माफिया अतीक का पुत्र असद अहमद सशस्त्र मुठभेड में मारा गया

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झांसी, प्रयागराज में चर्चित उमेश पाल हत्याकांड में फरार आरोपी और माफिया अतीक अहमद के पुत्र असद अहमद और शूटर गुलाम को आज झांसी के बडागांव थाना क्षेत्र में यूपीएसटीएफ ने सशस्त्र मुठभेड में मार गिराया। एसटीएफ सूत्रों के अनुसार यह दोनों मोटरसाइकिल से मध्य प्रदेश के रास्ते भागने की फिराक में थे कि इसी दौरान बड़ागांव थानाअंतर्गत पारीछा बांध की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते पर बदमाशों का एसटीएफ टीम के साथ आमना सामना हो गया । बदमाशों ने एसटीएफ पर फायरिंग कर दी और जवाबी कार्रवाई में दोनों बदमाश मारे गये। दोनों शातिर बदमाशों पर पांच पांच लाख का इनाम था।दोनों बदमाशों के शवों को मौके से एबुंलेंस द्वारा झांसी मेडिकल कॉलेज में लाया गया है और यही पर इनका पोस्टमार्टम भी किया जायेगा।एसटीएफ की टीम का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) नवेंदु और एसटीएफ के डीएसपी विमल कर रहे थे। मृतक बदमाशों के पास से अत्याधुनिक हथियार बरामद किए गए हैं। असद माफिया सरगना अतीक अहमद का पुत्र है जो उमेश पाल हत्याकांड में शामिल था।पुलिस सूूत्रों के अनुसार मोंठ और बडागांव थानाक्षेत्र में अतीक के बेटों को पनाह मिलने की आशंकाओं के बीच यह थानाक्षेत्र पुलिस के राडार पर थे। इससे पहले भी इस इलाके में बदमाशों की खोज के लिए पुलिस का आना जाना लगा हुआ था।गौरतलब है कि राजूपाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल और उनके दो सरकारी सुरक्षाकर्मियों की 24 फरवरी को दिनदहाड़े उनके ध्रूमनगंज स्थित आवास के बाहर हत्या कर दी गयी थी। इस मामले में उमेश पाल की पत्नी जया पाल की तहरीर पर पुलिस ने अतीक, उनके भाई अशरफ, पत्नी शाइस्ता परवीन, दो बेटे और नौ अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इनमे से हत्याकांड में शामिल कार चालक अरबाज को पुलिस ने प्रयागराज में ढेर कर दिया था जबकि बाद में एक और शूटर विजय चौधरी उर्फ उस्मान को भी एसटीएफ ने मार गिराया था।

