भोपाल विकास योजना 2047: 45 लाख आबादी के लिए तैयार होगा नया मास्टर प्लान, 27% क्षेत्र ग्रीन जोन में

भोपाल। राजधानी भोपाल के सुनियोजित और संतुलित विकास के लिए भोपाल विकास योजना 2047 (प्रारूप) तैयार की गई है। योजना में करीब 1,016.90 वर्ग किलोमीटर के निवेश क्षेत्र को शामिल किया गया है, जिसमें 254 गांव सम्मिलित हैं। यह योजना लगभग 45 लाख की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। प्रस्तावित योजना में कुल 61,017.02 हेक्टेयर क्षेत्र को विकास योग्य क्षेत्र के रूप में निर्धारित किया गया है।

प्राकृतिक पर्यावरण और बड़े तालाब के संरक्षण पर जोर

भोपाल विकास योजना 2047 में शहर की प्राकृतिक संवेदनशीलता को प्रमुख आधार बनाया गया है। योजना में भोजताल (बड़ी झील) और उसके जलग्रहण क्षेत्र, पहाड़ियों, वन क्षेत्रों, तालाबों और जलाशयों तथा बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण के प्रावधान किए गए हैं।

योजना को चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित किया गया है—प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण, आधुनिक एवं नागरिक हितैषी नियोजन, सुधारोन्मुख एवं परिवर्तनकारी नियोजन तथा आत्मनिर्भर और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला विकास।

51 किलोमीटर का ग्रोथ कॉरिडोर

भोपाल में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए करीब 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है। यह कॉरिडोर Education Knowledge Artificial Intelligence (EKAI) City, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक भंडारण एवं थोक परिसर सहित विभिन्न उपनगरों को जोड़ने का प्रस्ताव रखता है।

ग्रोथ कॉरिडोर में मिश्रित भू-उपयोग के साथ उच्च घनत्व वाले विकास की परिकल्पना की गई है। इसमें होटल एवं हॉस्पिटैलिटी, स्वास्थ्य सेवाएं, व्यापार, IT सेक्टर, AI एवं डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, थोक व्यापार, हाइपर मार्केट, मॉल-मल्टीप्लेक्स, कॉरपोरेट ऑफिस और आवास जैसी गतिविधियों को विकसित किया जा सकेगा।

इस कॉरिडोर में BRTS कॉरिडोर का भी प्रस्ताव है, जिसे भविष्य में MRTS में अपग्रेड किया जा सकेगा। विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम और इंदौर मार्ग को भी ग्रोथ कॉरिडोर के माध्यम से जोड़ने का प्रस्ताव है।

बायपास के दोनों ओर 50-50 मीटर हरित क्षेत्र

निवेश क्षेत्र की बाहरी सीमा पर प्रस्तावित नए बायपास मार्ग को ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके दोनों ओर 50-50 मीटर भूमि हरित क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित की गई है।

ग्रीन एरिया बढ़ाकर 27 प्रतिशत

भोपाल विकास योजना 2005 में जहां हरित क्षेत्र लगभग 16 प्रतिशत निर्धारित था, वहीं भोपाल विकास योजना 2047 के प्रारूप में इसे बढ़ाकर लगभग 27 प्रतिशत किया गया है। योजना के अनुसार यह URDPFI गाइडलाइन के मानकों से अधिक है। भानपुर खंती के पुनर्विकास के लिए यहां गोल्फ कोर्स का प्रस्ताव भी रखा गया है।

इसके अलावा कॉलोनी स्तर पर खुले क्षेत्र को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।

आवासीय विकास के साथ अफोर्डेबल और रेंटल हाउसिंग पर जोर

योजना में अधिक से अधिक अफोर्डेबल हाउसिंग विकसित करने के लिए ऐसी परियोजनाओं को FAR क्रय करने की बाध्यता से मुक्त रखने का प्रस्ताव है। प्रवासी नागरिकों के लिए रेंटल हाउसिंग विकसित करने को भी प्रोत्साहन देने का प्रावधान रखा गया है।

विकसित क्षेत्रों में भूमि के बेहतर उपयोग के लिए प्लॉटों के समेकन और पुनर्विकास को प्रोत्साहित करने वाले प्रावधान भी प्रस्तावित हैं। 70 प्रतिशत निवासियों की सहमति होने पर RWA को आवासीय अपार्टमेंट के पुनर्विकास की अनुमति दिए जाने का प्रावधान रखा गया है।

