पितृपक्ष में गया जाने वालों के लिए राहत, रानी कमलापति से चलेगी स्पेशल ट्रेन

भोपाल। पितृपक्ष के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए पश्चिम मध्य रेलवे ने रानी कमलापति–गया–रानी कमलापति पितृपक्ष स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है।
ट्रेन नंबर 01661 रानी कमलापति–गया 27 सितंबर, 2 अक्टूबर और 7 अक्टूबर 2026 को चलेगी। वहीं ट्रेन नंबर 01662 गया–रानी कमलापति 30 सितंबर, 5 अक्टूबर और 10 अक्टूबर को संचालित होगी।
स्पेशल ट्रेन दोनों दिशाओं में नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिहोरा रोड, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, भभुआ रोड, सासाराम, डेहरी ऑन सोन और अनुग्रह नारायण रोड सहित कई स्टेशनों पर ठहरेगी।
नरसिंहपुर में ट्रेन 01661 का समय शाम 7:38 से 7:40 बजे और वापसी में 01662 का समय सुबह 10:08 से 10:10 बजे निर्धारित किया गया है।
रेलवे के अनुसार ट्रेन से जुड़ी विस्तृत जानकारी NTES/139 से प्राप्त की जा सकती है।

Kolar Crime: भोपाल में ट्रैफिक ACP के घर चोरी, 6 लाख कैश और लाखों के जेवर ले गए बदमाश

भोपाल। कोलार थाना क्षेत्र के दानिश कुंज-2 में ट्रैफिक ACP विजय दुबे के घर चोरी का मामला सामने आया है। घटना गुरुवार रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, चोर घर से 6 लाख रुपये से ज्यादा की नकदी और कई तोला सोने-चांदी के जेवर लेकर फरार हो गए। बताया जा रहा है कि घर में रखा करीब 6 लाख रुपये का कैश कुछ महीने पहले लिए गए 20 लाख रुपये के पर्सनल लोन की बची हुई रकम थी।

चोर पुश्तैनी जेवरों के साथ परिवार के अन्य सदस्यों के जेवर भी ले गए। इनमें भाई, भाभी और सालियों के जेवर शामिल बताए जा रहे हैं।

घटना की सूचना मिलते ही कोलार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमें लगाई हैं। आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

कोलार के सरकारी स्कूलों की बदहाली पर कांग्रेस का प्रदर्शन, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

Oplus_16908288

भोपाल। हुजूर विधानसभा के कोलार क्षेत्र में शासकीय विद्यालयों की बदहाल स्थिति और अव्यवस्थाओं को लेकर कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और एसडीएम के माध्यम से शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाएं तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि कोलार क्षेत्र के कई सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। स्कूलों में फर्श खराब और कई जगह उखड़ा हुआ है। वहीं, खुले एवं असुरक्षित बिजली के तारों के कारण छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कुछ शासकीय विद्यालयों की छतों की स्थिति भी जर्जर है। बारिश के दौरान स्कूलों में पानी टपकने की समस्या सामने आती है। इसके अलावा मध्याह्न भोजन तैयार किए जाने वाले स्थानों पर स्वच्छता की कमी, गंदगी और पानी भरने जैसी समस्याओं का भी कांग्रेस ने मुद्दा उठाया।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकारी स्कूल बच्चों के भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ-साथ स्कूलों में स्वच्छता, बिजली, भवन और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाओं का होना जरूरी है। कांग्रेस ने शासन से मांग की कि कोलार क्षेत्र के सभी शासकीय विद्यालयों का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत और व्यवस्थाओं में सुधार कराया जाए।

मुख्यमंत्री के दावे पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों से बेहतर बताया जाता है। कांग्रेस ने कहा कि मुख्यमंत्री को राजधानी भोपाल से बाहर जाने की जरूरत नहीं है। वे कोलार क्षेत्र के सरकारी स्कूलों का जमीनी निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति देख सकते हैं।

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि स्कूलों की मौजूदा स्थिति देखने के बाद ही सरकारी स्कूलों में सुविधाओं और व्यवस्थाओं को लेकर वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने प्रशासन से स्कूलों की समस्याओं का जल्द निराकरण करने और विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की।

इंदौर में Transport Summit 2026 का आगाज, Smart Mobility से Green Transport तक होगी चर्चा

