सचिन तेंदुलकर के तीन बड़े रिकॉर्ड खतरे में

सचिन तेंदुलकर के तीन बड़े रिकॉर्ड खतरे में
भारतीय क्रिकेट इतिहास में सचिन तेंदुलकर का नाम सम्मान, उपलब्धियों और असंभव रिकॉर्ड्स का प्रतीक माना जाता है, लेकिन अब समय के साथ उनके कुछ बड़े रिकॉर्ड ऐसे खिलाड़ियों की पहुंच में आते दिख रहे हैं जो लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धमाल मचा रहे हैं। चाहे वनडे हो या टेस्ट, तेंदुलकर के ऐतिहासिक आंकड़ों के करीब अब कुछ दिग्गज बल्लेबाज तेज रफ्तार से पहुंच रहे हैं और यही वजह है कि क्रिकेट जगत में चर्चाएं तेज हैं कि क्या सचिन के अटूट माने जाने वाले रिकॉर्ड अब टूटने के कगार पर हैं?

घर पर सचिन का यह रिकॉर्ड खतरे में?
भारत में खेले गए वनडे मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाने की सूची में सचिन तेंदुलकर 6976 रन के साथ अभी शीर्ष पर हैं, लेकिन इस लिस्ट में दो और भारतीय खिलाड़ी तेजी से आगे बढ़ते दिख रहे हैं। विराट कोहली अब तक 6562 रन बना चुके हैं और उनकी स्थिरता, फिटनेस और फॉर्म को देखते हुए अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह रिकॉर्ड ज्यादा समय तक सुरक्षित नहीं रहेगा। वहीं, रोहित शर्मा भी 4938 रन के साथ तीसरे स्थान पर हैं और उनके पास भी यह अविश्वसनीय आंकड़ा छूने का मौका है, खासकर 2027 विश्व कप तक उनके खेलने की स्थिति को देखते हुए। वनडे में यह दौड़ सिर्फ रिकॉर्ड की नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के बदलते दौर की कहानी भी है।

100 शतकों के करीब पहुंचे कोहली
कोहली ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगातार दो वनडे में दो शतक लगाकर यह साबित कर दिया कि रनों की उनकी भूख अभी खत्म नहीं हुई है। वह अब भी पहले जैसा दमखम रखते हैं। यही वजह है कि फैंस ‘किंग इज बैक’ के नारे लगा रहे हैं। कोहली वनडे में पहले ही सचिन के 49 शतकों का रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं और अब उनकी नजर 100 शतकों के रिकॉर्ड पर है। कोहली वनडे में 53 शतक और ओवरऑल 84 शतक लगा चुके हैं। वह शतकों के शतक से 16 शतक दूर हैं। कोहली अब एक ही फॉर्मेट खेलते हैं और 100 शतक तक पहुंचना मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं। साथ ही वह 37 साल के हो चुके हैं और ज्यादा से ज्यादा 2027 वनडे विश्व कप तक खेलते दिखेंगे। तब तक भारत को ज्यादा वनडे नहीं खेलने हैं। हालांकि, लगातार दो मैचों में दो शतकों ने फैंस के मन में उम्मीदें जगाई हैं। कोहली सचिन को पीछे छोड़ते हुए किसी भी प्रारूप में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं।

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी ‘धुरंधर’

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी ‘धुरंधर’
रणवीर सिंह की मच अवेटेड फिल्म ‘धुरंधर’ ने थिएटर में दस्तक दे दी है। निर्देशक आदित्य धर की यह हाई-वोल्टेज स्पाई थ्रिलर 2025 की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक बन चुकी है। देशभक्ति, रियल-लाइफ रॉ ऑपरेशन्स से प्रेरित कहानी और बड़े पैमाने पर शूट किए गए एक्शन सीक्वेंसेस- इन सबने फिल्म को सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में बनाए रखा है। अब दर्शकों में उत्सुकता है कि यह फिल्म ओटीटी पर कब और कहां देखने को मिलेगी।

थिएटर्स में रिलीज हुई फिल्म
5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई इस फिल्म ने पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। फिल्म की स्टारकास्ट- रणवीर सिंह, संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर. माधवन, अर्जुन रामपाल, सारा अर्जुन और राकेश बेदी ने अपने मजबूत अभिनय से कहानी को नई ऊंचाई दी है। रिलीज से पहले मेकर्स ने कहानी गोपनीय रखी थी, जिससे दर्शकों की जिज्ञासा और बढ़ी। शुरुआती शो के बाद सोशल मीडिया पर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं उमड़ पड़ीं और फिल्म को इमोशनल, इंटेंस और थ्रिलिंग बताया गया।

नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी फिल्म
जो लोग इस फिल्म को ओटीटी पर देखना चाहते हैं उन लिए बड़ी खबर यह है कि फिल्म के डिजिटल राइट्स नेटफ्लिक्स ने खरीद लिए हैं। हालांकि, OTT रिलीज की आधिकारिक तारीख अभी सामने नहीं आई है, लेकिन इंडस्ट्री ट्रेंड के अनुसार उम्मीद है कि फिल्म अपनी बॉक्स ऑफिस रन पूरी होने के बाद नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी।

फिल्म के पहले दिन की कमाई
रिलीज डे की सुबह फिल्म ने देशभर में लगभग 16% के ऑक्यूपेंसी के साथ हल्की शुरुआत की। लेकिन जैसे-जैसे शो आगे बढ़े, दर्शकों की भीड़ बढ़ने लगी। दोपहर तक ऑक्यूपेंसी 28% से ऊपर पहुंच गई। यह साफ संकेत था कि वर्ड ऑफ माउथ फिल्म के पक्ष में काम कर रहा है। शाम 6 बजे तक, सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार, ‘धुरंधर’ ने 17.44 करोड़ का आंकड़ा छू लिया है। इससे फिल्म का पहले दिन 20 करोड़ क्लब में पहुंचने का रास्ता खुल गया है, क्योंकि अभी फिल्म की कमाई में इजाफा होने वाला है।

फिल्म की कहानी और स्टारकास्ट
‘धुरंधर’ की कहानी 2000 के शुरुआती दशक के पाकिस्तान में सेट की गई है, जहां रणवीर सिंह एक भारतीय जासूस की भूमिका में दिखते हैं जो लायरी गैंग्स के नेटवर्क को तोड़ने के मिशन पर है। फिल्म वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है और इसके एक्शन सीक्वेंस तथा बैकड्रॉप की काफी चर्चा है। स्टारकास्ट भी दमदार है- अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और आर. माधवन जैसे कलाकार कहानी को मजबूती देते हैं। अदित्य धर की डायरेक्शन क्वालिटी और इंटरनेशनल-लेवल प्रोडक्शन डिजाइन भी फिल्म की चर्चा का कारण बन रहे हैं।

आरबीआई की बैंकों व एनबीएफसी को दो टूक- ग्राहकों को सबसे ऊपर रखें

आरबीआई की बैंकों व एनबीएफसी को दो टूक- ग्राहकों को सबसे ऊपर रखें
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति के फैसलों की घोषणा करते हुए बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के लिए एक स्पष्ट संदेश जारी किया। गवर्नर ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों से अपनी नीतियों और कामकाज में ग्राहकों को सर्वोपरि रखने की बात कही। केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने उन्हें से ग्राहक सेवाओं में सुधार लाने और शिकायतों को भी कम करने को कहा।

1 जनवरी से शुरू होगा विशेष शिकायत निवारण अभियान
ग्राहकों की ओर बैंकों-एनबीएफसी में बढ़ती शिकायतों पर आरबीआई गवर्नर ने एक अहम घोषणा की। उन्होंने बताया कि आरबीआई लोकपाल के पास एक महीने से अधिक समय से लंबित सभी शिकायतों के समाधान के लिए अगले साल 1 जनवरी से दो महीने का विशेष अभियान चलाया जाएगा।

गवर्नर मल्होत्रा ने कहा, “हाल के दिनों में बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त होने के कारण, आरबीआई लोकपाल के पास लंबित मामलों में इजाफा हुआ है। हम 1 जनवरी से दो महीने का अभियान चलाने का प्रस्ताव कर रहे हैं, इसका उद्देश्य उन सभी शिकायतों का समाधान करना है जो एक महीने से अधिक समय से लंबित हैं।”

ग्राहक सेवा में सुधार के लिए उठाए गए कदम
आरबीआई गवर्नर ने ग्राहक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए हालिया कदमों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमने इस दिशा में कई उपाय किए हैं। री-केवाईसी, वित्तीय समावेशन और ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ अभियान अन्य हितधारकों के सहयोग से की गई कुछ प्रमुख पहल हैं।”

