₹25 हजार प्रति वर्ग मीटर में लखनऊ में प्लॉट, सौमित्र विहार योजना में 5 हजार से अधिक भूखंड

राजधानी लखनऊ में अपना घर बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए बड़ी खबर है। सौमित्र विहार योजना के तहत 5,000 से अधिक आवासीय प्लॉट उपलब्ध कराने की तैयारी है। इन प्लॉटों की कीमत करीब 25 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

योजना के तहत विभिन्न आकार के आवासीय भूखंड विकसित किए जाएंगे, जिससे अलग-अलग बजट और जरूरत वाले लोगों को घर बनाने का अवसर मिल सके। बड़ी संख्या में प्लॉट उपलब्ध होने से लखनऊ में आवास की मांग को पूरा करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

सौमित्र विहार योजना को सुनियोजित आवासीय विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। योजना में सड़क, जल निकासी, बिजली और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि भविष्य में यहां रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

प्लॉट खरीदने वालों के लिए जरूरी बातें
योजना में प्लॉट की दर करीब 25,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर बताई जा रही है। हालांकि, प्लॉट का अंतिम आवंटन, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, पंजीकरण की तारीख और अन्य शर्तों से जुड़ी आधिकारिक जानकारी संबंधित प्राधिकरण की ओर से जारी की जाएगी।

लखनऊ में लगातार बढ़ती आवासीय मांग के बीच सौमित्र विहार योजना लोगों के लिए अपने घर का सपना पूरा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है। 5,000 से अधिक प्लॉट उपलब्ध होने से बड़ी संख्या में परिवारों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई ताकत, किसानों के लिए सरकार की नई दिशा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के कल्याण और उनकी आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ-साथ पशुपालन और उद्यानिकी को भी लगातार बढ़ावा दे रही है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को खेती के साथ आय के अतिरिक्त साधन उपलब्ध हों और वे आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बनें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने, उत्पादन बढ़ाने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के साथ किसानों को उद्यानिकी फसलों की ओर भी आकर्षित किया जा रहा है, जिससे कम लागत में बेहतर आय के अवसर मिल सकें।

उन्होंने कहा कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। दुग्ध उत्पादन, पशुधन संवर्धन और पशुपालन से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहन देकर किसानों की आमदनी बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार किसानों को आधुनिक पशुपालन तकनीक और आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने पर भी जोर दे रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्यानिकी क्षेत्र में फल, सब्जी, मसाला और फूलों की खेती की व्यापक संभावनाएं हैं। किसानों को इन क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कृषि, पशुपालन और उद्यानिकी को एक-दूसरे से जोड़कर किसानों के लिए आय के विविध स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। प्रदेश सरकार इसी समग्र दृष्टिकोण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री निवास में सजा सावन का रंग, महिला जन प्रतिनिधियों ने साझा की खुशियां

मुख्यमंत्री निवास में महिला जन प्रतिनिधियों ने सावन के अवसर पर उत्साह और उल्लास के साथ पारंपरिक पर्व की खुशियां मनाईं। कार्यक्रम में महिलाओं ने सावन के गीतों, झूले और पारंपरिक गतिविधियों का आनंद लिया। पूरे आयोजन में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली।

सावन के इस विशेष आयोजन में महिला जन प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और आपसी संवाद के साथ उत्सव का आनंद उठाया। कार्यक्रम का वातावरण गीत-संगीत और उमंग से सराबोर रहा। महिलाओं ने सावन से जुड़ी पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक परंपराओं को भी उत्साहपूर्वक मनाया।

महिला जन प्रतिनिधियों ने कहा कि इस तरह के आयोजन सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने के साथ महिलाओं को एक-दूसरे के साथ संवाद और अनुभव साझा करने का अवसर देते हैं। सावन का पर्व भारतीय संस्कृति में उल्लास, हरियाली और पारिवारिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है।

मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस कार्यक्रम ने महिला जन प्रतिनिधियों के बीच उत्साह और आत्मीयता का माहौल बनाया। आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और महिला सहभागिता का सुंदर संगम देखने को मिला।