सरकारी सेवाओं में आ रहे कर्मी जन विश्वास बढ़ाने का काम करें: मोदी

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दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरकारी कर्मी के रूप में अपनी यात्रा शुरू कर रहे लोगों से आजादी के अमृतकाल में हर कदम विकास के प्रयासों में योगदान करने और नागरिकों के साथ व्यवहार करते समय अपने को उसकी जगह रख कर सोचने तथा उनका उत्साह एवं विश्वास बढ़ाने वाला आचरण प्रस्तुत करने का आह्वान किया है।
उन्होंने सरकारी कर्मियों से कहा कि वे देश के नागरिकों के मन में अपने बर्ताव से बुरा अनुभव न आने दें।
मोदी गुरुवार को सरकार के रोजगार मेला कार्यक्रम में विभिन्न विभागों में भर्ती किए गए करीब 71 हजार नवनियुक्त कर्मियों को नियुक्ति-पत्र वितरित करने के बाद उन्हें वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित कर रहे थे। मोदी ने कहा,
“अब यह आपकी जिम्मेदारी है कि सरकारी सेवा में आने के बाद, दूसरों की उन उम्मीदों को आप पूरा करें। अपने आपको योग्य बनाएं। आप में से हर कोई किसी न किसी रूप में अपने कार्य से सामान्य मानव के जीवन को प्रभावित भी कर सकता है, प्रेरित भी कर सकता है। उसको निराशा की गर्त में डूबने से बचा भी सकता है। इससे बड़ा मानवता का क्या काम हो सकता है साथियों?”
उन्होंने कहा, “आपकी कोशिश होनी चाहिए कि आपके कार्य का सकारात्मक प्रभाव हो, आपके काम से सामान्य मानवी का जीवन बेहतर हो। व्यवस्थाओं पर उसका विश्वास बढ़ना चाहिए। ”
प्रधानमंत्री ने कहा, “आज आप एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर अपनी यात्रा भले ही शुरू कर रहे हैं। इस यात्रा में हमेशा उन बातों को याद रखना चाहिए और हमेशा अपने आप को एक सामान्य नागरिक के तौर पर आप पिछले पांच साल से, 10 साल से या जब से समझने लगे हैं, क्या-क्या महसूस करते थे। सरकार का कौन सा व्यवहार आपको अखरता था। सरकार का कौन सा व्यवहार आपको अच्छा लगता था। आप भी ये जरूर मन में मानीये कि जो बुरे अनुभव आपको आए हैं, आपके रहते हुए किसी भी देश के नागरिक को बुरा अनुभव नहीं आने देंगे। ”
सरकार ने एक वर्ष के भीतर केंद्र सरकार में करीब 10 लाख नौकरियां देने का फैसला किया है। इसकी के तहत पिछले वर्ष 22 अक्टूबर को पहला पीएम रोजगार मेला शुरू किया गया था, जहां 75 हजार सरकारी नौकरियां दी गईं।
कई रोजगार मेलों के जरिए अब तक केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 2,18,000 नौकरियां प्रदान की गई हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा,“ आज जिन लोगों को नियुक्ति पत्र मिला है, उन्हें मैं विशेष तौर पर कुछ सुझाव अवश्य देना चाहता हूं। आप में से कुछ लोग रेलवे, तो कुछ लोग शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ रहे हैं। कुछ लोगों को बैंकों में अपनी सेवाएं देने का अवसर मिल रहा है। ये आपके लिए देश के विकास में योगदान देने का अवसर है।
उन्होंने कहा, “ आप कल्पना कर सकते हैं कितने उत्तम कालखंड में, कितने उत्तम अवसर के साथ, देश को आगे बढ़ाने के लिए आज आपके कंधों पर आप नयी जिम्मेदारी ले रहे हैं। आपका एक-एक कदम, आपके समय की एक-एक पल देश को तेज गति से विकसित बनाने में काम आने वाली है। ”
इन नवनियुक्त कर्मियों में ट्रेन मैनेजर, स्टेशन मास्टर, सीनियर कमर्शियल कम टिकट क्लर्क, इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर, कांस्टेबल, स्टेनोग्राफर, जूनियर अकाउंटेंट, पोस्टल असिस्टेंट, इनकम टैक्स इंस्पेक्टर, टैक्स असिस्टेंट, सीनियर ड्राफ्ट्समैन, जूनियर इंजीनियर/सुपरवाइजर, असिस्टेंट प्रोफेसर, टीचर, लाइब्रेरियन, नर्स, प्रोबेशनरी ऑफिसर, पीए, एमटीएस, अन्य शामिल हैं।
नये भर्ती किए गए लोगों को ‘कर्मयोगी प्रारंभ’ के जरिए खुद को प्रशिक्षित करने का अवसर भी मिलेगा, जो विभिन्न सरकारी विभागों में सभी नए नियुक्तियों के लिए एक ऑनलाइन ओरिएंटेशन कोर्स है।

अक्षय तृतीया 22 अप्रैल 2023 शनिवार के दिन मनाई जाएगी

Akshaya Tritiya 2023

भोपाल : हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का त्योहार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस वर्ष अक्षय तृतीया 22 अप्रैल 2023 शनिवार के दिन मनाई जा रही है. बहुत सी जगहों पर इसे आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, अक्षय तृतीया पर मांगलिक कार्य के लिए मुहूर्त नहीं देखना पड़ता. इस दिन किसी भी प्रकार के नए कार्य की शुरुआत करने से उसमें सफलता मिलती है. अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित किया गया है. कोलार निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित राजेश शुक्ला बता रहे हैं, इस वर्ष अक्षय तृतीया कब है, पूजा मुहूर्त, शुभ समय और पूजा-विधि.

अक्षय तृतीया पर इन चीजों को खरीदना होता है शुभ

1. दक्षिणावर्ती शंख: अक्षय तृतीया के दिन दक्षिणावर्ती शंख को खरीद कर घर लाना बेहद शुभ है. माता लक्ष्मी को शंख बेहद प्रिय है. वहीं, भगवान विष्णु भी अपने हाथों में शंख धारण करते हैं. अक्षय तृतीया पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए दक्षिणावर्ती शंख को घर लेकर आना चाहिए और इसकी विधि-विधान से पूजा करके घर के मंदिर में स्थापना करनी चाहिए.

2. श्रीयंत्र : अक्षय तृतीया के दिन श्री यंत्र को घर में लाना बेहद शुभ माना जाता है. अक्षय तृतीया के दिन श्री यंत्र खरीदकर घर के मंदिर में विधि-विधान के साथ इसकी स्थापना करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और व्यक्ति व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है.