डिजिटल ट्विन सिटी और स्मार्ट सुरक्षा व्यवस्था

भोपाल विकास योजना 2047 में योजना के क्रियान्वयन की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए डिजिटल ट्विन सिटी की व्यवस्था का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य अनधिकृत निर्माण, मोबिलिटी और योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं का समय पर समाधान करना है।

शहर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर निजी CCTV कैमरों की नेटवर्किंग, सार्वजनिक भवनों की बाउंड्री वॉल को पारदर्शी रखने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था से जुड़े प्रावधान भी प्रस्तावित हैं।

EKAI City से शिक्षा और AI आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ाव

योजना में Education Knowledge Artificial Intelligence (EKAI) City की परिकल्पना की गई है। भोजरी स्थित एजुकेशन हब के उन्नयन के साथ इसे शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और AI आधारित ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है।

61 हजार हेक्टेयर से ज्यादा भूमि का प्रस्तावित उपयोग

योजना के अनुसार कुल 61,017.02 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रमुख भूमि उपयोग इस प्रकार प्रस्तावित है—आवासीय क्षेत्र 26,755.50 हेक्टेयर (43.85%), मिश्रित उपयोग 2,448.84 हेक्टेयर (4.01%), वाणिज्यिक 1,348.97 हेक्टेयर (2.21%), औद्योगिक 2,137.25 हेक्टेयर (3.50%), लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग 771.44 हेक्टेयर (1.26%), सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक 4,887.97 हेक्टेयर (8.01%), परिवहन 5,793.82 हेक्टेयर (9.53%) और ग्रीन क्षेत्र 16,489.94 हेक्टेयर (27.01%) प्रस्तावित है।

भोपाल विकास योजना 2047 का प्रारूप इस तरह राजधानी के भविष्य के विस्तार, पर्यावरण संरक्षण, आवास, परिवहन, रोजगार, AI आधारित अर्थव्यवस्था और नागरिक सुविधाओं को एक साथ ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

भोपाल मास्टर प्लान 2047: 21 साल बाद ड्राफ्ट तैयार, 1017 वर्ग किमी और 254 गांवों की योजना

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भोपाल। राजधानी भोपाल के नए मास्टर प्लान को लेकर 21 साल से चला आ रहा इंतजार अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। 26 सितंबर 2026 तक उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार भोपाल मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट तैयार है और इसे सार्वजनिक करने की प्रक्रिया चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक ड्राफ्ट को गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से सार्वजनिक किए जाने की तैयारी है। इसके बाद नागरिकों और संबंधित पक्षों से दावे-आपत्तियां तथा सुझाव लिए जाएंगे।

हालांकि, इसे अंतिम मास्टर प्लान नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी है, लेकिन अंतिम मास्टर प्लान के प्रकाशन से पहले न्यायालय को इसकी जानकारी देना और आगे की अनुमति लेना जरूरी रहेगा।

भोपाल Master Plan 2047 में क्या प्रस्तावित है?

पहले सामने आए ड्राफ्ट से जुड़ी जानकारी के अनुसार प्रस्तावित Bhopal Master Plan 2047 में लगभग 1,017 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 254 गांवों को शामिल करने की योजना है। इसका उद्देश्य भोपाल के भविष्य के आवासीय विस्तार, परिवहन, सड़क नेटवर्क, व्यावसायिक गतिविधियों, उद्योग, बुनियादी सुविधाओं और पर्यावरणीय जरूरतों के अनुरूप विकास की रूपरेखा तैयार करना है।

यानी प्रस्तावित प्लान केवल मौजूदा शहर के लिए नहीं, बल्कि भोपाल के आसपास के नियोजन क्षेत्र के भविष्य के विस्तार को भी ध्यान में रखता है।

2005 के बाद क्यों महत्वपूर्ण है नया मास्टर प्लान?

भोपाल में मौजूदा विकास व्यवस्था लंबे समय से पुराने मास्टर प्लान पर आधारित रही है। सुप्रीम कोर्ट में 22 सितंबर 2026 की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि भोपाल का मास्टर प्लान 1995 के बाद संशोधित नहीं हुआ, जबकि समाचार रिपोर्टों में 2005 के प्लान को मौजूदा आधार के रूप में बताया गया है। इसलिए खबर में “2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ” कहना अधिक सुरक्षित और तथ्यात्मक है।

नए प्लान की प्रक्रिया पहले भी आगे बढ़ी थी। वर्ष 2021 में Master Plan-2031 का ड्राफ्ट तैयार किया गया था, लेकिन वह अंतिम रूप से लागू नहीं हो सका। बाद में 2047 को लक्ष्य बनाकर नई योजना तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

1017 वर्ग किमी और 254 गांव क्यों महत्वपूर्ण हैं?