उन्होंने आगे बताया कि साल की शुरुआत में आरबीआई ने अपने ‘सिटिजन चार्टर’ की भी समीक्षा की थी और सभी सेवाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। गवर्नर ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा, “हम हर महीने की पहली तारीख को विभिन्न आवेदनों के निपटान और लंबित मामलों का सारांश प्रकाशित कर रहे हैं। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि 99.8% से अधिक आवेदनों का निपटान निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जा रहा है।”

वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा, शिकायतों में 13.55% की बढ़ोतरी
आरबीआई द्वारा इस सप्ताह की शुरुआत में जारी की गई ‘एकीकृत लोकपाल योजना वार्षिक रिपोर्ट’ (FY 2024-25) में उपभोक्ता शिकायतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 13.34 लाख शिकायतें दर्ज की गईं। यह पिछले वित्त वर्ष (2023-24) की तुलना में 13.55% अधिक हैं। उपभोक्ता शिकायतों का सबसे बड़ा स्रोत लोन और एडवांस रहे, जो कुल शिकायतों का 29.25% थे।

क्रेडिट कार्ड से जुड़ी शिकायतों में 20.04% की भारी वृद्धि देखी गई, जिससे यह शिकायत की दूसरी सबसे बड़ी श्रेणी बन गई। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग से जुड़ी शिकायतों में 12.74% की गिरावट आई है, जो या तो बेहतर सिस्टम दक्षता या बदलते उपभोक्ता व्यवहार का संकेत है। कुल शिकायतों में बैंकों की हिस्सेदारी 81.53% रही, जबकि एनबीएफसी (NBFCs) की हिस्सेदारी 14.80% थी। रिपोर्ट में डिजिटल शिकायतों के बढ़ते दायरे, निपटान दक्षता में सुधार, और लोन, क्रेडिट कार्ड व डिजिटल धोखाधड़ी को लेकर बढ़ती चिंताओं को भी रेखांकित किया गया है।

बिहार सरकार में तीन नए और विभाग

बिहार सरकार में तीन नए और विभाग
बिहार सरकार युवाओं को रोजगार देने के लिए अब एक अलग विभाग लेकर आई है। साथ ही सरकार उच्च शिक्षा और बिहार में नागर विमानन के विकास को लेकर भी सक्रिय हुई है। इन क्षेत्रों के लिए भी अलग-अलग विभागों का गठन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा के विशेष सत्र के अंतिम दिन के समापन के बाद यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अगले 5 वर्षों (2025-30) में 1 करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए राज्य में अधिक से अधिक युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देना आवश्यक है और उन्हें गुणवत्तापूर्ण उच्च एवं तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराना भी जरूरी है। साथ ही लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सघन अनुश्रवण की भी आवश्यकता होगी।

इसी उद्देश्य से राज्य में तीन नए विभाग, युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, नागर विमानन विभाग के गठन का निर्देश दिया गया है। इन विभागों के सृजन से राज्य में युवाओं को नौकरी और रोजगार दिलाने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है। युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के जरिए अगले 5 वर्षों में बड़ी संख्या में युवाओं को उद्यमिता के अवसर प्रदान करने और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने की योजना है।

उच्च शिक्षा विभाग के गठन का उद्देश्य उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार करना, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा का विकास करना और सभी वर्गों के युवाओं को रोजगारपरक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में कई नए हवाई अड्डों का निर्माण हो रहा है और भविष्य में उड़ान योजना के तहत कई बड़े-छोटे हवाई अड्डों का निर्माण भी प्रस्तावित है। अलग से नागर विमानन विभाग बनने से इन परियोजनाओं में तेजी आएगी, औद्योगिक माहौल बेहतर होगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य में निर्मित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशालय और बिहार विपणन प्रोत्साहन निगम (Bihar Marketing Promotion Corporation) बनाने का भी निर्णय लिया है, ताकि सरकारी नौकरी और रोजगार देने के लक्ष्य को आसानी से पूरा किया जा सके। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशालय के तहत प्रत्येक जिले में मेगा स्किल सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जिससे युवाओं को एमएसएमई से जुड़े कौशल विकास का प्रशिक्षण मिल सके और उन्हें अधिक रोजगार अवसर प्राप्त हों। बिहार विपणन प्रोत्साहन निगम के गठन से कृषि, पशुपालन, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, ग्रामीण उद्योग, लघु एवं कुटीर उद्योग जैसे क्षेत्रों में उत्पादन, गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था मजबूत होगी, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के सुखद भविष्य के लिए लगातार काम कर रही है। अधिक से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी एवं रोजगार देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। बिहार के युवा दक्ष और आत्मनिर्भर बनें, उन्हें रोजगार के नए अवसर मिलें और उनका भविष्य सुरक्षित हो—इसी संकल्प के साथ सरकार आगे बढ़ रही है।