3. मटका: अक्षय तृतीया के दिन मटका या कलश खरीदना ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से बेहद शुभ है. अक्षय तृतीया के दिन जल से भरा हुआ मटका या चावल से भरा कलश लेकर के आना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती.

4. जौ: अक्षय तृतीया के दिन जौ खरीदना बेहद शुभ होता है. इस दिन पूजा में माता लक्ष्मी को भी जौ अर्पित करने चाहिए. पूजा के पश्चात इस जौ को लाल कपड़े में लपेटकर अपने घर के धन स्थान पर रखने से घर की धन संपत्ति बढ़ती है.

अक्षय तृतीया 2023 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, बैसाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 22 अप्रैल 2023 को सुबह 7:49 से शुरू होगी और 23 अप्रैल 2030 को सुबह 7:45 पर समाप्त हो जाएगी.

अक्षय तृतीया 2023 पूजा मुहूर्त
अक्षय तृतीया के दिन स्नान, दान, जप, हवन, तर्पण आदि कार्य करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है. अक्षय तृतीया पर लक्ष्मी नारायण और कलश पूजन के लिए 22 अप्रैल 2030 को सुबह 7:49 से दोपहर 12:20 तक शुभ मुहूर्त है. पूजा का समय 4 घंटे 31 मिनट रहेगा.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जलियांवाला बाग में आजादी के लिए प्राणों की आहुति देने वाले अमर बलिदानियों को किया नमन 

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भोपाल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा #जलियांवाला_बाग हत्याकांड स्मृति दिवस पर देश की आजादी के लिए प्राणों की आहुति देने वाले अमर बलिदानियों को शत्-शत् नमन। भारत का कण-कण अपने बहादुर लालों के बलिदान का युगों-युगों तक ऋणी रहेगा

नहीं रहीं मशहूर अभिनेत्री उत्तरा बावकर, 79 की उम्र में ली अंतिम सांस

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पुणे, मशहूर अभिनेत्री और थियेटर अभिनेत्री उत्तरा बावकर का निधन हो गया है। उन्होंने 79 की उम्र में लंबी बीमारी के बाद अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि पिछले 1 साल से बीमार चल रही थीं। वह पुणे के एक अस्पताल में भर्ती थीं। बुधवार सुबह उनका अंतिम संस्कार किया गया।

बावकर ने अपने फिल्मी करियर में तमस, सरदारी बेगम, कोरा कागज, एक दिन अचानक, डोर जैसी कई फिल्मों में काम किया था। वह गोविंद निहलानी की फिल्म तमस में अपनी भूमिका के बाद सुर्खियों में आई थीं। उन्होंने ‘मुख्यमंत्री’ में पद्मावती, ‘मेना गुर्जरी’ में मेना, शेक्सपियर के ‘ओथेलो’ में डेसडेमोना और नाटककार गिरीश कर्नाड के नाटक ‘तुगलक’ में मां की भूमिका अदा की थी।

मध्यप्रदेश में 22 हजार शिक्षकों की निुयक्ति मौन साधना का परिणाम : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

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भोपाल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए घोषणा की कि पूर्व सरकार ने शिक्षकों को पूर्ण वेतन देने के लिए कई साल प्रतीक्षा करने का आदेश निकाला था, जो गलत था। इसे बदल कर नए सिरे से लागू किया जाएगा। अब शिक्षकों को दूसरे वर्ष में ही वेतन की 100 प्रतिशत राशि प्राप्त होने लगेगी। प्रथम वर्ष 70 प्रतिशत राशि के बाद 100 प्रतिशत प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना होता था। अब यह प्रक्रिया एक वर्ष में पूर्ण हो जाएगी। इसके लिए शिक्षकों को 4 वर्ष की प्रतीक्षा नहीं करनी होगी। मुख्यमंत्री चौहान आज मुख्यमंत्री निवास में नव-नियुक्त शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