यदि प्रस्तावित आंकड़े अंतिम ड्राफ्ट में भी कायम रहते हैं, तो करीब 1,017 वर्ग किमी नियोजन क्षेत्र और 254 गांवों के कारण मास्टर प्लान का प्रभाव वर्तमान नगर सीमा से काफी व्यापक होगा।

इससे मुख्य रूप से इन विषयों पर असर पड़ेगा:

  • भूमि उपयोग यानी Land Use Planning

  • नए आवासीय क्षेत्र

  • व्यावसायिक क्षेत्र

  • मिश्रित भूमि उपयोग

  • सड़क और परिवहन नेटवर्क

  • औद्योगिक क्षेत्र

  • सार्वजनिक एवं संस्थागत सुविधाएं

  • हरित एवं पर्यावरणीय क्षेत्र

  • भविष्य की आबादी के लिए आधारभूत ढांचा

इन प्रावधानों की अंतिम स्थिति आधिकारिक ड्राफ्ट के प्रकाशित होने के बाद ही निश्चित मानी जानी चाहिए।

Residential और Commercial Land Use पर सबसे ज्यादा नजर

भोपाल मास्टर प्लान का मौजूदा विवाद रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर की सुनवाई में स्पष्ट किया कि किसी संपत्ति या निर्माण की वैधता की जांच मौजूदा मास्टर प्लान और लागू Building By-laws के आधार पर की जाएगी। नया ड्राफ्ट आने से वर्तमान भूमि उपयोग अपने आप नहीं बदल जाएगा।

इसका मतलब यह है कि नया ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद भी वर्तमान नियमों के तहत किसी संपत्ति की वैधता स्वतः बदल नहीं जाएगी।

18 मीटर सड़क और Mixed Land Use पर क्या स्थिति है?

मास्टर प्लान-2047 से जुड़ी पहले की रिपोर्टों में 18 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर प्रस्तावित नियमों का उल्लेख किया गया था। वहीं 26 सितंबर की ताजा रिपोर्ट में 12 से 24 मीटर तथा 24 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों के संदर्भ में अलग-अलग Mixed Land Use और Commercial Activity प्रावधान बताए गए हैं।

लेकिन यहां महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है:

जब तक आधिकारिक Gazette/अधिसूचना का मूल ड्राफ्ट उपलब्ध नहीं होता, इन सड़क-चौड़ाई आधारित प्रावधानों को अंतिम नियम नहीं माना जाना चाहिए।

यही बात 15 मंजिल या मेट्रो कॉरिडोर के आसपास निर्माण जैसे प्रस्तावित प्रावधानों पर भी लागू होती है।

सुप्रीम कोर्ट का ताजा निर्देश क्या है?

22 सितंबर 2026 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी। लेकिन अंतिम मास्टर प्लान प्रकाशित करने से पहले न्यायालय की अनुमति आवश्यक रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 के लिए निर्धारित बताई गई है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में किसी संपत्ति या निर्माण की वैधता का परीक्षण मौजूदा मास्टर प्लान और लागू भवन उपविधियों के अनुसार होगा।

8,084 प्रतिष्ठानों को नोटिस का मामला क्या है?

भोपाल में रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर कार्रवाई भी इसी विवाद का हिस्सा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार नगर निगम की सूची में 62,500 प्रतिष्ठान दर्ज थे, जिनमें से 8,084 को नोटिस दिए गए और करीब 190 प्रतिष्ठानों को बंद/सील करने की कार्रवाई की गई।

इसलिए नया Master Plan-2047 व्यापारियों, मकान मालिकों, कॉलोनियों और जमीन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन वर्तमान नियमों के तहत चल रही कार्रवाई केवल ड्राफ्ट प्रकाशित होने से समाप्त नहीं होगी।

अब आगे क्या होगा?