युवाओं की प्रतिभा से गढ़ेगा विकास का नया छत्तीसगढ़, CM विष्णु देव साय ने जताया भरोसा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि देश और प्रदेश के विकास में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा, नवाचार और रचनात्मक सोच के माध्यम से ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज के युवा नई तकनीक को अपनाने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के युवा अपनी प्रतिभा का उपयोग कर आत्मनिर्भर बनें और विकास की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

उन्होंने कहा कि नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। स्टार्टअप, डिजिटल सेवाओं, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देकर युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी ऊर्जा और रचनात्मकता का सकारात्मक उपयोग करते हुए प्रदेश और देश के विकास में भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति के संकल्प, परिश्रम और नवाचार से छत्तीसगढ़ विकास की नई ऊंचाइयों को हासिल करेगा और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

‘वंदे मातरम’ की 150 साल की विरासत से रूबरू हुई नई पीढ़ी, छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन

राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक विशेष छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक सफर, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका और देशभक्ति की भावना को दर्शाने वाले दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण छायाचित्र प्रदर्शित किए गए।

प्रदर्शनी में ‘वंदे मातरम’ की रचना से लेकर स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसके प्रभाव और राष्ट्र निर्माण में इसके योगदान को तस्वीरों एवं अन्य सामग्री के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। यहां आने वाले लोगों को इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को करीब से समझने का अवसर मिला।

आयोजकों ने बताया कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, एकता और राष्ट्रभक्ति की भावनाओं का प्रतीक है। इसकी 150 वर्षों की यात्रा देश के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ी हुई है।

प्रदर्शनी में युवाओं और विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने विभिन्न छायाचित्रों के माध्यम से ‘वंदे मातरम’ से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान के बारे में जानकारी प्राप्त की। आयोजकों का कहना है कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को देश के गौरवशाली इतिहास और राष्ट्रीय भावनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

SEED Scheme से बदलेगी घुमंतू समुदायों की तस्वीर, शिक्षा से रोजगार और आवास तक मिल रहा सहारा

Scheme for Economic Empowerment of DNTs

 

नई दिल्ली। देश के डिनोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों को सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार SEED Scheme (Scheme for Economic Empowerment of DNTs) के जरिए व्यापक स्तर पर काम कर रही है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत संचालित यह पहल इन समुदायों को शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने पर केंद्रित है।

SEED के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण कोचिंग उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को बेहतर अवसर देना है, जो संसाधनों की कमी के कारण उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में पीछे रह जाते हैं।

योजना का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष आजीविका से जुड़ा है। समुदाय स्तर पर स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और छोटे आर्थिक समूहों को बढ़ावा देकर रोजगार तथा आय के स्थायी साधन विकसित करने की कोशिश की जा रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में आठ राज्यों में 5,061 स्वयं सहायता समूह बनाए गए, जिनसे 61,133 लाभार्थी जुड़े।

स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए भी SEED के तहत सहायता का प्रावधान है। योजना के माध्यम से पात्र समुदायों को स्वास्थ्य बीमा और आयुष्मान भारत जैसी सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार के अनुसार स्वास्थ्य घटक के तहत बड़ी संख्या में आयुष्मान भारत कार्ड जारी किए गए हैं, जिससे जरूरतमंद परिवारों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ी है।

आवास को भी योजना के दायरे में रखा गया है। पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी मौजूदा सरकारी योजनाओं से जोड़कर पक्के घर की सुविधा दिलाने में मदद की जाती है। इसके लिए संबंधित विभाग लाभार्थियों की पहचान, दस्तावेजी प्रक्रिया और सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय में सहयोग करता है।

केंद्र सरकार के अनुसार SEED का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले अवसर तैयार करना है, ताकि DNT, NT और SNT समुदाय शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आवास के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें। जुलाई 2026 तक योजना के विभिन्न घटकों के तहत 1.10 लाख से अधिक लाभार्थियों को कवर किए जाने की जानकारी सरकार ने दी थी।

सरकार की इस पहल को उन समुदायों तक कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक अवसरों से वंचित रहे हैं। SEED के जरिए शिक्षा और कौशल से लेकर आजीविका, स्वास्थ्य और आवास तक एकीकृत सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

 

SMILE Scheme से बदलेगी जिंदगी, पुनर्वास के साथ सम्मान और रोजगार पर सरकार का जोर

 