इंदौर। मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और बेहतर बनाने की दिशा में इंदौर में 11 और 12 सितंबर को यात्री परिवहन विजन समिट-2026 का आयोजन किया जाएगा। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होने वाले इस दो दिवसीय समिट में देशभर से परिवहन विशेषज्ञ, नीति निर्माता, बस ऑपरेटर, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और Mobility क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। समिट में Public Transport व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक, सुगम और पर्यावरण-अनुकूल बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा होगी। आधुनिक तकनीक, डिजिटल मोबिलिटी और Public-Private Partnership यानी PPP Model के जरिए यात्री परिवहन सेवाओं को मजबूत करने के विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। बढ़ते शहरीकरण और यात्रियों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए बेहतर कनेक्टिविटी, समयबद्ध परिवहन सेवाएं और Passenger Safety जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे। Smart Transport Technology, Electric Mobility, Green Transport और Pollution-Free Transport को लेकर भी विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। परिवहन क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने और नई Mobility कंपनियों के लिए अवसर तैयार करने पर भी मंथन होगा। समिट के दौरान अलग-अलग विषयों पर आठ सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें Public Transport की मौजूदा चुनौतियों, तकनीकी नवाचार, नीति निर्माण, यात्री सुरक्षा, निजी निवेश और भविष्य की Mobility व्यवस्था पर चर्चा होगी। आयोजन का उद्देश्य मध्यप्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को आने वाले समय की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना और यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नई दिशा तय करना है। समिट में परिवहन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और हितधारकों के सुझावों के आधार पर आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ Public Transport System विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा होगी। मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरों और बदलती परिवहन जरूरतों को देखते हुए इंदौर में होने वाला यह आयोजन परिवहन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Kolar Crime: कजलीखेड़ा पुलिस ने पीछा कर पकड़ी स्कॉर्पियो, करीब 40 पेटी शराब जब्त

भोपाल। अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत कजलीखेड़ा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक स्कॉर्पियो वाहन को पीछा कर पकड़ा। पुलिस की कार्रवाई के दौरान वाहन से भारी मात्रा में शराब बरामद होने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार स्कॉर्पियो से करीब 40 पेटी शराब जब्त की गई है।

जानकारी के मुताबिक पुलिस को वाहन के संबंध में सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम ने स्कॉर्पियो का पीछा किया और उसे रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान वाहन में बड़ी मात्रा में शराब मिली। पुलिस ने वाहन और शराब को अपने कब्जे में ले लिया है।

बताया जा रहा है कि बरामद शराब को कोलार क्षेत्र में अवैध बिक्री के लिए ले जाने की आशंका है। हालांकि शराब की वास्तविक मात्रा, उसके स्रोत और इसे कहां ले जाया जा रहा था, इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। वाहन से जुड़े दस्तावेजों और शराब के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शराब परिवहन के पीछे कौन लोग शामिल हैं और इसका उद्देश्य क्या था।

कजलीखेड़ा पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

तालाब की जमीन पर सड़क और प्लॉटिंग! NGT सर्वे में सामने आया केरवा-कलियासोत का चौंकाने वाला खुलासा

भोपाल। केरवा-कलियासोत क्षेत्र में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा गठित विशेष टीम की ग्राउंड ट्रुथिंग के दौरान तालाब की सीमाओं, FTL और कथित अतिक्रमण को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। सर्वे के दौरान तालाब के जलभराव क्षेत्र के भीतर सड़क निर्माण और प्लॉटिंग के लिए मुनारें लगाए जाने के आरोपों की भी जांच की गई।

विशेष टीम ने बुधवार सुबह करीब 11 बजे वाल्मी के सामने स्थित मोटल शिराज की संपत्ति से ग्राउंड ट्रुथिंग की शुरुआत की। टीम ने निचले क्षेत्र में मौजूद मुनारों की स्थिति, पानी के वास्तविक स्तर और FTL से उनके संबंध का मौके पर निरीक्षण किया। इसके बाद राजेश वाधवानी की संपत्ति के आसपास भी मुनारों और FTL की स्थिति देखी गई।

FTL से महज 10 फीट दूर मिला पक्का निर्माण

सर्वे के दौरान एक फिश फार्म क्षेत्र में FTL से करीब 10 फीट की दूरी पर पक्का निर्माण पाया गया। इसके समीप डेयरी का संचालन भी होता मिला। स्थानीय स्तर पर इस संपत्ति को एक पूर्व DGP से संबंधित बताया गया है। हालांकि, संपत्ति के स्वामित्व और निर्माण की वैधता को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।

