूप से निष्क्रिय कर दिया गया है।
विपक्ष के जिन दलों ने यह संयुक्त बयान जारी किया है उनमें कांग्रेस के अलावा तृणमूल कांग्रेस,द्राविड मुन्नेत्र कषगम, जनता दल-यू, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, झारखंड मुक्ति मोर्चा, नेशनल कांफ्रेंस, केरल कांग्रेस-मणि,रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, विदुथलाई चिरुथिगल कच्ची मारुमलार्ची द्राविड मुन्नेत्र कषगम और राष्ट्रीय लोकदल शामिल है।

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