इंडिगो मामले में केंद्र सरकार ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश

इंडिगो मामले में केंद्र सरकार ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश
भारत सरकार ने एयरलाइन कंपनी इंडिगो की सेवाओं में आई दिक्कतों की उच्च स्तरीय जांच कराने का फैसला किया है। इसके साथ ही सरकार की ओर से यात्रियों की दिक्कतों को कम करने के लिए 24X7 कंट्रोल रूम बनाया है।इसके अलावा केंद्र सरकार ने इंडिगो को फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन के नए नियमों में राहत दी है। सरकार ने कहा है कि एयर सेफ्टी से कोई समझौता किए बिना, यह फैसला पूरी तरह से यात्रियों के हित में लिया गया है।

इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई
उड्डयन मंत्रालय ने कहा है कि भारत सरकार ने इंडिगो की सेवाओं में आई रुकावट की उच्च स्तरीय जांच कराने का फैसला किया है। मंत्रालय ने कहा कि जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इंडिगो में क्या गलत हुआ, जहां भी जरूरी होगा वहां जवाबदेही तय की जाएगी और सही कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी रुकावटों को रोकने के लिए उपाय सुझाए जाएंगे, ताकि यात्रियों को दोबारा ऐसी मुश्किलों का सामना न करना पड़े।

नियंत्रण कक्ष स्थापित किया
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इंडिगो की चल रही उड़ान सेवा बाधाओं की वास्तविक समय में निगरानी के लिए एक 24×7 नियंत्रण कक्ष (011-24610843, 011-24693963, 096503-91859) स्थापित किया है। मंत्रालय ने कहा कि यह नियंत्रण कक्ष त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई, हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय, और उत्पन्न होने वाले मुद्दों के तत्काल समाधान को सुनिश्चित करेगा। इसका उद्देश्य यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करना और प्रभावित हवाई अड्डों पर सामान्य संचालन को शीघ्र बहाल करना है।

डीजीसीए ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन आदेश को स्थगित किया
विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय केवल यात्रियों के हित में लिया गया है, विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, छात्रों, मरीजों और उन अन्य व्यक्तियों के लिए जो आवश्यक जरूरतों के लिए समय पर हवाई यात्रा पर निर्भर हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस कदम से विमानन सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

मंत्रालय ने आगे कहा, इसके अतिरिक्त कई परिचालन उपाय भी लागू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि एयरलाइन सेवाएं जल्द से जल्द सामान्य स्थिति में लौट सकें और यात्रियों को होने वाली असुविधा में कमी आए। इन निर्देशों के त्वरित कार्यान्वयन के आधार पर हमें उम्मीद है कि उड़ानों का शेड्यूल कल तक स्थिर होना शुरू हो जाएगा। हमें अनुमान है कि आगामी तीन दिनों में सेवाएं पूरी तरह से बहाल हो जाएंगी।

क्या हैं FDTL नियम?
पायलट और क्रू सदस्यों के ओवरटाइम और लंबे काम के घंटे देखते हुए नए नियम लागू किए गए हैं। FDTL नियम यह करता है कि एक पायलट कितने समय तक ड्यूटी पर रह सकता है। कितने घंटे उड़ान भर सकता है और दो ड्यूटी के बीच उसे न्यूनतम कितना आराम मिलना चाहिए। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने जनवरी 2024 में अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड और थकान से जुड़े डाटा के आधार पर इन नियमों को अपडेट किया था। जिससे की उड़ान के दौरान सुरक्षा जोखिम को कम किया जा सके।