खुदागंज में पानी FTL सीमा तक पहुंचा

इसके बाद टीम वार्ड क्रमांक 26 स्थित ग्राम खुदागंज पहुंची। यहां कई स्थानों पर पानी का स्तर FTL सीमा तक पहुंचा हुआ दिखाई दिया। टीम को पानी की सीमा से सटे कई रेस्टोरेंट और अन्य निर्माण भी मिले।

जल संसाधन विभाग (WRD) के अधिकारियों ने मौके पर FTL सीमा दर्शाने वाले पत्थरों की स्थिति और लोकेशन की जांच की। इसका उद्देश्य वास्तविक FTL सीमा को मौके पर स्पष्ट रूप से चिन्हित करना था।

तालाब के अंदर सड़क और प्लॉटिंग पर सवाल

ग्राउंड ट्रुथिंग के दौरान कलियासोत तालाब क्षेत्र में सड़क निर्माण और प्लॉटिंग को लेकर गंभीर सवाल सामने आए। आरोप है कि तालाब के जलभराव क्षेत्र के भीतर से सड़क बनाई गई है। इसके अलावा कई बड़े रेस्टोरेंट और व्यावसायिक निर्माण तालाब की सीमा के भीतर या उसके बेहद करीब होने की बात सामने आई।

कुछ स्थानों पर प्लॉटिंग के लिए मुनारें लगाए जाने और इनके कारण पानी के प्राकृतिक बहाव तथा जलभराव के रास्ते प्रभावित होने के आरोपों की भी जांच की गई।

केरवा डैम में फिलहाल नहीं हो सका ग्राउंड ट्रुथिंग सर्वे

इसके बाद विशेष टीम केरवा डैम क्षेत्र पहुंची। अधिकारियों ने टीम को बताया कि वर्तमान में केरवा डैम के FTL स्तर पर पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मौके पर FTL की वास्तविक स्थिति का ग्राउंड ट्रुथिंग सर्वे करना फिलहाल संभव नहीं है।

इस मुद्दे पर समिति के सदस्यों और अधिकारियों के बीच चर्चा हुई। विचार-विमर्श के बाद सहमति बनी कि केरवा की वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए बिना जल्दबाजी में आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

15 सितंबर को NGT के सामने रखी जाएगी रिपोर्ट

केरवा की FTL और डैम से जुड़े तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं की रिपोर्ट आगामी 15 सितंबर को NGT के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद NGT के निर्देशों के आधार पर केरवा क्षेत्र में आगे की ग्राउंड ट्रुथिंग और जांच की प्रक्रिया तय की जाएगी।

याचिकाकर्ता ने कही वैज्ञानिक जांच की बात

याचिकाकर्ता राशिद नूर खान ने कहा कि पूरे मामले का समाधान न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल कागजों पर सीमा तय करने के बजाय मौके पर मौजूद पुरानी मुनारों, जलस्तर, FTL और प्राकृतिक जल प्रवाह की स्थिति को वैज्ञानिक एवं कानूनी आधार पर रिकॉर्ड किया जाना जरूरी है, ताकि आगे की कार्रवाई निष्पक्ष तरीके से हो सके।

PM Modi का UPI पर बड़ा जोर: 11 देशों के बाद अब दुनिया के और देशों तक पहुंचेगा भारत का Digital Payment System

modi-upi-speech

नई दिल्ली। भारत के Unified Payments Interface (UPI) को Global Digital Payment Network में और मजबूत करने की दिशा में बड़ा फोकस सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Global Fintech Fest 2026 में भारत के UPI ecosystem को दुनिया के अधिक देशों के payment systems से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में Digital Payments, FinTech और Financial Technology के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बनाई है। UPI ने न केवल भारत में digital transactions को आसान बनाया है, बल्कि दुनिया के सामने भारत के एक सफल और scalable digital payment model के रूप में भी जगह बनाई है।

अब भारत का अगला लक्ष्य UPI की पहुंच को और अधिक देशों तक ले जाना और Cross-Border Digital Payments को आसान बनाने की दिशा में काम करना है।

UPI Global Expansion पर PM Modi का फोकस

Global Fintech Fest में प्रधानमंत्री मोदी का जोर इस बात पर रहा कि भारत के digital payment infrastructure को global connectivity के साथ आगे बढ़ाया जाए। अलग-अलग देशों के payment systems के साथ UPI की interoperability बढ़ने से international transactions को अधिक seamless बनाया जा सकता है।

