मोदी , हिपकिंस की द्विपक्षीय वार्ता

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दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस हिपकिंस के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें उन्होंने व्यापार और वाणिज्य, शिक्षा, खेल और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ाने पर चर्चा की।दोनों नेताओं के बीच यह पहली बातचीत थी।गौरतलब है कि हिपकिंस इस साल जनवरी में पिछले प्रधानमंत्री जैकिंडा अर्डर्न के इस्तीफे की घोषणा के बाद सत्ता में आए थे।मोदी ने एक ट्वीट में कहा कि दोनों पक्षों के बीच शानदार मुलाकात हुई। उन्होंने कहा,“न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री हिपकिंस के साथ एक उत्कृष्ट बैठक हुई और भारत-न्यूजीलैंड संबंधों की पूरी श्रृंखला पर चर्चा की। हमने इस बारे में बात की कि हमारे देशों के बीच वाणिज्यिक और सांस्कृतिक संबंधों को कैसे बेहतर बनाया जाए।”विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा,“भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नयी गति देना इस वार्ता का ही हिस्सा थे। मोदी ने पोर्ट मोरेस्बी में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री से पूरी गर्मजोशी से मुलाकात की।”प्रवक्ता ने कहा,“दोनों नेताओं ने, उनकी पहली बातचीत में, व्यापार और वाणिज्य, शिक्षा, संस्कृति, खेल और लोगों से लोगों के संबंधों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।”

खड़गे ने राहुल से मिले नीतीश खड़गे ने राहुल से मिले नीतीश

दिल्ली, अगले साल प्रस्तावित आम चुनाव के मद्देनजर विपक्षी दलों को एकजुट करने में लगे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को यहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे तथा पार्टी नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर विपक्षी एकता को लेकर गहन विचार विमर्श किया।कुमार शाम करीब साढ़े चार बजे खडके के आवास 10 राजाजी मार्ग पहुंचे जहां श्रीखडगे के साथ गांधी तथा अन्य नेता पहले से ही उनकी प्रतीक्षा कर रही थे। मुलाकात एक घंटे से ज्यादा समय तक चली।इस मुलाकात के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्षी दलों को एम मंच पर लाने तथा इस बारे में रणनीति तय करने के लिए विपक्षी दलों के नेताओं की एज बैठक आयोजित की जाएगी जिसमें विभिन्न दलों के नेता शामिल होंगे। बैठक कब होगी इस बारे में इसी सप्ताह घोषणा की जाएगी।
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के शपथ ग्रहण समारोह में कुमार के साथ ही विपक्ष के 18 दलों के नेता शामिल हुए थे। विपक्षी दलों की एकजुटता के बेंगलुरु में हुए प्रदर्शन के बाद इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बांदा में सड़क हादसे में चार बाराती मरे

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बांदा, उत्तर प्रदेश में बांदा जिले के अर्तरा क्षेत्र में एक बोलेरो कार के पेड़ से टकराने से चार बरातियों की मृत्यु हो गई और तीन गंभीर रूप से घायल हो गए।अपर पुलिस अधीक्षक लक्ष्मी निवास मिश्र ने सोमवार को बताया कि तिंदवारी थाना क्षेत्र की गोधनी गांव की एक बारात बदौसा गई थी, जहां से सात बाराती एक कार पर सवार होकर रविवार को सोमवार की रात करीब डेढ़ बजे वापस लौट रहे थे कि झांसी – मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग में स्थित तुर्रा गांव के निकट बोलेरो अनियंत्रित होकर एक पेड़ से टकरा गई।इस हादसे में बुलेरो सवार दो व्यक्तियों की मृत्यु हो गई जबकि पांच गम्भीर घायल हो गए।

विवाद नहीं जनता की आवाज आई सामने

 

भोपाल, कोलार सिक्स लेन रोड निर्माण जैसे जैसे रफ्तार पकड़ रहा है विवाद की स्थितियां बढ़ रही है। सड़क निर्माण के लिए 65+45 यानी 110 फीट पर निर्माण किया जाना है सड़क के दोनों तरफ 5-5 फीट जमीन पर पानी की लाइन और बिजली की पोल को लगाया जाना है।