ड्राफ्ट के सार्वजनिक होने के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण दावे और आपत्तियां होगा। नागरिक, जमीन मालिक, कारोबारी, कॉलोनी प्रतिनिधि और अन्य संबंधित पक्ष प्रस्तावित भूमि उपयोग तथा विकास व्यवस्था का अध्ययन करके निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी आपत्तियां और सुझाव दे सकेंगे।

इसके बाद प्रस्तावों और प्राप्त आपत्तियों पर नियमानुसार प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अंतिम Master Plan के प्रकाशन के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति की शर्त भी महत्वपूर्ण रहेगी।

भोपाल Master Plan 2047: एक नजर में

विषय

उपलब्ध जानकारी

प्लान

Bhopal Master Plan 2047

वर्तमान स्थिति

ड्राफ्ट तैयार/प्रकाशन प्रक्रिया

प्रस्तावित नियोजन क्षेत्र

करीब 1,017 वर्ग किमी

प्रस्तावित गांव

करीब 254

वर्तमान आधार

पुराने मास्टर प्लान की व्यवस्था

मुख्य लक्ष्य

Vision 2047

प्रमुख विषय

Land Use, Housing, Transport, Infrastructure

विवाद का प्रमुख मुद्दा

Residential में Commercial Activity

सुप्रीम कोर्ट

ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति

अंतिम प्लान

कोर्ट की अनुमति के बाद

अगली सुनवाई

23 नवंबर 2026

AEO: भोपाल Master Plan 2047 से जुड़े सवाल

भोपाल का नया मास्टर प्लान कब जारी होगा?

26 सितंबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार ड्राफ्ट तैयार है और इसे सार्वजनिक करने की प्रक्रिया चल रही है। गजट प्रकाशन की आधिकारिक प्रति उपलब्ध होने के बाद तारीख की पुष्टि की जानी चाहिए।

भोपाल Master Plan 2047 में कितने गांव शामिल हैं?

उपलब्ध ड्राफ्ट संबंधी रिपोर्टों के अनुसार करीब 254 गांव प्रस्तावित नियोजन क्षेत्र में शामिल हैं।

Master Plan 2047 में भोपाल का क्षेत्र कितना होगा?

प्रस्तावित योजना से जुड़ी रिपोर्टों में करीब 1,017 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का उल्लेख है। अंतिम आधिकारिक आंकड़ा Gazette/अंतिम अधिसूचना से सत्यापित किया जाना चाहिए।

क्या नया मास्टर प्लान आने से पुराने Land Use बदल जाएंगे?

नहीं। सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर के आदेश के अनुसार फिलहाल किसी संपत्ति या निर्माण की वैधता मौजूदा मास्टर प्लान और लागू भवन उपविधियों के आधार पर जांची जाएगी।

क्या रिहायशी क्षेत्र में दुकान चलाने की अनुमति मिल जाएगी?

सिर्फ नया ड्राफ्ट आने से वर्तमान रिहायशी भूमि का उपयोग स्वतः Commercial नहीं हो जाता। अंतिम नियम आधिकारिक मास्टर प्लान और लागू भूमि उपयोग प्रावधानों से तय होंगे।

क्या 18 मीटर सड़क पर ही कारोबार की अनुमति होगी?

18 मीटर सहित सड़क चौड़ाई से जुड़े विभिन्न प्रस्ताव मीडिया रिपोर्टों में सामने आए हैं, लेकिन आधिकारिक Gazette के मूल प्रावधान के बिना इसे अंतिम नियम कहना उचित नहीं होगा।

भोपाल Master Plan 2047 अब ड्राफ्ट स्तर से सार्वजनिक प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है। 1,017 वर्ग किलोमीटर और 254 गांवों से जुड़े प्रस्तावित आंकड़े, Vision-2047, Land Use, Transport और Residential-Commercial गतिविधियों के नियम इस योजना के प्रमुख हिस्से हैं। लेकिन ड्राफ्ट और अंतिम मास्टर प्लान में अंतर हो सकता है, इसलिए अंतिम प्रावधानों के लिए मध्यप्रदेश सरकार की आधिकारिक Gazette अधिसूचना को ही आधार माना जाना चाहिए।

Crime News Kolar : भोपाल में एसीपी के घर चोरी का खुलासा, 71 लाख का माल बरामद

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कोलार रोड थाना क्षेत्र में एसीपी के घर हुई चोरी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कोलार रोड थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने चार आरोपियों से अब तक करीब 71 लाख रुपये का मशरूका बरामद किया है।

पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से करीब 400 ग्राम सोने के जेवरात, 500 ग्राम चांदी के जेवरात, 1 लाख 76 हजार रुपये नकद, स्विफ्ट कार, आईफोन और अन्य कीमती मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

आरोपियों ने पूछताछ के दौरान पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। कभी इंदौर सराफा बाजार में चोरी का माल बेचने की बात कही गई तो कभी माल को दूसरे स्थानों पर छिपाने की जानकारी दी गई। पुलिस द्वारा तस्दीक करने पर कई जानकारियां गलत पाई गईं। इसके बाद दोबारा पूछताछ में आरोपियों की निशानदेही पर राजस्थान और उज्जैन से चोरी का माल बरामद किया गया।