22 हजार शिक्षकों की निुयक्ति मौन साधना : प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम के लिए भेजे गए अपने वीडियो संदेश में कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय मूल्यों के संवर्धन पर जोर देती है। मध्यप्रदेश में व्यापक तौर पर शिक्षकों की भर्ती की गई है। इस साल 22 हजार शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इन सभी शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह महत्वपूर्ण बात है कि इन शिक्षकों में से लगभग आधे शिक्षक जनजातीय बहुल इलाकों के विद्यालयों में नियुक्त किए गए हैं। इनकी नियुक्ति से सर्वाधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को मिलेगा। हमारी भावी पीढ़ी को लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश सरकार ने इस वर्ष एक लाख से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती का लक्ष्य रखा है, जो प्रसन्नता का विषय है। इस साल के अंत तक 60 हजार शिक्षकों की नियुक्ति का लक्ष्य है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि मध्यप्रदेश शिक्षा सर्वे में देश में 17 वें स्थान से छलांग लगा कर 5 वें स्थान पर आ गया है। शिक्षा की गुणवत्ता की दृष्टि से मध्यप्रदेश की यह बड़ी उपलब्धि है। मध्यप्रदेश ने बिना शोर मचाए यह उपलब्धि हासिल की। इस तरह का कार्य करने के लिए समर्पण की आवश्यकता होती है। इसके बिना यह संभव नहीं होता। एक तरह से यह मौन साधना का भाव है। शिक्षा के प्रति भक्ति भाव से यह संभव होता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों, सभी शिक्षकों और मध्यप्रदेश सरकार को इस मौन साधना के लिए बहुत-बहुत बधाई दी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्ष के जीवन को देखिए तो आप पाएंगे कि जिन लोगों ने आपके जीवन में सबसे ज्यादा प्रभाव डाला, आपकी माता जी और आपके शिक्षक जरूर होंगे। इसी तरह आपको भी अपने विद्यार्थियों के दिल में जगह बनानी है। आपकी शिक्षा देश का वर्तमान ही नहीं भविष्य भी सँवारे। आपकी दी गई शिक्षा समाज में भी परिवर्तन लाये। प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश सरकार को बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति के कार्य के लिए पुन: बधाई देते हुए इस कार्य को अनूठी पहल बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा देने में शिक्षकों के अहम योगदान का उल्लेख करते हुए शिक्षकों से आह्वान किया कि वे भले शिक्षा दें पर अपने अंदर के विद्यार्थी को न मरने दें।

कई क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के अमृत काल में देश में बड़े लक्ष्यों और नए संकल्पों को सामने रख कर कार्य किया जा रहा है। आज हर क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर बनाए जा रहे हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में आज जिस तेज गति से अधो-संरचना निर्माण की रफ्तार है, उससे भी रोजगार की नई संभावनाएँ बन रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में अनेक स्थानों से वंदे भारत ट्रेन प्रारंभ की गई हैं। इनके प्रारंभ होने से कारोबारियों और आम लोगों को सुविधा हुई है। साथ ही पर्यटन विकास को बढ़ावा मिल रहा है। वन स्टेशन वन प्रोडक्ट और एक जिला-एक उत्पाद जैसी योजनाओं से भी स्थानीय उत्पाद दूर-दूर तक पहुँच रहे हैं। मुद्रा योजना से भी उन लोगों को बड़ी मदद मिली है जो आर्थिक रूप से बहुत कमजोर थे। सरकार ने नीतिगत स्तर पर जो परिवर्तन किए हैं उसने भारत के स्टार्टअप के क्षेत्र में भी रोजगार के अनेक अवसर बनाए हैं। रोजगार और स्व-रोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार का कौशल विकास पर भी विशेष जोर है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में युवाओं को ट्रेनिंग देने के लिए देश में कौशल विकास केंद्र खोले गए हैं। इस वर्ष के बजट में 30 स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर खोलने का निर्णय लिया गया है। इनमें युवाओं को न्यू एज टेक्नालॉजी द्वारा ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के जरिए छोटे कारीगरों को ट्रेनिंग देने के साथ एमएसएमई से भी जोड़ने की पहल की गई।

शिक्षकों पर भावी पीढ़ी के निर्माण का दायित्व : मुख्यमंत्री चौहान

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि आज का दिन अविस्मरणीय है। शिक्षक का सही नाम गुरू होता है। यहाँ मौजूद सभी शिक्षक गुरू हैं। गुरू वशिष्ठ और गुरू द्रोणाचार्य से लेकर अनेक ख्यातिनाम गुरू हुए। यदि कोई नौकरी के भाव से शिक्षक बनता है तो वह रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है जो आवश्यक भी है, लेकिन गुरू का कार्य प्रोफेशन से आगे मिशन भाव से कार्य करना है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विजनरी लीडर हैं। उनके दृढ़-संकल्प से एक सर्व सम्मत शिक्षा नीति-2020 भारत में आई है। इसके अंतर्गत ही शिक्षा व्यवस्थाएँ की जा रही हैं। मध्यप्रदेश का स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग नवीन शिक्षा नीति अच्छी तरह लागू करने के लिए बधाई का पात्र है। मध्यप्रदेश राष्ट्रीय सर्वे में 17वें नंबर से 5वें नंबर तक आया है। यह दोनों विभागों के परिश्रम का परिणाम है। शिक्षकों पर भावी पीढ़ी के निर्माण का दायित्व है। इस वर्ष 22 हजार से अधिक शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। इन सभी का स्वागत है और यह भी अपेक्षा है कि नव नियुक्त शिक्षक भावी पीढ़ी के निर्माण का दायित्व निभायें। शिक्षक होना सिर्फ एक नौकरी नहीं समाज को बनाने का भी कार्य है।