जिन जमीनों का उपयोग निर्माण कार्य के लिए किया जा है उसमें एक हजार से ज्यादा मकान- दुकान है अधिकतर लोगों के पास रजिस्ट्री भी है।

शनिवार-रविवार को हुआ विवाद, जनता में बढ़ी जागरूकता

शनिवार शाम और रविवार को पूर्व सरपंच ने सवाल उठाया की जब डिवाइडर से 65 फ़ीट जमीन दी जा रही है तो 5 फीट अतिरिक्त भूमि क्यों और ली जा रही है। जिस जमीन को लिया जा रहा है उस पर उनका मालिकाना अधिकार है उनका निर्माण वैध है बिना नोटिस क्यों हटाया जा रहा है? जिस कारण विवाद बढ़ा जिला प्रशासन और पुलिस को आकर मामला शांत करना पड़ा।

उपस्थित रहे एसडीएम कोलार क्षितिज शर्मा ने बताया कि कोलार सिक्स लेन के निर्माण में कुछ मकान-दुकान बाधा बन रहे है। उन्हें हटाने की कार्रवाई की जा रही है। इस दौरान कुछ विवाद की स्थिति बनी थी, लेकिन मामला शांत हो गया। जिनके निर्माण वैध, उन्हें शासन द्वारा निर्धारित अतिरिक्त एफ़एआर दिया जा रहा है।

विवाद की ख़बर के बाद जनता ने भी सवाल खड़े कर दिए है 

– जिनके फ्लैट है उसका एफएआर किसे मिलेगा?

– जिनके पास निर्माण का 10 फीट से कम का हिस्सा शेष रहेगा उस पर एफएआर बढ़ने से क्या लाभ?

– 20 साल जिस मकान की लिए किस्त चुकाई, बैंक को ब्याज दिया, शासन को टैक्स दिया फिर भी वो अवैध कैसे?

– हमें नोटिस नहीं दिया जा रहा है, न कोई नोटिफिकेशन जारी हुआ

– सड़क की वास्तविक चौड़ाई क्यों नही बताई जा रही है?

 