इंदौर सराफा बाजार की कहानी निकली झूठी

पुलिस के मुताबिक आरोपी देवेन्द्र गुर्जर उर्फ देवा ने पहले इंदौर सराफा बाजार में चोरी का माल बेचने की बात बताई थी। पुलिस ने जब इस जानकारी की तस्दीक की तो कहानी गलत निकली।

इसके बाद दोबारा पूछताछ में आरोपी की निशानदेही पर उसके गांव नेगड़िया का खेड़ा, थाना गंगापुर, जिला भीलवाड़ा, राजस्थान से करीब 20 तोला सोने और 150 ग्राम चांदी के जेवरात बरामद किए गए।

रोहित पाल ने भी पुलिस को किया गुमराह

आरोपी रोहित पाल ने भी इंदौर सराफा बाजार में व्यापारी को चोरी का माल बेचने की कहानी बताई थी। पुलिस के अनुसार तस्दीक में यह जानकारी भी गलत पाई गई।

दोबारा पूछताछ के बाद आरोपी की निशानदेही पर मक्सी रोड, उज्जैन बस स्टैंड के पीछे से करीब 10 तोला सोने और 150 ग्राम चांदी के जेवरात बरामद किए गए।

अब तक 71 लाख का माल बरामद

इस मामले में पुलिस पहले ही चार आरोपियों से करीब 25 लाख रुपये का मशरूका बरामद कर चुकी थी। इसके बाद पुलिस रिमांड लेकर की गई पूछताछ में करीब 46 लाख रुपये का अतिरिक्त माल बरामद किया गया।

इस तरह पुलिस के अनुसार अब तक कुल करीब 71 लाख रुपये का मशरूका बरामद हो चुका है।

बरामदगी में करीब 400 ग्राम सोने के जेवरात, 500 ग्राम चांदी के जेवरात, 1 लाख 76 हजार रुपये नकद, स्विफ्ट कार, आईफोन और अन्य कीमती मोबाइल फोन शामिल हैं।

चार आरोपी गिरफ्तार

मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोहित पाल, पवन आर्य, दीपक गुर्जर और देवेन्द्र गुर्जर उर्फ देवा के रूप में हुई है।

पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार चारों आरोपियों के खिलाफ पहले से भी कई अपराध दर्ज हैं।

11 सितंबर को दर्ज हुआ था चोरी का मामला

कोलार रोड थाना पुलिस के अनुसार 11 सितंबर 2026 को फरियादी विजय कुमार दुबे की रिपोर्ट पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 561/26 दर्ज किया गया था। मामले में बीएनएस की धारा 305A और 331(4) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।

घटना की गंभीरता को देखते हुए कोलार रोड थाना और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीमें गठित की गई थीं। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद राजस्थान, उज्जैन और इंदौर तक जांच आगे बढ़ाई।

पुलिस के अनुसार आरोपियों का दोबारा पुलिस रिमांड लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है।

मध्यप्रदेश पत्रकार बीमा योजना 2026: आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी, अब 30 सितंबर तक करें आवेदन

भोपाल। मध्यप्रदेश के पत्रकारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना 2026 में ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है। पहले आवेदन की आखिरी तारीख 25 सितंबर 2026 निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दिया गया है।

पत्रकार अब 30 सितंबर तक कर सकेंगे आवेदन

पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना के तहत पात्र पत्रकार अब 30 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की समय-सीमा बढ़ाए जाने से उन पत्रकारों को अतिरिक्त समय मिलेगा, जो निर्धारित अवधि में आवेदन नहीं कर पाए थे।

मध्यप्रदेश में लागू इस योजना में पत्रकारों के साथ निर्धारित पात्रता के अनुसार फोटो पत्रकार और कैमरामैन भी शामिल हो सकते हैं। पंजीकृत वेब मीडिया तथा अन्य पात्र मीडिया संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों के लिए भी योजना में प्रावधान हैं।

स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा का मिलेगा विकल्प

योजना के तहत पात्र पत्रकारों के लिए ₹2 लाख या ₹4 लाख का स्वास्थ्य बीमा तथा ₹5 लाख या ₹10 लाख का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा उपलब्ध है। योजना में पात्रता और अन्य शर्तें निर्धारित नियमों के अनुसार लागू होंगी।