नई दिल्ली। समाज के हाशिए पर रह रहे लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की SMILE Scheme (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) के तहत पुनर्वास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर दिया जा रहा है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की यह योजना विशेष रूप से भीख मांगने की स्थिति में रह रहे लोगों और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए व्यापक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है।

SMILE के तहत केवल आश्रय उपलब्ध कराने तक सीमित रहने के बजाय लाभार्थियों को स्वास्थ्य सुविधाएं, काउंसलिंग, शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। सरकार का लक्ष्य पुनर्वास के जरिए लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना है। इस काम में राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों और सामाजिक संगठनों की भी भागीदारी रहती है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 तक SMILE के भिक्षावृत्ति पुनर्वास घटक का संचालन देश के 216 शहरों में किया जा रहा था और 10,200 से अधिक लोगों का पुनर्वास किया जा चुका था। सरकार ने वित्त वर्ष 2030-31 तक इस पहल के तहत करीब 35,000 लोगों को कवर करने का लक्ष्य रखा है।

योजना में बच्चों की स्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। पुनर्वास प्रक्रिया के दौरान जरूरत के अनुसार चिकित्सा सहायता, परामर्श, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, ताकि प्रभावित परिवारों और बच्चों को लंबे समय तक सहायता मिल सके।

SMILE के ट्रांसजेंडर कल्याण घटक के तहत भी पुनर्वास, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक समावेशन से जुड़ी सहायता दी जाती है। मंत्रालय के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में Garima Greh के माध्यम से आश्रय और सहायता की व्यवस्था संचालित की जा रही है।

सरकार ने योजना की निगरानी को मजबूत करने के लिए तकनीक का भी इस्तेमाल शुरू किया है। अप्रैल 2026 में SMILE-Beggary Survey Mobile Application लॉन्च किया गया, जिसका उद्देश्य लाभार्थियों से संबंधित जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड, बेहतर मॉनिटरिंग और समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना है।

SMILE Scheme को सामाजिक कल्याण की ऐसी पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें आर्थिक सहायता के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और रोजगार के अवसरों को जोड़कर जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है।

MP News: लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजनाओं को 2030-31 तक जारी रखने पर कैबिनेट की मुहर

Ladli Bahna Yojana

 

भोपाल। मध्य प्रदेश की महिलाओं और बेटियों से जुड़ी दो प्रमुख योजनाओं को लेकर मोहन यादव सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना और लाड़ली लक्ष्मी योजना को आगे भी जारी रखने की मंजूरी दे दी गई है। सरकार ने इन योजनाओं के लिए अगले पांच वर्षों की वित्तीय व्यवस्था को भी मंजूरी दी है।

कैबिनेट के फैसले के मुताबिक लाड़ली बहना योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 1,14,365 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए इसी अवधि में 16,326.47 करोड़ रुपये की वित्तीय व्यवस्था मंजूर की गई है। सरकार का यह फैसला महिला सशक्तिकरण और बेटियों के सामाजिक एवं आर्थिक हितों से जुड़ी योजनाओं की निरंतरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कैबिनेट बैठक में सिर्फ महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर ही निर्णय नहीं हुआ, बल्कि सरकार ने विभिन्न जनकल्याण और विकास कार्यक्रमों के लिए करीब 1.46 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय निरंतरता को मंजूरी दी। इसमें स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा अधोसंरचना के लिए 11,835.35 करोड़ रुपये तथा कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए 870.16 करोड़ रुपये का प्रावधान भी शामिल है।

बैठक में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को भी वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इसके लिए करीब 2,137.65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना में केंद्र और राज्य की 60:40 हिस्सेदारी के आधार पर वित्तीय व्यवस्था की जाएगी।

सरकार के इस फैसले से मध्य प्रदेश में महिलाओं और बेटियों के लिए संचालित प्रमुख सामाजिक कल्याण योजनाओं को आने वाले वर्षों में भी जारी रखने का रास्ता साफ हो गया है। कैबिनेट के फैसले के बाद इन योजनाओं के लिए दीर्घकालिक बजट व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में भी कदम बढ़ा है।