शत्रुता नहीं अपनत्व की भावना से होगा रूस यूक्रेन टकराव का अंत : मोदी

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हिरोशिमा (जापान), प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूस यूक्रेन के बीच टकराव को समाप्त करने के लिए विश्व के सर्वाधिक समृद्ध एवं शक्तिशाली सात देशों को भगवान बुद्ध के संदेश पर चलने का आह्वान किया जिसके अनुसार, “शत्रुता से शत्रुता शांत नहीं होती। अपनत्व से शत्रुता शांत होती है।”श्री मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन नौवें सत्र में अपने आरंभिक वक्तव्य में यह आह्वान किया। नौवें सत्र में वैश्विक शांति, स्थिरता एवं समृद्धि के विषय पर चर्चा में रूस यूक्रेन का विषय छाया रहा।मोदी ने रूस यूक्रेन संघर्ष को टालने में संयुक्त राष्ट्र एवं सुरक्षा परिषद की विफलता का हवाला देते हुए वैश्विक निकायों में सुधार की मांग को पुरज़ोर तरीके से रखा। इस मौके पर अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर बिडेन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर ओलोफ शोल्ज़, जापान के प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ भी मौजूद थे।यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमिर ज़ेलेन्स्की के बयान का हवाला देते हुएमोदी ने कहा, “आज हमने राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की को सुना। कल मेरी उनसे मुलाकात भी हुई थी। मैं वर्तमान परिस्थिति को राजनीति या अर्थव्यवस्था का मुद्दा नहीं मानता। मेरा मानना है कि यह मानवता का मुद्दा है, मानवीय मूल्यों का मुद्दा है। हमने शुरू से कहा है कि संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है और इस परिस्थिति के समाधान के लिए, भारत से जो कुछ भी बन पड़ेगा, हम यथासंभव प्रयास करेंगे।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि हम सब का साझा उद्देश्य है। आज के अंतरनिर्भर विश्व में, किसी भी एक क्षेत्र में तनाव सभी देशों को प्रभावित करता है और विकासशील देश, जिनके पास सीमित संसाधन हैं, सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। वर्तमान वैश्विक स्थिति के चलते, भोजन, ईंधन और उर्वरक संकट का अधिकतम और सबसे गहरा प्रभाव इन्हीं देशों को भुगतना पड़ रहा है।उन्होंने वैश्विक निकायों की विफलता का संकेत करते हुए कहा, “यह सोचने की बात है, कि भला हमें शांति और स्थिरता की बातें अलग-अलग मंचों में क्यों करनी पड़ रही हैं? संयुक्त राष्ट्र जिसकी शुरुआत ही शांति स्थापित करने की कल्पना से की गयी थी, भला आज संघर्षों को रोकने में सफल क्यों नहीं होता?आखिर क्यों, संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद की परिभाषा तक मान्य नहीं हो पाई है?”उन्होंने कहा, “अगर आत्मचिंतन किया जाये, तो एक बात साफ़ है कि पिछली सदी में बनाये गए संस्थान, 21वीं सदी की व्यवस्था के अनुरूप नहीं हैं। वर्तमान की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करते। इसलिए जरूरी है कि संयुक्त राष्ट्र जैसे बड़े संस्थानों में सुधारों को मूर्त रूप दिया जाये। इनको ग्लोबल साउथ की आवाज भी बनना होगा। वरना हम संघर्षो को ख़त्म करने पर सिर्फ चर्चा ही करते रह जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद मात्र एक टॉक शॉप बन कर रह जायेंगे।”श्री मोदी ने कहा कि यह जरूरी है कि सभी देश संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र, अंतर्राष्ट्रीय कानून और सभी देशों की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करें। यथास्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिशों के खिलाफ मिलकर आवाज उठायें। भारत का हमेशा यह मत रहा है कि किसी भी तनाव, किसी भी विवाद का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से, बातचीत के ज़रिये, किया जाना चाहिए। और अगर कानून से कोई हल निकलता है, तो उसको मानना चाहिए। और इसी भावना से भारत ने बंगलादेश के साथ अपने भूमिसीमा एवं जलीय सीमा विवाद का समाधान किया था।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में और यहाँ जापान में भी, हजारों वर्षों से भगवान बुद्ध का अनुसरण किया जाता है। आधुनिक युग में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका समाधान हम बुद्ध की शिक्षाओं में न खोज पाएं। दुनिया आज जिस युद्ध, अशांति और अस्थिरता को झेल रही है, उसका समाधान बुद्ध ने सदियों पहले ही दे दिया था।श्री मोदी ने कहा, “भगवान बुद्ध ने कहा है: नहि वेरेन् वेरानी, सम्मन तीध उदासन्, अवेरेन च सम्मन्ति, एस धम्मो सन्नतन। यानी, शत्रुता से शत्रुता शांत नहीं होती। अपनत्व से शत्रुता शांत होती है। इसी भाव से हमें सबके साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए।”

नये संसद भवन का उद्घाटन क्या करें मोदी: राहुल

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दिल्ली, संसद के नये भवन के उद्घाटन को लेकर राजनीति शुरू हो गई है और इस क्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भवन के उद्घाटन करने के कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए रविवार को कहा कि देश के नए संसद भवन का लोकार्पण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को करना चाहिए। राहुल गांधी ने ट्वीट किया “नये संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति जी को ही करना चाहिए, प्रधानमंत्री को नहीं।”गौरतलब है की दो दिन पहले ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ट्वीट करके जानकारी दी थी कि प्रधानमंत्री 28 मई को नये संसद भवन का उद्घाटन करेंगे।