मुख्यमंत्री चौहान ने शिक्षकों से कहा कि यदि आपको बच्चों को सकारात्मक दिशा में बदलना है तो पहले स्वयं को बदलना होगा। मुख्यमंत्री ने एक मंदिर निर्माण में लगे तीन व्यक्तियों के अलग-अलग दृष्टिकोण का उदाहरण देते हुए कहा कि सबसे अच्छा दृष्टिकोण यह है कि यह सोच कर कार्य किया जाए कि इस कार्य का हमें शुभ अवसर या सुअवसर मिला है। मैं बेहतर से बेहतर योगदान दूँगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि बच्चे मिट्टी के लौंदे होते हैं, उन्हें शिक्षक जैसा चाहे बना सकते हैं। स्वयं के लिए गुरू बनने का संकल्प लेंगे तो बच्चों को बनाने, मध्यप्रदेश को बनाने और भारत को बनाने में सबसे बड़ा योगदान देंगे। आप नया मध्य प्रदेश और नया भारत गढ़ सकते हैं। आचरण से ही हम सिखा सकते हैं सिर्फ भाषण से नहीं। चरित्रवान बच्चों के निर्माण से भारत बन कर खड़ा हो जाएगा। मुख्यमंत्री चौहान ने स्वामी विवेकानंद के उस कथन का उल्लेख किया कि शिक्षा मनुष्य को मनुष्य बनाती है। शंकराचार्य जी ने भी शिक्षा को इस लोक और परलोक में भी सही दिशा देने में उपयोगी बताया था। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि शिक्षा के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं- विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल और नागरिकता के संस्कार देना।

ऐसे बच्चे तैयार करें जो जमाना बदल दें

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि वे स्वयं शिक्षक की भूमिका में रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर आज कल लाड़ली बहना योजना का पाठ पढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में दर्शन शास्त्र में एमए के बाद वे अल्प समय के लिए शिक्षण कार्य से भी जुड़े रहे। इसके पहले बाल्य काल में जैत ग्राम में उन्होंने रामायण की चौपाइयों की व्याख्या और अर्थ बताने का कार्य करते हुए एक वक्ता की पहचान बनाई थी। यह ग्राम के विद्यालय में गुरू से प्राप्त मार्गदर्शन का ही परिणाम था। मुख्यमंत्री चौहान ने मध्यप्रदेश गान का निर्माण करने का भी उल्लेख किया जो सभी नागरिकों के लिए प्रेरक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक का कार्यकाल औसत रूप से 30 साल माने तो हमें विचार करना चाहिए कि बेहतर गुरू बन कर ऐसे बच्चे तैयार करें जो जमाना बदल दें। शिक्षकों की भूमिका सार्थक होती है तो समाज भी शिक्षकों का आदर करता है और उनके चरण धोकर पीता है।

भैरूंदा के शिक्षकों के योगदान का उल्लेख, ग्राम के शिक्षक को भी याद किया

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि भैरूंदा (नसरुल्लागंज) के शिक्षकों ने अपनी स्वयं की राशि से कक्षाओं को स्मार्ट क्लास बनाकर बच्चों को सहयोग दिया। यह शिक्षकों के सामाजिक योगदान का अनूठा उदाहरण है। मुख्यमंत्री चौहान ने अपने प्रायमरी के शिक्षक रतन चंद जैन द्वारा दिए गए मार्गदर्शन का भी विशेष उल्लेख किया।

नव नियुक्त शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्यमंत्री चौहान और अन्य अतिथियों ने शुभारंभ किया। मध्यप्रदेश गान के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। मुख्यमंत्री चौहान ने विभिन्न जिलों में पदस्थ किए गए कुछ शिक्षकों को प्रतीक स्वरूप नियुक्ति बधाई पत्र सौंपे। इन शिक्षकों में सुशेफाली गुर्जर जिला सीहोर, शुभम गुप्ता जिला नर्मदापुरम, हुकुम चंद राठौर जिला राजगढ़, राजेश घोटे जिला बैतूल, सुममता गोयल जिला देवास और आनंद मीना जिला देवास शामिल हैं।