इसका असर सिर्फ बड़े financial institutions तक सीमित नहीं रहेगा। Indian businesses, tourists, international customers और overseas Indians भी इससे लाभान्वित हो सकते हैं।

Cross-border payment व्यवस्था आसान होने से international transactions में समय और प्रक्रिया दोनों को बेहतर बनाने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

11 देशों तक पहुंच चुका है UPI

भारत का UPI अब domestic payment platform तक सीमित नहीं है। UPI-based payment services की international presence लगातार बढ़ी है और यह 11 देशों तक पहुंच चुकी है।

भारत जिस digital payment infrastructure को घरेलू स्तर पर सफलतापूर्वक विकसित कर चुका है, अब उसी technology और experience को international markets तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

UPI की real-time payment capability, QR-based transactions और mobile-first experience इसे digital payments के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण technology platform बनाते हैं।

Global Payments में भारत की बढ़ती भूमिका

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने digital payments के क्षेत्र में तेजी से expansion किया है। UPI ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े businesses तक payment ecosystem को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अब इसी digital infrastructure को international level पर expand करने से भारत की FinTech Diplomacy और digital economy को भी नई दिशा मिल सकती है।

विशेषज्ञों के नजरिए से देखें तो payment systems की interoperability बढ़ने से देशों के बीच digital commerce और financial connectivity को बढ़ावा मिल सकता है।

विदेशों में रहने वाले Indians को क्या फायदा होगा?

UPI के global expansion का एक बड़ा संभावित फायदा विदेशों में रहने वाले भारतीयों और international travellers को मिल सकता है।

यदि UPI और दूसरे देशों के payment networks के बीच connectivity बढ़ती है, तो भारत से जुड़े cross-border transactions को अधिक convenient बनाया जा सकता है। इससे international visitors और भारतीय businesses के लिए digital payment experience भी बेहतर हो सकता है।

इसके अलावा global markets में काम कर रही भारतीय कंपनियों के लिए भी digital payment infrastructure का विस्तार महत्वपूर्ण हो सकता है।

International Trade और Digital Commerce को मिल सकता है Boost

आज global economy में fast और reliable digital payments की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में cross-border payment systems के बीच बेहतर connectivity international trade और e-commerce को support कर सकती है।

भारत का UPI model यदि अधिक देशों के payment ecosystems के साथ integrate होता है, तो digital commerce के लिए एक बड़ा interconnected network विकसित होने की संभावना है।

यह भारत के Digital India Vision और technology-led economic growth के लिए भी महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

UPI की सफलता ने बदली भारत की Payment Economy

UPI ने भारत में digital transactions को आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। QR Code से payment, UPI ID के जरिए money transfer और mobile-based transactions ने payment process को काफी सरल बनाया है।

इसका सबसे बड़ा प्रभाव छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और उन users पर दिखाई देता है जिन्होंने traditional cash payments के साथ-साथ digital payments को तेजी से अपनाया है।

भारत अब इसी experience को international level पर scale करने की कोशिश कर रहा है।

Digital India से Global Digital India तक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Digital India vision में technology को economic growth और public convenience का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। UPI का international expansion इसी broader digital vision का हिस्सा है।

Domestic success के बाद अब चुनौती यह है कि भारत अपने digital payment infrastructure को दूसरे देशों के systems के साथ कितनी प्रभावी तरीके से connect कर पाता है।

यदि यह connectivity व्यापक स्तर पर विकसित होती है, तो आने वाले वर्षों में UPI Global Payments, Cross-Border Transactions और International Digital Commerce में भारत की भूमिका और मजबूत हो सकती है।

क्या है UPI?

UPI यानी Unified Payments Interface भारत का real-time digital payment system है। इसके जरिए users अपने bank accounts से मोबाइल फोन के माध्यम से तुरंत payment या money transfer कर सकते हैं।

UPI ID, QR Code और अन्य digital payment methods के जरिए transaction किया जा सकता है। इसकी simplicity और real-time functionality ने इसे भारत के सबसे लोकप्रिय digital payment platforms में शामिल किया है।

PM Modi UPI News क्यों है महत्वपूर्ण?