सभी ग्रामों में बनेंगी लाड़ली बहना सेनाएँ: मुख्यमंत्री चौहान

 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बहनों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएँ संचालित हैं। योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और कार्यों पर निगरानी रखने के लिए लाड़ली बहना सेनाओं की भूमिका को सक्रिय बनाया जाएगा। सभी ग्रामों में लाड़ली बहना सेनाएँ बनेगी। बड़े ग्रामों में 21 सदस्य और छोटे ग्रामों में 11 सदस्य शामिल की जाएंगी। मुख्यमंत्रीचौहान ने कहा कि नागरिकों की जिंदगी बदलना मेरी जिंदगी का उद्देश्य है। प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ तेजी से क्रियान्वित की जा रही हैं। आगामी 15 अगस्त तक एक लाख शासकीय पदों की भर्ती का कार्य पूर्ण होगा। भर्ती की प्रक्रिया निरन्तर जारी रहेगी।

मुख्यमंत्री चौहान आज धार जिले के गंधवानी में लाड़ली बहना महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। महासम्मेलन में मुख्यमंत्री चौहान और केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रीगोयल एवं केन्द्रीय टेक्सटाईल राज्य मंत्री श्रीमती दर्शना विक्रम जरदोश के पहुँचने पर बहनों ने अगवानी की। जनजातीय समाज द्वारा पारंपरिक रूप से और तीर-कमान भेंट कर स्वागत किया गया। अतिथियों को धार जिले के प्रख्यात बाग प्रिंट के वस्त्र भेंट किये गये। मुख्यमंत्री ने 229 करोड़ 66 लाख रूपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और 187 करोड़ 76 लाख रूपये के विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। जहाँ विभिन्न संपत्तियाँ महिलाओं के नाम पर पंजीकृत हो रही हैं वहीं बहनों के कल्याण के लिए कई अभिनव योजनाएँ संचालित हैं। लाड़ली बहना योजना प्रारंभ करने से प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण का कार्य आसान हुआ है। योजना से मिलने वाली राशि से महिलाओं को छोटे-छोटे खर्चों के लिए अन्य लोगों पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में विशेष पिछड़ी जनजाति बेगा, सहरिया और भारिया के लिए 1000 रूपये मासिक प्रदान करने की योजना प्रारंभ की गई थी। इस राशि से महिलाएँ घर में फल, दूध, सब्जी आदि खरीदने का कार्य कर सकती हैं। लाड़ली बहना योजना भी इस विचार का विस्तार है। इसमें विशेष पिछड़ी जनजातियों के अलावा सभी बहनों के लिए प्रतिवर्ष 12 हजार रूपये प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 10 जून से महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलने लगेगा। पूर्व सरकार ने संबल योजना को बंद कर दिया और कन्याओं के विवाह के लिए सहायता देना भी बंद हो गया था, जिसे पुनः प्रारंभ किया गया। गरीब वर्ग के हित में सीएम राइज विद्यालय उपयोगी होंगे। ग्रामों में निर्धन तबके के विद्यार्थियों के लिए स्कूलों की व्यवस्था होना चाहिए। इसी तरह हिंदी में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की पहल भी की गई है। मुख्यमंत्री चौहान ने सीखो और कमाओ योजना से युवाओं को सहायता देने की जानकारी भी दी। धार जिले में पीएम मित्र पार्क प्रारंभ होने से क्षेत्र में महिलाओं को आसानी से रोजगार उपलब्ध होंगे।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि ग्रामों में कन्या के जन्म पर कुछ दशक पूर्व मायूसी देखने को मिलती थी लेकिन अब परिवर्तन आ रहा है। मध्यप्रदेश में बहनें और बेटियाँ सम्मान की पात्र हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने योजनाओं के क्रियान्वयन में जन-सहयोग की अपेक्षा की। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जन-कल्याण के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों, लाड़ली लक्ष्मी से लेकर लाड़ली बहना योजना तक महिला सशक्तिकरण के लिए प्रारंभ की गई योजनाओं और कार्यक्रमों का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना सिर्फ योजना नहीं, एक सामाजिक क्रांति है। महिलाओं के सम्मान के लिए सभी आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं। शराब अहातों को बंद किया जाना, इस कड़ी में लिया गया अहम फैसला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लाड़ली बहना योजना के प्रति धार जिले में काफी उत्साह देखा जा रहा है। सम्मेलन में इसकी झलक मिली जब “अब जियो लाड़ली बहना, बढ़ चलो लाड़ली बहना…” गायन काफी देर चला।