मध्यप्रदेश पत्रकार बीमा योजना 2026 की प्रमुख जानकारी

  • योजना: पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना 2026

  • नई अंतिम तिथि: 30 सितंबर 2026

  • स्वास्थ्य बीमा: ₹2 लाख / ₹4 लाख

  • व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा: ₹5 लाख / ₹10 लाख

  • पात्रता: निर्धारित नियमों के अनुसार पत्रकार, फोटो पत्रकार, कैमरामैन आदि

  • आवेदन: ऑनलाइन

  • विस्तृत जानकारी: मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध

पहले जारी जानकारी के मुताबिक अधिमान्य पत्रकारों की नई बीमा पॉलिसी 4 अक्टूबर 2026 से और गैर-अधिमान्य पत्रकारों की नई पॉलिसी 1 नवंबर 2026 से शुरू होने की जानकारी दी गई थी।

पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण सूचना

आवेदन की अंतिम तारीख अब 30 सितंबर 2026 है। पत्रकारों को सलाह है कि वे आवेदन की पात्रता, प्रीमियम, आवश्यक दस्तावेज और अन्य नियमों की जानकारी संबंधित विभागीय निर्देशों के अनुसार जांचकर समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन पूरा करें।

मध्यप्रदेश पत्रकार बीमा योजना 2026 से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए जनसंपर्क विभाग, मध्यप्रदेश की वेबसाइट पर उपलब्ध निर्देशों को अंतिम माना जाना चाहिए।

कांकेर में दूध नदी पर बनेगा हाई लेवल पुल, 16.15 करोड़ रुपये मंजूर

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में दूध नदी पर उच्चस्तरीय पुल और पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए राज्य शासन ने 16 करोड़ 14 लाख 71 हजार रुपये की राशि मंजूर की है। यह पुल कोदाभाठ-माटवाड़ा मोदी मार्ग पर बनाया जाएगा।

राज्य सरकार की मंजूरी के बाद लोक निर्माण विभाग ने निर्माण एजेंसी को निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने अनावश्यक समय-वृद्धि से बचने और निर्माण कार्य में गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है।

उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और पूरे कार्य की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस परियोजना से क्षेत्र में आवागमन और सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है, खासकर ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों के लोगों को आने-जाने में सुविधा मिल सकती है।

‘वेलकम’ फेम अभिनेता मुश्ताक खान का निधन, 75 साल की उम्र में ली आखिरी सांस

हिंदी सिनेमा के चर्चित अभिनेता मुश्ताक खान का 24 सितंबर 2026 को मुंबई के नानावटी अस्पताल में निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे और कैंसर से जूझ रहे थे। उनके निधन की जानकारी उनके बेटे मोहसिन ने दी। करीब दो सप्ताह पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

मुश्ताक खान ने अपने लंबे फिल्मी करियर में ‘वेलकम’, ‘गदर’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘आशिकी’ और ‘हेरा फेरी’ सहित 500 से अधिक फिल्मों में काम किया। ‘वेलकम’ में बल्लू के किरदार और उनके चर्चित संवाद ने उन्हें दर्शकों के बीच खास पहचान दिलाई।

परिवार के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती होने से पहले भी वह शूटिंग कर रहे थे। उनके निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। अभिनेता का अंतिम संस्कार 25 सितंबर को मुंबई के यारी रोड कब्रिस्तान में किया जा रहा है।

21 साल बाद MP में फिर लौटी सरकारी बस सेवा, 351 बसों से हुआ सुगम परिवहन सेवा का आगाज

मध्य प्रदेश में करीब 21 साल बाद सार्वजनिक बस परिवहन व्यवस्था नए स्वरूप में फिर शुरू हो गई है। शुक्रवार को भोपाल के भेल दशहरा मैदान से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ किया। पहले चरण में प्रदेश के सात शहरों के लिए 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसें रवाना की गईं।

पहले चरण में इंदौर को 145, भोपाल को 106 और जबलपुर को 67 बसें मिली हैं। इसके अलावा रीवा में 18, देवास में 10, कटनी में 3 और भिंड में 2 बसें संचालित होंगी। इन बसों के जरिए शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

नई परिवहन व्यवस्था में यात्रियों की सुरक्षा और बस संचालन की निगरानी के लिए CCTV कैमरे, पैनिक बटन, GPS लाइव ट्रैकिंग और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। कमांड-कंट्रोल सेंटर से बसों के रूट, लोकेशन और समयबद्धता पर नजर रखी जाएगी।

सरकार ने इस सेवा के विस्तार का बड़ा लक्ष्य भी तय किया है। योजना के तहत 2031 तक करीब 15 हजार बसों का नेटवर्क तैयार करने की बात कही गई है, जिससे गांवों को शहरों और प्रमुख परिवहन केंद्रों से जोड़ने में मदद मिलेगी।