नए नियम के तहत मुख्य बदलाव कुछ इस तरह हैं:
हर हफ्ते 48 घंटे का लगातार अनिवार्य आराम
रात में काम करने के घंटे को 00:00-05:00 से बढ़ाकर 00:00-06:00 किया गया
रात में लैंडिंग सीमा 6 से घटाकर 2 की गई
लगातार दो नाइट ड्यूटी की अधिकतम सीमा
थकान संबंधी डाटा की हर तिमाही में रिपोर्टिंग और उसके आधार पर रोस्टर में बदलाव

फिर से चर्चा में क्यों आए ये नियम?
जैसे जैसे एयरलाइंस नए नियमों का पालन कर रहे हैं, पायलट आराम से जुड़े ये नियम उनके ऑपरेशंस पर सीधा असर डाल रहे हैं। नियमों की वजह से एयरलाइंस को ज्यादा पायलटों की जरूरत पड़ रही है। या फिर उन्हें अपने शेड्यूल को दोबारा डिजाइन करना पड़ रहा है। इसी कारण शॉर्ट-टर्म में कैंसिलेशन, देरी और ऑपरेशन कॉस्ट में बढ़ोतरी देखी जा रही है। यही वजह है कि यह मुद्दा सुर्खियों में है।

अनुशासन, नवाचार और अपनी संस्कृति से जुड़ाव – यही है सफल भविष्य की कुंजी: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

अनुशासन, नवाचार और अपनी संस्कृति से जुड़ाव – यही है सफल भविष्य की कुंजी: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह का आयोजन आज पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के मुख्य आतिथ्य में गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल रमेन डेका ने की। अति विशिष्ट अतिथि के तौर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विशिष्ट अतिथि उपमुख्यमंत्री अरुण साव तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा शामिल हुए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य डॉ. दिवाकर नाथ वाजपेयी उपस्थित रहे। समारोह में 64 शोद्यार्थियों को शोध उपाधि, 92 गोल्ड मेडल एवं 36950 स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधि दी गई।

विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्नातक छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने युवा पीढ़ी की ऊर्जा और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी है और वर्तमान युवा इसका ऐतिहासिक साक्षी और भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से स्नातक होना शिक्षा की पूर्णता नहीं है, बल्कि इक्कीसवीं सदी में सफलता के लिए निरंतर सीखना, कौशल निखारना और आत्मविकास अनिवार्य है।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि देश के विश्वविद्यालयों में बेटियाँ शिक्षा के क्षेत्र में कई बार बेटों से आगे निकल रही हैं और इस विश्वविद्यालय के स्वर्ण पदक विजेताओं में भी बेटियों की संख्या उल्लेखनीय है। उन्होंने विद्यार्थियों, विशेषकर पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि केवल उनकी मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे माता-पिता का त्याग, परिवार का सहयोग और गुरुओं का अमूल्य मार्गदर्शन भी निहित है। यह हर विद्यार्थी के लिए एक सुनहरा यादगार पल है, जिसे वे जीवनभर याद रखेंगे। उन्होंने कहा कि-“कभी यह मत सोचिए कि आप पीछे रह गए हैं। यदि आप प्रयास करना नहीं छोड़ते, तो आप हमेशा पहले स्थान पर हो सकते हैं।” उन्होंने छात्रों से अपने सपनों को साकार करने के लिए परिश्रम करने, भारतीय संस्कृति, मूल्यों और जड़ों से जुड़े रहने और योग व विज्ञान जैसी भारतीय विरासत को अपनाने का आह्वान किया।

राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि जीवन में अनेक चुनौतियाँ आती हैं, जिनमें कभी-कभी हम गिरते भी हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हर बार स्वयं को संभालकर फिर से खड़ा होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में गिरावट से भयभीत न हों और हमेशा उठने का साहस रखें। राज्यपाल ने अनुशासन को जीवन में सफलता की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि जीवन एक सुंदर यात्रा है, और इसे उद्देश्यपूर्ण, सकारात्मक और सार्थक ढंग से जीना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर ध्यान आकर्षित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज तनाव एक बड़ी चुनौती बन चुका है। इसलिए योग, ध्यान और नियमित शारीरिक गतिविधि को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से यह भी आग्रह किया कि वे जीवन में ऐसा कार्य चुनें जिसमें तनाव कम हो, पारदर्शिता हो और जिससे स्वयं, समाज और राष्ट्र का सकारात्मक परिवर्तन संभव हो।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सफलता केवल डिग्री से नहीं, बल्कि सीखने की निरंतर इच्छा से तय होती है। दुनिया तेजी से बदल रही है, और जो युवा अपनी संस्कृति की जड़ों से जुड़े रहते हुए तकनीक, नवाचार और मेहनत का मार्ग चुनते हैं, वहीं कल का भारत गढ़ेंगे। जीवन में अवसर हमेशा बाहर नहीं मिलते, कई बार हमें स्वयं अवसर बनाना होता है। अनुशासन, लगन और सकारात्मक दृष्टि ही वह शक्ति है, जो हर साधारण क्षण को असाधारण उपलब्धि में बदल देती है। उन्होंने कहा कि मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि यह पीढ़ी छत्तीसगढ़ को और पूरे देश को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह समारोह केवल औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों, संकल्पों और संघर्षों का उत्सव है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बहुविषयक अध्ययन, कौशल आधारित शिक्षण, चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट और आधुनिक पाठ्यचर्या जैसी व्यवस्थाओं को लागू करने की सराहना की, जिससे छात्र वैश्विक अवसरों का लाभ उठा सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विवि में डिजिटलईजेशन के माध्यम से विश्वविद्यालय द्वारा प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा फॉर्म, ट्रांसक्रिप्ट और डिग्री प्रमाणपत्र जैसी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है। इस नई प्रणाली से छात्रों को सरल, पारदर्शी और त्वरित सेवाएँ मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि पीएम उषा कार्यक्रम के तहत वित्तीय सहायता नए प्रयोगशालाओं, स्मार्ट कक्षाओं, डिजिटल लाइब्रेरी और आधुनिक अकादमिक अवसंरचना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी इससे विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार को सुनिश्चित कर सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों को राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कृषि विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक संरचना, भाषा-साहित्य और तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को ज्ञान, अनुशासन और प्रेरणा का एक उत्सव प्रदान किया और अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय की उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार की प्रतिबद्धता को उजागर किया।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी के मार्गदर्शन में बने इस राज्य ने शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्रों के परिश्रम, संघर्ष और लगन का सम्मान है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है तथा 20 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिससे शैक्षणिक अधोसंरचना और अधिक मजबूत होगी। अतिथियों ने विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका कन्हार का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य डॉ. अरूण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने दिया।

कार्यक्रम में विधायक सर्व अमर अग्रवाल, धर्मजीत सिंह, धरमलाल कौशिक, सुशांत शुक्ला, अटल वास्तव, दिलीप लहरिया, क्रेडा के अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी, महापौर मती पूजा विधानी, कुलसचिव डॉ. तारणीश गौतम सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले फिल्म निर्देशक गोवारीकर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले फिल्म निर्देशक गोवारीकर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से फिल्म निर्माता एवं निर्देशक आशुतोष गोवारीकर ने शुक्रवार को ग्वालियर विमानतल पर सौजन्य भेंट की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोवारीकर का आत्मीय स्वागत किया और प्रदेश में फिल्म निर्माण की संभावनाओं पर उनसे चर्चा की। आशुतोष गोवारीकर ने भी मध्य प्रदेश में मिल रहे सहयोग की सराहना की तथा ग्वालियर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता की प्रशंसा की। मुलाकात के दौरान फिल्म और पर्यटन क्षेत्र में संभावित सहयोग पर बातचीत हुई।

मुख्यमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर कूनो नेशनल पार्क में छोड़े 3 चीते