मुख्यमंत्रीचौहान ने कहा कि जनजातीय वर्ग के गरीबों के लिए पेसा नियम उपयोगी है। धार जिले के सभी विकासखंडों में इसे लागू किया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री जन-सेवा अभियान से समस्याओं के निराकरण के लिए सजग होने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री के आग्रह पर संकल्प लिया कि वे अभियान का लाभ लेंगे।

निवेश के रास्ते में कोई बाधा नहीं : मुख्यमंत्री चौहान

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रति सोमवार निवेशक की चर्चा के लिए उद्योगपतियों को आमंत्रित किया जाता है। धार जिले के पीएम मित्र टेक्सटाईल पार्क से दो लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।

मुख्यमंत्री चौहान ने लाड़ली बहना महासम्मेलन में जनता के बीच जाकर उनका अभिवादन किया। कन्या-पूजन से कार्यक्रम शुरू हुआ। अतिथियों को आम जनता ने उपहार भी प्रदान किए। विशाल पुष्पाहार से अतिथियों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर धार जिले के 13 विकासखंड की बहनों ने जिले की 90 हजार बहनों की ओर से मुख्यमंत्रीचौहान को पाती (चिट्ठियाँ) सौंपी जिसमें मुख्य मंत्री लाड़ली बहना योजना प्रारंभ करने के लिए धन्यवाद दिया।

केंद्रीय टेक्सटाईल राज्य मंत्री श्रीमती दर्शना विक्रम जरदोश ने कहा कि यह सौभाग्य है कि मुझे मध्यप्रदेश आने का अवसर मिला है। धार जिले में टेक्सटाईल क्षेत्र में अद्भुत कार्य होगा। इसमें महिलाओं की सहभागिता भी होगी। महिलाओं की भागीदारी से अच्छे परिणाम मिलेंगे। मध्यप्रदेश सजग भी है और गजब भी है। इसे प्रधानमंत्रीमोदी भी मानते हैं। पीएम मित्र टेक्सटाईल पार्क से महिलाएँ अधिक सशक्त होंगी। मध्यप्रदेश कई उत्पादों में जीआई टैग प्राप्त कर रहा है।

केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रीचौहान के आग्रह पर केंद्र सरकार ने यह पार्क स्वीकृत किया है। इससे क्षेत्र का बहुमुखी विकास होगा। उन्होंने मुख्यमंत्रीचौहान का पार्क के लिए जमीन और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने पर आभार माना। उन्होंने कहा कि हम सब मिल कर तेजी से कार्य करेंगे। पार्क से धार अंचल के विकास को गति मिलेगी और करीब 2 लाख लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

मध्यप्रदेश के औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन मंत्रीराजवर्धन सिंह दत्तीगांव, सांसदछतर सिंह दरबार और पूर्व मंत्री सुश्री रंजना बघेल ने भी संबोधित किया। महासम्मेलन में धार जिले की बहनें बड़ी संख्या में शामिल हुई।

मुख्यमंत्री चौहान ने जिले के गंधवानी में लाड़ली बहना महासम्मेलन के पश्चात पेसा नियम अंतर्गत गठित समितियों के सदस्यों से भी बातचीत की।