Global Fintech Fest 2026 में UPI को अधिक देशों के payment systems से जोड़ने पर प्रधानमंत्री मोदी का जोर भारत की Global Digital Economy Strategy को दर्शाता है।

भारत अब केवल अपने domestic digital payment ecosystem को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि UPI को international digital payments की दुनिया में भी एक महत्वपूर्ण platform के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आने वाले समय में यदि UPI की international connectivity और बढ़ती है, तो इससे Indian FinTech, Cross-Border Payments, International Trade और Digital Commerce को नई गति मिलने की संभावना है।

Key Takeaway

UPI Global Expansion भारत के Digital India Mission का अगला बड़ा चरण हो सकता है। 11 देशों तक पहुंच बना चुका भारत का digital payment ecosystem अब अधिक देशों के payment networks के साथ connectivity बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसका असर international payments से लेकर global digital commerce तक देखने को मिल सकता है।

Horticulture Subsidy पर बड़ा अपडेट: NHB ने दो योजनाओं के नए आवेदन एक महीने के लिए रोके, जानिए क्या है वजह

agriculture-news

नई दिल्ली। किसानों और Horticulture Sector से जुड़े कारोबारियों के लिए National Horticulture Board (NHB) ने एक अहम फैसला लिया है। बोर्ड ने अपनी दो प्रमुख योजनाओं के तहत Grant of Clearance (GoC) के नए आवेदन स्वीकार करने पर अस्थायी रोक लगा दी है। NHB की ओर से जारी सूचना के मुताबिक यह रोक 4 सितंबर 2026 से एक महीने के लिए लागू की गई है।

NHB ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान संबंधित योजनाओं के तहत नए GoC applications ऑनलाइन जमा नहीं किए जा सकेंगे। हालांकि, जिन आवेदन मामलों को रोक लागू होने से पहले NHB में जमा किया जा चुका है, उन पर कार्रवाई जारी रहेगी।

किन Horticulture Subsidy Schemes पर लगी रोक?

NHB के मुताबिक नए Grant of Clearance applications पर रोक दो प्रमुख योजनाओं के लिए लगाई गई है।

पहली है Scheme for Development of Commercial Horticulture through Production and Post-Harvest Management of Horticulture Produce। यह योजना बड़े स्तर पर Commercial Horticulture और Post-Harvest Infrastructure को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित की जाती है।

दूसरी योजना है Capital Investment Subsidy Scheme for Construction, Expansion and Modernization of Cold Storages/Storages of Horticulture Products। इसका उद्देश्य Horticulture Produce के भंडारण के लिए Cold Storage और Storage Infrastructure को बढ़ावा देना है।

NHB ने अचानक आवेदन क्यों रोके?

NHB की आधिकारिक घोषणा में कहा गया है कि नए applications की receipt को अस्थायी रूप से रोकने का उद्देश्य Revised Guidelines को व्यवस्थित तरीके से लागू करना, लंबित मामलों का आवश्यक Verification और Online Application System को Update करना है।

बोर्ड ने यह भी कहा है कि नई व्यवस्था लागू करने के दौरान सिस्टम और लंबित मामलों को revised guidelines के अनुरूप व्यवस्थित किया जाएगा। नई applications दोबारा कब से स्वीकार की जाएंगी, इसकी जानकारी NHB द्वारा आगे जारी की जाएगी।

पहले से जमा आवेदन का क्या होगा?

यह इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। NHB ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ नए GoC applications की submission पर रोक लगाई गई है।

जो applications इस temporary suspension की शुरुआत से पहले NHB में जमा हो चुके हैं, उन्हें revised scheme guidelines और बोर्ड के अन्य लागू निर्देशों के अनुसार process किया जाता रहेगा।

इसका मतलब यह है कि पहले से आवेदन कर चुके किसानों, उद्यमियों या परियोजना आवेदकों के मामलों को केवल इस नई रोक के कारण स्वतः रद्द नहीं किया गया है।

Grant of Clearance यानी GoC क्या है?

NHB की इन योजनाओं में Grant of Clearance एक महत्वपूर्ण चरण है। GoC के आधार पर पात्र परियोजनाएं credit-linked back-ended subsidy की प्रक्रिया में आगे बढ़ती हैं।

इसलिए नए GoC applications पर लगी एक महीने की रोक का सीधा असर उन नए project applicants पर पड़ सकता है, जो NHB की इन दोनों योजनाओं के तहत subsidy assistance लेने के लिए आवेदन करने की तैयारी कर रहे थे।

Commercial Horticulture Scheme में क्या मिलता है?