मुख्यमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर कूनो नेशनल पार्क में छोड़े 3 चीते
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों के अनुरूप श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों के पुनर्स्थापन को नई दिशा मिली है। आज अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस के अवसर पर मादा चीता ‘वीरा’ के साथ उसके दो शावक खुले वन में विचरण के लिए छोड़े गए हैं। राज्य में चीतों की संख्या अब 32 हो गई है। इसमें गांधीसागर अभयारण्य के 3 चीते भी शामिल हैं। कूनो नेशनल पार्क चीतों के पुनर्वास से अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर का केंद्र बन चुका है। कूनो में हमारी धरती पर ही जन्मे तीसरे पीढ़ी के चीते विचरण कर रहे हैं। कूनो में जन्मी मादा चीता ‘मुखी’ के 5 शावक स्वस्थ हैं, यह सुखद समाचार है। कूनो के चीते अब श्योपुर से मुरैना और राजस्थान की धरती तक दौड़ लगा रहे हैं। राज्य की समृद्ध वन संपदा में चीता मुकुटमणि और कोहिनूर के समान है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर तीन चीतों को स्वछंद विचरण के लिये बाड़े से अभयारण्य में छोड़ा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की भूमि पर सभी जीव सुरक्षित होंगे, राज्य सरकार इसके लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उन्नत रेडियो ट्रेकिंग प्रणाली और समर्पित टीमों के माध्यम से सतत् निगरानी की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चीता दिवस के अवसर पर कूनो राष्ट्रीय उद्यान के वर्ष-2026 के कैलेण्डर और ‘फील्ड मैन्युअल फॉर क्लिनिकल मैनेजमेंट ऑफ फ्री-रेंजिंग चीताज़ इन कूनो नेशनल पार्क’ बुक का विमोचन किया। साथ ही कूनो राष्ट्रीय उद्यान में ‘नव-निर्मित सोवेनियर शॉप’ का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान के पारोंद में आयोजित कार्यक्रम में चीता दिवस पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई दी। चीता प्रोजेक्ट की सफलता के लिए उन्होंने वन विभाग के अमले को धन्यवाद भी दिया।

चीतों का परिवार बढ़ रहा है तेजी से
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश, टाइगर, लैपर्ड और चीता स्टेट है। हमारे जंगल बहुत से वन्यजीवों के आश्रय स्थल हैं। ऐसे में विश्व में पहली बार चीतों का पुनर्स्थापन मध्यप्रदेश में हुआ, इसके लिए वन विभाग के मंत्री और अधिकारी बधाई के पात्र हैं। श्योपुर, कूनो में चीतों के पुनर्स्थापन से पर्यटन में 5 गुना वृद्धि हो चुकी है। चीतों का परिवार जिस तेज गति से बढ़ रहा है, उसी हिसाब से भविष्य में कूनो नेशनल पार्क से विस्थापित लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया बड़े तालाब के बोट क्लब पर 20 नवीन शिकारा नाव सेवा का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया बड़े तालाब के बोट क्लब पर 20 नवीन शिकारा नाव सेवा का शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राजा भोज की नगरी भोपाल में लगभग एक हजार साल पहले बने बड़े तालाब में ‘शिकारा नाव’ सेवा का शुभारंभ ऐतिहासिक अवसर है। इन नवीन 20 शिकारों के माध्यम से पर्यटकों को कश्मीर की प्रसिद्ध डल झील का आनंद, झीलों की नगरी भोपाल में ही मिल जाएगा। शिकारों में पर्यटकों के लिए खान-पान एवं आरामदायक बैठक व्यवस्था की गई है। ये शिकारे प्रदेश के जल-पर्यटन (वॉटर टूरिज्म) को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलवाएंगे। प्रदेशवासी पर्यटन सेवा का लाभ उठाने के लिए आगे आएं। एम.पी. टूरिज्म, वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियों को भी आगे बढ़ा रहा है। शिकारा सेवा का आनंद उठाते हुए पर्यटक स्वदेशी उत्पादों की खरीद भी कर पाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने वन्य जीवों के पुनर्वास में भी इतिहास रचा है। आज अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर कूनो में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को बोट क्लब भोपाल पर ‘शिकारा नाव’ सेवा को झंडी दिखाने के बाद यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक एवं अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल विशेष रूप से उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को लेकर आपार संभावनाएं विद्यमान हैं। नर्मदा वैली सहित प्रदेश की बड़ी-बड़ी जल परियानाओं के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित करने वाली गतिविधियां को बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। पिछले एक साल में उज्जैन आने वाले पर्यटकों की संख्या 7 करोड़ के पार पहुंच गई।

शिकारे की सैर का लिया आनंद
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिकारों को फ्लेग ऑफ करने के बाद बड़े तालाब में शिकारे की सैर का आनंद लिया और उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और गणमान्य नागरिकों ने शिकारा बोट रेस्टोरेंट से चाय, पोहा, समोसे एवं फलों का जायका लिया। साथ ही फ्लोटिंग बोट मार्केट से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की पारम्परिक कला बाग और बटिक वस्त्रों, जैविक उत्पादों आदि की खरीदारी भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोट क्लब पर मौजूद छात्र-छात्राओं के साथ सेल्फी ली और अथितियों के साथ टेलीस्कोप से सूर्य के दर्शन किए। टेलीस्कोप की बोट क्लब पर व्यवस्था वैज्ञानिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आंचलिक विज्ञान केंद्र भोपाल द्वारा की गई थी।