धार विधायक श्रीमती नीना वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष सरदार सिंह मेढ़ा, पूर्व मंत्री श्रीमती रंजना बघेल, मप्र युवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. निशांत खरे, मनोज सोमानी,धार जिला योजना समिति सदस्यजयदीप पटेल, प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति और निवेश संवर्धनमनीष सिंह, इंदौर संभाग कमिश्नर डॉ. पवन कुमार शर्मा, आईजीराकेश गुप्ता, कलेक्टर धारप्रियंक मिश्रा, डीआईजीचंद्रशेखर सिंह सोलंकी, पुलिस अधीक्षकमनोज सिंह, पूर्व सांसद सावित्री ठाकुर, पूर्व विधायककरण सिंह पवार, पूर्व विधायकवेलसिंह भूरिया, पूर्व विधायक कालूसिंह ठाकुर सहित अन्य जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे।

हर गरीब का होगा अपना आवास, कोई नहीं रहेगा मजबूर : मुख्यमंत्री चौहान

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को धार जिले की गंधवानी तहसील के गाँव साली के 115 पात्र हितग्राहियों को आवासीय भूमि का भू-अधिकार पत्र प्रदान किया। उन्होंने हितग्राहियों के साथ परंपरागत रूप से मिट्टी के गिलास, दोना और पत्तल में परोसा भोजन ग्रहण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवारों में सदस्य बढ़ गए हैं। बड़े हो गये बच्चों के परिवार को आवास की आवश्यकता है। इसलिए हमने हर गरीब परिवार को आवास के लिए आवासीय भू-अधिकार पत्र देने का निर्णय लिया है। आज ऐसे परिवारों के सदस्यों को आवासीय भूमि के पट्टे दिए गए हैं। अब म.प्र. में कोई भी गरीब मजबूर नहीं रहेगा। साली गाँव के जनजातीय समुदाय के नागरिकों ने उत्साह और उमंग से फेफरिया और ढोलगिया आदि साज लेकर परम्परानुसार मुख्यमंत्री का स्वागत किया। केंद्रीय कपड़ा एवं रेल राज्य मंत्री श्रीमती दर्शना विक्रम जरदोश, प्रदेश के उद्योग मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगाँव, धार विधायक श्रीमती नीना वर्मा, जिला योजना समिति सदस्यजयदीप पटेल उपस्थित रहे।

भैया क याद करू मक घड़ी-घड़ी हिचकी आव,भाई वाट देकु कब आवग……………

भैया क ळेंण मन पानिया बणाया………

मुख्यमंत्रीचौहान के सत्कार में साली गाँव की महिलाओं ने परम्परानुसार मंगल गीत गाये। मंगल गीत में कहा कि- “भैया क याद करू मक घड़ी-घड़ी हिचकी आव, भाई वाट देकु कब आवग, भैया क ळेंण मन पानिया बणाया, भैया क ळेंण मन लड्डू बणाया……।” मुख्यमंत्रीचौहान ने बहनों के साथ बैठ कर गीत सुना और बहनों को साड़ियाँ भेंट की।

जिले में 4012 पात्र गरीबों को मिला आवासीय भू-अधिकार पत्र

मुख्यमंत्रीचौहान और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रीपीयूष गोयल ने सखाराम-पत्नी कालीबाई, सोहन-उषाबाई, अर्जुन सिंह-फूलबाई और फाटु पिता कलसिंह को मुख़्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना में 600 वर्ग फीट आवासीय भूमि के पट्टे प्रदान किये। योजना में धार जिले में 4012 हितग्राहियों को आवासीय भूमि के पट्टे स्वीकृत किये गए हैं। सरदारपुर तहसील के 1332 पात्र हितग्राही, कुक्षी के 711, धरमपुरी के 369, बदनावर के 355, गंधवानी के 319, पीथमपुर के 271, मनावर एवं धार के 250-250 और डही के 155 पात्र हितग्राहियों को आवासीय भू-अधिकार पत्र देकर आवासीय भूमि के पट्टे प्रदान किये गये।