सिक्किम में भारी बारिश के बाद बड़ा भूस्खलन, रिंबी गांव में कई मकान क्षतिग्रस्त

सिक्किम में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच ग्यालशिंग जिले के रिंबी गांव में गुरुवार देर रात बड़ा भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से मलबा और चट्टानें खिसककर आबादी वाले इलाके में पहुंच गईं, जिससे कई मकान और सरकारी आवास क्षतिग्रस्त हो गए। कुछ संरचनाओं के पूरी तरह नष्ट होने की भी जानकारी सामने आई है।

भूस्खलन के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और लगातार बारिश के कारण आसपास के क्षेत्रों में भी खतरा बना हुआ है। प्रशासन की टीमें मौके पर स्थिति का जायजा ले रही हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों ने लोगों को भूस्खलन संभावित इलाकों से दूर रहने और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।

फिलहाल घटना में किसी जनहानि की सूचना नहीं है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने स्थिति पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

तीन दिवसीय जैविक अपशिष्ट प्रबंधन एवं जैविक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

सीहोर। ग्राम पंचायत बरखेड़ा हसन में मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के प्रायोजन में आयोजित तीन दिवसीय जैविक अपशिष्ट प्रबंधन एवं जैविक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन परिवर्तन सहयोग समिति द्वारा किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता एवं जैविक खेती विशेषज्ञ श्री अशोक मीणा ने किसानों को जैविक खेती की विभिन्न तकनीकों, जैविक अपशिष्ट के उचित प्रबंधन तथा प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों को जैविक खेती को अपनाने तथा कृषि में पर्यावरण-अनुकूल पद्धतियों के उपयोग के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में परिवर्तन समिति के अध्यक्ष डॉ. निलेश श्रीवास्तव की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को अपने खेतों में प्रयोग करने तथा जैविक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान क्षेत्र के कृषकों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की और जैविक खेती से संबंधित विभिन्न विषयों की जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत सभी सहभागी कृषकों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।

कार्यक्रम के सफल आयोजन पर ऋषि कुमार पांडेय संस्था द्वारा सभी कृषकों, विशेषज्ञों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया।

DDU-GKY 2.0: ग्रामीण युवाओं के लिए Skill Training और रोजगार, अक्टूबर 2026 से 34,920 युवाओं की ट्रेनिंग

DDU-GKY 2
DDU-GKY 2

नई दिल्ली। ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार और टिकाऊ आजीविका से जोड़ने वाली दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) 2.0 के कार्यान्वयन को अब तेज किया जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार अक्टूबर 2026 से अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में DDU-GKY 2.0 के नए प्रशिक्षण बैच शुरू किए जाने की तैयारी है। पहले चरण में 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,164 बैचों में 34,920 ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाना प्रस्तावित है।

DDU-GKY 2.0 क्या है?

Deen Dayal Upadhyaya Grameen Kaushalya Yojana ग्रामीण गरीब परिवारों के युवाओं को रोजगार से जुड़े कौशल का प्रशिक्षण देने वाली केंद्र प्रायोजित योजना है। इसे 25 सितंबर 2014 को National Rural Livelihoods Mission (DAY-NRLM) के अंतर्गत शुरू किया गया था। योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को उद्योग की जरूरत के अनुसार कौशल देकर रोजगार और स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है।

DDU-GKY मुख्य रूप से 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग के ग्रामीण युवाओं को लक्षित करती है। संशोधित DDU-GKY 2.0 व्यवस्था में केवल प्रशिक्षण पूरा कराने के बजाय प्रशिक्षण, प्लेसमेंट, नौकरी में टिकाव और प्रशिक्षण के बाद सहायता को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया गया है।

अक्टूबर 2026 से बड़े स्तर पर प्रशिक्षण

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार DDU-GKY 2.0 के तहत 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 2026-28 की अवधि के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1,200 से अधिक परियोजनाओं के लिए 5.6 लाख प्रशिक्षण लक्ष्यों का आवंटन किया जा चुका है।

पहले चरण में मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, मिजोरम और पुडुचेरी को शामिल किया गया है। इन राज्यों में अक्टूबर से प्रशिक्षण बैच शुरू करने की तैयारी है।

18.47 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण

सरकारी आंकड़ों के अनुसार DDU-GKY के तहत 2014-15 से अब तक 18.47 लाख से अधिक उम्मीदवारों को 800 से अधिक जॉब रोल में प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 12.43 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्लेसमेंट मिला है। वर्तमान व्यवस्था में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 749 से अधिक स्वीकृत परियोजनाएं, 760 से अधिक सक्रिय प्रशिक्षण केंद्र और 455 से अधिक Project Implementing Agencies काम कर रही हैं।

DDU-GKY 2.0 में क्या बदला?