राज्यपाल मंगूभाई पटेल और स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) इंदर सिंह परमार वर्चुअल जुड़े। जनजातीय कार्य मंत्री सुमीना सिंह ने प्रारंभिक संबोधन दिया। कार्यक्रम में योग आयोग के अध्यक्ष वेद प्रकाश शर्मा, पाठ्य-पुस्तक निगम के अध्यक्ष शैलेंद्र बरूआ, महर्षि पतंजलि संस्थान के अध्यक्ष भरत दास बैरागी, योग संस्था की अध्यक्ष सुपुष्पांजलि शर्मा, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती रश्मि अरूण शमी, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य श्रीमती पल्लवी जैन गोविल, आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती अनुभा श्रीवास्तव और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

बेटे का ठिकाना नहीं, बेटी की गारंटी लेता हूँ: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

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भोपाल, प्रदेश के इतिहास में महिला सशक्तिकरण के लिए चल रही सामाजिक क्रांति में सरकार को लाड़ली बहनों द्वारा मिल रहे अपार जन-समर्थन से मैं अभिभूत हूँ। मुख्यमंत्री ने कहा सभी के सहयोग से हम एक नया आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश बनाएंगे, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गौरवशाली, वैभवशाली और सशक्त, आत्म-निर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप होगा। लाड़ली लक्ष्मी, मुख्यमंत्री कन्या विवाह, संबल योजनाओं के बाद अब लाड़ली बहना योजना इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

मुख्यमंत्री चौहान आज शाजापुर जिले के शुजालपुर में लाड़ली बहना महासम्मेलन में विशाल जन-समुदाय को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने 118 करोड़ 68 लाख रूपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन और विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण किया। मुख्यमंत्री ने प्रारंभ में कन्या-पूजन और कलश पूजन किया। शाजापुर जिला प्रशासन की “शाजापुर जनदर्शन” पुस्तिका का विमोचन भी किया। बहनों ने अपने लाड़ले भैया को राखी बांधी और तिलक किया। कार्यक्रम में लाड़ली बहना गान भी गाया गया।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मैं बचपन से बेटे-बेटी में भेदभाव देखता आया हूँ, जिस बेटे को माँ-बाप बुढ़ापे की लाठी समझते हैं, उसका तो ठिकाना नहीं, परंतु मैं बेटी की गारंटी लेता हूँ कि उसकी जब तक साँस चलती है वह अपने माँ-बाप को नहीं भूलती। जब मैं राजनीति में आया तभी मैंने प्रण लिया कि बेटी को मैं वरदान बनाऊँगा और आज तक उनके लिए निरंतर कार्य कर रहा हूँ।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में बहनों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य हो रहे हैं। मध्यप्रदेश में बेटियों की स्थिति अच्छी नहीं थी, 1000 बेटों पर केवल 900 बेटी पैदा होती थी। जब मैं वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री बना, तब मैंने लाड़ली लक्ष्मी योजना बनाई। योजना में गरीब परिवार को दो बेटियों तक 30 रूपये हजार का बचत-पत्र सरकार देती है। इसके अलावा उन्हें समय-समय पर पढ़ाई के लिए राशि और 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर एकमुश्त एक लाख रूपये मिलते हैं। बेटियों को कॉलेज में प्रवेश लेते समय 12 हजार 500 और डिग्री प्राप्त करने पर 12 हजार 500 रूपये दिए जाते हैं। उनकी उच्च शिक्षा की फीस भी सरकार भरती है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मैंने संकल्प लिया कि हर गरीब बिटिया की शादी सरकार करवाएगी और इसके लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह-निकाह योजना बनाई गई। संबल योजना में भी बहनों को प्रसूति के पहले 4 हजार और उसके बाद 12 हजार रूपये की राशि प्रदान किये जाते हैं। बहनों को राजनीतिक रूप से सशक्त करने के लिए पंचायत और नगरीय निकायों में उन्हें 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। पुलिस की भर्ती में बहनों को 30 प्रतिशत और शिक्षकों की भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। रजिस्ट्री के स्टांप शुल्क में भी बहनों को मात्र 1 प्रतिशत राशि देनी होती है।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि बहनों को सशक्त और आत्म-निर्भर बनाने में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मील का पत्थर साबित होगी। योजना में बहनों को उनके खातों में 10 जून से 1000 की राशि दी जाएगी। ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक आमदनी ढाई लाख रूपए से कम हो, 5 एकड़ से अधिक जमीन न हो, 4 पहिया वाहन न हो की 23 से 60 वर्ष तक की बहनों को योजना का लाभ मिलेगा। योजना के फॉर्म 30 अप्रैल तक भरे जा रहे हैं। इसके बाद भी यदि कोई नाम छूट जाता है तो उसे भी लाभ दिया जाएगा। इसके लिए हर बहन का बैंक में खाता होना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री चौहान ने कलेक्टर को निर्देश दिए कि हर बहन का नि:शुल्क केवाईसी करवाया जाए और और जिन बहनों का बैंक खाता न हो तुरंत खुलवाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति योजना का लाभ देने के लिए एक पैसा भी मांगता है तो उसे हथकड़ी लगा कर जेल भेजा जाएगा।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि सरकार बहन-बेटियों के सम्मान के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। प्रदेश में बहनों के प्रति दुराचार करने वालों को फाँसी की सजा का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में 1 अप्रैल से सभी शराब के अहाते बंद कर दिए गए हैं। खुले में शराब पीना प्रतिबंधित है। इससे शराब की बिक्री में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है। प्रदेश में नशाबंदी के लिए नैतिक आंदोलन चलाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के इस अभियान में हर बहन अपने भैया का साथ दे। मैं प्रदेश की सभी बहनों का सगा भाई हूँ। मैं आपकी जिंदगी खुशियों से भरना चाहता हूँ। मेरा यह प्रयास है कि मेरी किसी भी बहन-बेटी की आँखों में आँसू न आए। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि हर गाँव में लाड़ली बहना सेना बनाई जाए, जो लाड़ली बहना योजना के क्रियान्वयन को तो देखे ही, साथ ही समाज-सुधार के कार्य भी करे।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि देश की धरती पर कोई भी बच्चा अनाथ नहीं है। ऐसे सभी बच्चे जिनके माँ-बाप नहीं है वह राज्य के बच्चे हैं। उनके रहने, खाने-पीने, पढ़ाई आदि की पूरी व्यवस्था सरकार द्वारा की जा रही है।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि शाजापुर जिले के कुछ गाँवों में अभी नर्मदा का पानी नहीं पहुँच पा रहा है। इसके लिए फिर से योजना बना कर प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने शाजापुर के राजराजेश्वरी मंदिर को दिव्य एवं भव्य बनाने के लिए 4 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की घोषणा की। उन्होंने शुजालपुर मंडी वैकल्पिक मार्ग, नगर में रेलवे ओवर ब्रिज निर्माण और अंवतीपुर बड़ोदिया को नगर परिषद बनाने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि जटाशंकर महादेव मंदिर का विकास 2 करोड़ रूपए की राशि से किया जाएगा। महाकाल मंदिर सुंदरसी के लिए भी राशि स्वीकृत की जाएगी।