देश की राजनीति जल्द ले सकती है करवट: मायावती

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दिल्ली, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने रविवार को कहा कि जुमलेबाजी और धर्म की राजनीति से जनता उकता चुकी है जिससे निकट भविष्य में देश की राजनीति करवट ले सकती है।सुश्री मायावती ने आज यहां दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और झारखण्ड में पार्टी संगठन के कार्यकलापों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राजनीति दलों के चुनावी वादे, वादाखिलाफी, विषैले भाषणों के अलावा धर्म का राजनीतिक स्वार्थ के लिए अत्याधिक और अनुचित इस्तेमाल लोगों को रास नहीं आ रहा है। लोगों की जागरुकता से आने वाले समय में देश की राजनीति के करवट बदलने की संभावना है। देश के विभिन्न राज्यों और केन्द्र शासित क्षेत्रों में गरीबों, मजदूरों, उपेक्षितों-शोषितों के जीवन में आपेक्षित बेहतरी की बजाय उनके हालात बदतर होते जा रहे हैं जो चिंता का विषय है।बसपा अध्यक्ष ने कहा कि वास्तव में करोड़ों गरीबों, मेहनतकशों और उपेक्षितों के अपेक्षित विकास तथा तरक्की को लेकर सरकारों की नीयत व नीति सही व ईमानदार नहीं होने के कारण इनके हालात नहीं सुधर रहे हैं जो बहुप्रचारित विकास के सरकारी दावे की पोल खोलता है। साथ ही, रिजर्व सरकारी नौकरी में बैकलॉग तथा आरक्षण को निष्क्रिय और निष्प्रभावी बना दिये जाने से एससी, एसटी तथा ओबीसी वर्ग के परिवार चिन्तित एवं उद्वेलित है।उन्होंने कहा कि केन्द्र और दिल्ली सरकार में आपसी अविश्वास, असहयोग तथा टकराव से आम जनहित प्रभावित हो रहे है जबकि दिल्ली को आपसी सहयोग से विकास, जनहित एवं जनकल्याण की बेहतरीन मिसाल होना चाहिए। दोनों सरकारों के बीच अन्तहीन टकराव दुःखद एवं चिंता का विषय है।
जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक हालात की चर्चा करते हुये उन्होंने कहा कि पर्वतीय प्रदेश में भी पार्टी के लोग अपनी तैयारी पूरी रखें क्योंकि और अधिक समय तक चुनाव टालने के बजाय वहां विधानसभा का आमचुनाव कभी भी संभव हो सकता है वहीं हिमाचल प्रदेश में भी बसपा को अपनी तमाम कमियों को दूर करके आगे बढ़ना जरूरी हो गया है। झारखंड में पार्टी में यंग ब्लड को जोड़कर आगे बढ़ने की रणनीति की जरूरत है।उन्होंने कहा कि देश या राज्यों में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो, खासकर करोड़ों एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक समाज के लोगों को न्याय तथा बराबरी के उनके संवैधानिक हक से वंचित रखना तथा शिक्षा एवं सरकारी नौकरी में आरक्षण के जरिये उनका जीवन थोड़ा संतृप्त करने के मामले में उनकी उपेक्षा से लोगों में बेचैनी है, जो उनकी चिन्ताओं को और गंभीर बना रही है।

दो हजार के नोट बदलते समय पहचान पत्र जरूरी नहीं: एसबीआई

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दिल्ली, देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक स्टेट बैंक (एसबीआई) ने आज स्पष्ट किया कि उसकी शाखाओं में दो हजार रुपये के नोट को बदलते समय किसी भी तरह के पहचान पत्र की जरूरत नहीं है।एसबीआई के मुख्य महाप्रबंधक (परिचालन) एस. मुरलीधरन की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि बैंक की सभी शाखाओं में बिना कोई स्लिप भरे ही दो हजार रुपये के नोट बदले जाएंगे। साथ ही नोट बदलते समय ग्राहक को अपना कोई भी पहचान पत्र देने की आवश्यकता नहीं है।श्री मुरलीधरन ने कहा कि दो हजार रुपये के नोट बदलने के लिए जारी सर्कुलर में और कोई बदलाव नहीं किये गये हैं। एसबीआई की सभी शाखाओं को लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है ताकि नोट बदलने का काम सुगम तरीके से संपन्न किया जा सके।

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