DDU-GKY 2.0 में रोजगार की गुणवत्ता और स्थायित्व पर अधिक जोर दिया गया है। संशोधित व्यवस्था में न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि को पहले के तीन महीने से बढ़ाकर छह महीने किया गया है। साथ ही प्लेसमेंट के बाद उम्मीदवारों की स्थिति को 12 महीने तक ट्रैक और सपोर्ट करने की व्यवस्था पर जोर है।

प्रशिक्षण व्यवस्था में तकनीकी कौशल के साथ English Communication, Employability and Life Skills, Computer and Digital Literacy तथा Entrepreneurship जैसे गैर-डोमेन कौशल भी शामिल किए गए हैं। तीन महीने के प्रशिक्षण मॉडल में कुल 576 घंटे के प्रशिक्षण ढांचे में 396 घंटे डोमेन प्रशिक्षण और 180 घंटे अनिवार्य नॉन-डोमेन प्रशिक्षण का प्रावधान बताया गया है।

किन क्षेत्रों में मिलेगा प्रशिक्षण?

DDU-GKY 2.0 को बदलती रोजगार जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें Agriculture, Healthcare, Textiles, Beauty and Wellness, Green Jobs, Aerospace and Aviation सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण के अवसर शामिल किए गए हैं। अन्य कार्यान्वयन संबंधी जानकारी में EV maintenance, renewable energy, logistics, retail, hospitality और media & entertainment जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी जोर बताया गया है।

महिलाओं, SC-ST और दिव्यांग युवाओं पर भी फोकस

DDU-GKY में सामाजिक समावेशन को भी महत्व दिया गया है। योजना के तहत SC/ST समुदायों, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए निर्धारित भागीदारी प्रावधान हैं। 2026 के PIB Backgrounder के अनुसार SC/ST के लिए 50 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत कवरेज का प्रावधान बताया गया है।

इस वजह से DDU-GKY 2.0 को केवल Skill Development योजना के रूप में नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार, सामाजिक समावेशन, महिला सशक्तिकरण और गरीबी में कमी से जुड़ी पहल के रूप में भी देखा जा सकता है।

Job Mela से युवाओं और कंपनियों को जोड़ने की तैयारी

DDU-GKY 2.0 के तहत Job Melas के माध्यम से प्रशिक्षित ग्रामीण युवाओं और संभावित नियोक्ताओं को जोड़ने की व्यवस्था भी की गई है। इन मेलों में युवाओं का पंजीकरण, काउंसलिंग, नियोक्ताओं का सत्यापन और प्लेसमेंट परिणामों की निगरानी जैसे कार्य शामिल हैं।

डिजिटल मॉनिटरिंग पर जोर

DDU-GKY 2.0 में Integrated Portal के जरिए परियोजना पंजीकरण से लेकर प्रशिक्षण, मूल्यांकन, प्रमाणन, वित्तीय प्रबंधन और प्लेसमेंट ट्रैकिंग तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने पर जोर दिया गया है। उम्मीदवारों के लिए प्रशिक्षण खोजने और Project Implementing Agencies के प्रदर्शन को देखने की सुविधा भी प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था का हिस्सा है।

ग्रामीण युवाओं के लिए इसका क्या महत्व है?

DDU-GKY 2.0 का फोकस केवल किसी को एक कौशल सिखाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य Training → Placement → Employment Retention → Career Progression की पूरी प्रक्रिया को मजबूत करना है। सरकार ने 2026-27 के केंद्रीय बजट में DDU-GKY के लिए ₹750 करोड़ का आवंटन भी बताया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने, युवाओं को उद्योग की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित करने और उन्हें नौकरी अथवा स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में DDU-GKY 2.0 का विस्तार महत्वपूर्ण है।

Official Website:
DDU-GKY Official Portal

सरकारी जानकारी:
Ministry of Rural Development — DDU-GKY 2.0

महत्वपूर्ण: DDU-GKY 2.0 में प्रशिक्षण या पंजीकरण की वास्तविक उपलब्धता राज्य, परियोजना और प्रशिक्षण केंद्र के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए इच्छुक युवाओं को अपने राज्य के ग्रामीण विकास/State Rural Livelihood Mission की आधिकारिक जानकारी और उपलब्ध प्रशिक्षण केंद्र की पुष्टि करनी चाहिए।  

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