स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) इंदर सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि नेशनल अचीवमेंट सर्वे में मध्यप्रदेश देश में 17वें स्थान से छंलाग लगा कर 5वें स्थान पर आ गया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। प्रदेश में उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए सीएम राइज स्कूल खोले जा रहे हैं। सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी ने भी संबोधन दिया। कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री बृजेंद्र सिंह यादव, मध्यप्रदेश मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष माखन सिंह, जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लाड़ली बहनें और जन-सामान्य उपस्थित था।

नरसिंहपुर जिले में जंगली भैंसा ने करपगांव मड़ेसुर में दो ग्रामीणों को घायल कर दिया

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नरसिंहपुर। जिले के ग्राम करपगांव में एक महिला को घायल करने के बाद जंगली भैंसा ने मड़ेसुर में दो ग्रामीणों को घायल कर दिया । भैंसे ने एक बकरी को मार डाला। भैंसा की दहशत से गांव में हड़कंप की स्थिति है । वन विभाग की टीम गांव में तैनात है। भैंसा को पकड़ने के लिए कान्हा से विशेषज्ञों की टीम बुलवाई जा रही है । विभाग को आशंका है कि यह भैंसा या तो सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र से या फिर छिंदवाड़ा के जंगल से आया है ।

बताया जाता है कि जंगल से भटकते हुए जंगली भैंसा पहले करपगांव क्षेत्र में आया जहां पर एक महिला सुरलाबाई को उसने घायल कर द‍िया । इसका जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है । बुधवार की सुबह गांव के खेतोंं की तरफ ग्रामीणों ने जंगली भैंसा को देखा था । जब खेतों में कार्य करने वाले ग्रामीणों को जंगली भैंसा मारने दौड़ा तो वे जान बचाने के लिए भागे। बताया जाता है कि जंगली भैंसा के हमले से मड़ेसुर निवासी शिवप्रसाद वंशकार घायल हुआ और उसकी बकरी की मौत हो गई। शरद पिता सोहन ठाकुर भी घायल हो गया। दोनों को 108 एंबुलेंस से करेली स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है।
करेली वन परिक्षेत्र अधिकारी दिनेश मालवीय ने बताया कि हमारे वन परिक्षेत्र में जंगली भैंसा नहीं है। मड़ेसुर गांव से वन क्षेत्र की दूरी भी करीब 20 किमी है । जिले के वन परिक्षेत्र से ही नर्मदापुरम और छिंदवाड़ा जिले का वनक्षेत्र लगा है। आशंका है कि उक्त जंगली भैंसा भटकते हुए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व अथवा छिंदवाड़ा जिले के जंगल से यहां पहुंच गया होगा। मड़ेसुर गांव की दूरी भी वन परिक्षेत्र से अधिक है ।