पीएम मोदी और पुतिन के मीटिंग में दिखा ये खास बैकग्राउंड

पीएम मोदी और पुतिन के मीटिंग में दिखा ये खास बैकग्राउंड
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इन दिनों भारत के दौरे पर हैं। इसी दौरान जब पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले, तो पूरी दुनिया की नजरें दोनों नेताओं के हैंडशेक, उनकी बॉडी लैंग्वेज और महत्वपूर्ण घोषणाओं पर थीं। मगर इन सबके बीच, एक और चीज थी जिसने चुपचाप सबका ध्यान खींच लिया। एक लंबा, आकर्षक हेलिकोनिया पौधा जो ठीक उनके पीछे रखा गया था। यह सिर्फ एक सजावटी वस्तु नहीं था।

उच्च स्तरीय कूटनीतिक बैठकों में, कमरे की एक भी चीज रैंडम नहीं होती है। फूल से लेकर मेज-कुर्सी के रंग या बैकग्राउंड तक, हर एक चीज की डिटेलिंग पर बहुत ध्यान दिया जाता है। प्रत्येक वस्तु सावधानी से चुनी जाती है ताकि वह मेजबान देश के मूल्यों, सांस्कृतिक समृद्धि या बैठक के अप्रत्यक्ष संदेश को व्यक्त कर सके।

हेलिकोनिया जैसे पौधे की उपस्थिति इस बात का प्रतीक है कि भारत ने इस बैठक के लिए कितनी सूक्ष्मता से तैयारी की थी, और यह पौधा एक गैर-मौखिक कूटनीतिक संदेश देने का माध्यम बन गया था। इस पौधे ने लोगों में उत्सुकता पैदा कर दी है इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

‘लाल’ रंग का चयन और इसका महत्व
हेलिकोनिया का लाल और नारंगी रंग का चुनाव भी जानबूझकर किया गया था। भारतीय संस्कृति में, लाल रंग शक्ति, उत्साह, शुभता और प्रेम का प्रतीक है। कूटनीति के संदर्भ में, यह रंग दोनों देशों के बीच मजबूत और दोस्ताना संबंधों का प्रतीक हो सकता है। यह रंग तुरंत ध्यान खींचता है और पूरे फ्रेम को एक सकारात्मक और गतिशील ऊर्जा प्रदान करता है।

poshan-tracker-pmmvy-grievance-redressal-2026

POSHAN Tracker और PMMVY की शिकायतों का होगा निपटारा, 30 अक्टूबर को देशभर में...

0
नई दिल्ली | 30 अक्टूबर 2026 | सामाजिक कल्याण समाचार केंद्र सरकार ने गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और पोषण सेवाओं के लाभार्थियों की...
anath-bachchon-ke-liye-sarkari-yojana-2026

अनाथ बच्चों के लिए सरकार की खास योजनाएँ, पढ़ाई से लेकर आर्थिक सहायता तक

0
नई दिल्ली | सरकारी योजना समाचार देश में ऐसे कई बच्चे हैं, जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है या जिनके पास देखभाल करने वाला...
Government welfare schemes have improved the living standards of 22 crore people

सरकारी कल्याण योजनाओं से 22 करोड़ लोगों के जीवन स्तर में सुधार, MoSPI के...

0
नई दिल्ली। भारत में सरकारी सामाजिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलने वाली मुफ्त या रियायती वस्तुओं से उनके...

भोपाल AIIMS में अंगदान से 3 लोगों को नई जिंदगी की उम्मीद, शिवानी को...

0
भोपाल/नर्मदापुरम। अपनों को खोने का दर्द कितना गहरा होता है, यह उस परिवार से बेहतर कौन समझ सकता है, जिसने सड़क हादसे में अपनी...
social welfare 2026

₹53,428 करोड़ की सामाजिक सहायता योजना मंजूर, दिव्यांग पेंशन के नियमों में बदलाव

0
नई दिल्ली, 16 अक्टूबर। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए ₹53,428 करोड़ की...