Crime News Kolar Bhopal: हिट एंड रन: नशे में तेज रफ्तार कार ने स्कूटी को मारी टक्कर, पिता की मौत; बेटा गंभीर

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Kolar bhopal
सुधांशु अवस्थी

भोपाल। कोलार थाना क्षेत्र के ललिता नगर कटियार मार्केट में मंगलवार रात तेज रफ्तार कार ने स्कूटी सवार पिता-पुत्र को टक्कर मार दी। हादसे में स्कूटी सवार सुधांशु की मौत हो गई, जबकि उनके बेटे माधव को गंभीर चोटें आई हैं। घायल माधव को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार की रफ्तार करीब 90 किलोमीटर प्रति घंटा थी। बताया जा रहा है कि चालक नशे में था। तेज रफ्तार के कारण कार चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा और रास्ते में कई लोगों को चपेट में लेने के बाद स्कूटी से जा भिड़ा।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कूटी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और लोगों ने कार चालक को पकड़ लिया।

 

पुलिस के मुताबिक कार चालक नाबालिग है, जिसे हिरासत में लिया गया है। घटना रात करीब साढ़े 8 बजे की बताई जा रही है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद: विद्यार्थियों को कानून, अधिकार और सुरक्षा की दी जानकारी

भोपाल, 18 अगस्त 2026। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सामुदायिक पुलिसिंग के तहत युवाओं को कानून, नागरिक अधिकारों, कर्तव्यों और सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, निशातपुरा, भोपाल में किया गया। कार्यक्रम में डीआईजी (कम्युनिटी पुलिसिंग) डॉ. विनीत कपूर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को पुलिस की कार्यप्रणाली, कानून, मौलिक एवं मानव अधिकार, महिला और बाल सुरक्षा सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। डॉ. विनीत कपूर ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि पुलिस और समाज के बीच विश्वास एवं संवाद मजबूत होने से अपराध की रोकथाम और जनसुरक्षा का तंत्र अधिक प्रभावी बनता है।

उन्होंने घरेलू हिंसा, बालिकाओं एवं बच्चों की सुरक्षा तथा पॉक्सो एक्ट से जुड़े प्रावधानों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने कहा कि किसी लड़की को परेशान करना, उसका पीछा करना या गलत नजर से देखना भी कानून की नजर में अपराध है। कार्यक्रम में प्रश्नोत्तरी का आयोजन भी किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों से किया संवाद

सहायक पुलिस महानिरीक्षक अमृतलाल मीणा ने ‘जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद’ की उपयोगिता बताते हुए कहा कि पुलिस और युवाओं के बीच निरंतर संवाद से कानून के प्रति जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कानून का सम्मान करने तथा अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में सहायक पुलिस महानिरीक्षक महिला सुरक्षा मंजू लता खत्री, एसीपी भोपाल रेनू मुरार, जिला शिक्षा अधिकारी अभिनव आर्य सहित विद्यालय के प्राचार्य आर.सी. जैन, उप प्राचार्य सुनीता चोलकर, कोऑर्डिनेटर कांति जैन, स्कूल मैनेजर मनोज मिश्रा, निदा जावेद एवं अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

विद्यालय की नवाचारी गतिविधियों का अवलोकन

कार्यक्रम से पहले अतिथियों ने विद्यालय का भ्रमण कर शैक्षणिक, तकनीकी और नवाचारी गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने विद्यालय के पुस्तकालय, ICT कक्ष, रोबोटिक कक्ष, वोकेशनल एवं जीव विज्ञान प्रयोगशाला का निरीक्षण किया।

विद्यालय में स्थापित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम स्पेस गैलरी भी अतिथियों के आकर्षण का केंद्र रही। इसके अलावा मनोविज्ञान कक्ष, मेडिकल/रेस्ट रूम और विद्यार्थियों के हित में संचालित अन्य गतिविधियों की जानकारी ली गई।

इस अवसर पर विद्यालय की मासिक पत्रिका ‘गुल्लक’ का विमोचन किया गया तथा अतिथियों को विद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘आयाम’ भेंट की गई।

उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और विद्यालय में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों का सम्मान किया गया। समापन अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य आर.सी. जैन ने अतिथियों एवं उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।

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