टीम कर रही गांव में निगरानी

वन विभाग की टीमों द्वारा गांव में निगरानी करते हुए जंगली भैंसा पर नजर रखी जा रही है । जिला वन मंडल अधिकारी ने बताया कि कान्हा टाइगर रिजर्व से विशेषज्ञ चिकित्सक, सहायक व स्क्वायड हेड रेंजर की टीम आ रही हैं। गांव में वन विभाग औैर पुलिस की टीम भी लगी हुई है

महिंद्रा एंड महिंद्रा के पूर्व अध्यक्ष केशव महिंद्रा का निधन

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मुंबई, देश के सबसे उम्रदराज अरबपति एवं महिंद्रा एंड महिंद्रा के अध्यक्ष केशव महिंद्रा का बुधवार को निधन हो गया। वह 99 वर्ष के थे। महिंद्रा की कुल सम्पति 1.2 अरब डॉलर आंकी गई है। उनके अध्यक्ष के रूप में 48 वर्षों के कार्यकाल के दौरान, महिंद्रा समूह का विस्तार ऑटोमोबाइल निर्माताओं से सूचना प्रौद्योगकी (आईटी), रियल एस्टेट और वित्तीय सेवाओं जैसे अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में हुआ। वह अमेरिका की पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी से स्नातक थे। वह वर्ष 1947 में कंपनी से जुड़ने के बाद वर्ष 1963 में इसके अध्यक्ष बने।उन्होंने विलीज़ कॉर्पोरेशन, मित्सुबिशी, इंटरनेशनल हार्वेस्टर, यूनाइटेड टेक्नोलॉजीज, ब्रिटिश टेलीकॉम आदि प्रमुख कंपनियों के साथ वाणिज्यिक अनुबंध हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, 2004 से 2010 तक महिंद्रा को केंद्रीय उद्योग सलाहकार परिषद सहित कई कमेटियों में नियुक्त किया गया था। वह प्रधानमंत्री की व्यापार और उद्योग परिषद, नयी दिल्ली के सदस्य थे।उन्होंने स्टील ऑथिरिटी आफ इंडिया लिमिटेड (सेल) , टाटा स्टील , टाटा केमिकल्स , इंडियन होटल्स , आईएफसी और आईसीआईसीआई सहित विभिन्न कंपनियों के बोर्ड और परिषदों में भी काम किया है।हाल ही में फोर्ब्स मैगजीन ने महिंद्रा को 2023 की लिस्ट में शामिल किया था। फोर्ब्स ने कहा कि वह सबसे उम्रदराज भारतीय अरबपति हैं।

बठिंडा मिलिट्री स्टेशन में फायरिंग, चार जवान शहीद

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बठिंडा, पंजाब में बठिंडा मिलिट्री स्टेशन के अंदर बुधवार तड़के फायरिंग की घटना हुई, जिसमें सेना के चार जवान शहीद हो गये।सेना के प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मिलिट्री स्टेशन के अंदर तड़के लगभग 04:35 बजे फायरिंग हुई जिसमें चार जवान शहीद हो गयेे। उन्होंने बताया कि सेना की त्वरित कार्रवाई टीम ने सारे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है। किसी भी व्यक्ति को क्षेत्र के अंदर या बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है।यह घटना एक तोपखाना इकाई में हुई, जहां सेना के चार जवानों ने गोली लगने से दम तोड़ दिया। अन्य कर्मियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और संपत्ति की क्षति की भी सूचना नहीं मिली है।सहायक पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) एसपीएस परमार ने बताया कि यह आंतकवादी घटना नहीं है। उन्होंने बताया कि सेना की तरफ से आधिकारिक जानकारी मिलने पर ही पक्के तौर पर कुछ कहा जा सकेगा। इलाके को सील कर दिया गया है और मामले के तथ्यों को स्थापित करने के लिए सेना पंजाब पुलिस के साथ संयुक्त जांच कर रही है। दो दिन पहले एक इंसास राइफल और 28 कारतूसों के गायब होने के मामले को भी ध्यान में रखते हुए घटना की सभी कोणों से जांच की जा रही है।सेना के एक अधिकारी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मीडिया से अफवाहों से बचने और अटकलों से दूर रहने का अनुरोध किया है।

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