Commercial Horticulture Scheme का उद्देश्य बड़े स्तर पर लाभकारी बागवानी उत्पादन और उससे जुड़े Post-Harvest Management Infrastructure को बढ़ावा देना है।

इस योजना के अंतर्गत capsicum, cucumber और tomato जैसे horticulture crops तथा कई फूलों की commercial cultivation से जुड़े projects शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस scheme में अधिकतम 50 प्रतिशत तक subsidy, जिसकी सीमा ₹1 करोड़ प्रति family तक बताई गई है, का प्रावधान है। हालांकि वास्तविक सहायता project eligibility, approved cost norms और लागू guidelines पर निर्भर करती है।

Cold Storage Subsidy Scheme क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत में fruits और vegetables की Post-Harvest Loss को कम करने के लिए Cold Storage Infrastructure महत्वपूर्ण माना जाता है। NHB की Capital Investment Subsidy Scheme के तहत नए Cold Storages बनाने, मौजूदा facilities के expansion और modernization से जुड़े projects को सहायता देने का प्रावधान है।

NHB की वेबसाइट पर Scheme No. 1 और Scheme No. 2 के लिए revised guidelines, cost norms, assistance pattern और application से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं।

अगस्त में बदली गई थीं NHB की Guidelines

नए applications पर रोक से पहले NHB ने 21 अगस्त 2026 को Commercial Horticulture और Cold Storage Schemes की guidelines में amendment जारी किया था। NHB की आधिकारिक वेबसाइट पर इसे revised scheme guidelines के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

इन बदलावों में eligibility से जुड़े महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। रिपोर्ट के अनुसार revised rules में ‘family’ की परिभाषा को विस्तारित किया गया और कुछ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों, serving ministers, MPs, MLAs, mayors, district panchayat chiefs और government employees को NHB financial assistance से बाहर किया गया।

Subsidy विवाद के बाद क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

NHB की guidelines में बदलाव और नए applications पर temporary suspension ऐसे समय हुआ है जब बोर्ड की subsidy व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया था।

The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से जुड़े राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने NHB की एक योजना के तहत अपने cucumber farm के लिए करीब ₹99 लाख की subsidy प्राप्त की थी, जिसे बाद में वापस कर दिया गया। रिपोर्ट में एक serving Central government secretary के परिवार से जुड़े subsidy मामले का भी उल्लेख किया गया है।

इसके बाद NHB की scheme guidelines में eligibility और family definition को लेकर बदलाव किए गए। हालांकि NHB की आधिकारिक सूचना में applications रोकने की वजह के रूप में विवाद का उल्लेख नहीं किया गया है। बोर्ड ने इसका आधिकारिक कारण revised guidelines के implementation, pending cases की verification और online system updation बताया है।

किसानों और Horticulture Entrepreneurs के लिए क्या मतलब?

अगर कोई किसान, horticulture entrepreneur या cold storage project developer इन दोनों NHB schemes के तहत नया GoC application जमा करने की तैयारी कर रहा है, तो उसे फिलहाल आवेदन प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा।

इस दौरान संभावित applicants को अपने project documents, DPR, bank loan documents और अन्य आवश्यक कागजात तैयार रखने के साथ-साथ NHB की revised guidelines को ध्यान से पढ़ना चाहिए।

सबसे जरूरी बात यह है कि NHB की यह रोक नई GoC applications पर है; पहले से जमा applications पर blanket रोक नहीं लगाई गई है।

कब फिर शुरू होंगे नए आवेदन?

NHB ने नए GoC applications की receipt को 4 सितंबर 2026 से एक महीने के लिए temporarily suspend किया है। बोर्ड ने यह भी कहा है कि fresh applications की resumption date अलग से notify की जाएगी।

इसलिए नए आवेदकों को NHB की official website और News & Announcements section पर नजर रखनी चाहिए।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

Horticulture Subsidy के लिए आवेदन करने वाले किसानों और उद्यमियों को किसी एजेंट या अनधिकृत स्रोत की जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय NHB की official guidelines और announcements से जानकारी सत्यापित करनी चाहिए। आवेदन दोबारा खुलने के बाद eligibility, subsidy pattern, project cost norms और आवश्यक documents की नई शर्तों को जांचना महत्वपूर्ण होगा।

NHB की आधिकारिक वेबसाइट पर schemes, revised guidelines और online application से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।

MP Social Security Pension 2026: बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांगों के लिए पेंशन योजनाएं

mp govt yojna

भोपाल। मध्य प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी पेंशन योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों के लिए महत्वपूर्ण सहायता का माध्यम बनी हुई हैं। राज्य सरकार की ओर से अलग-अलग श्रेणी के पात्र हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जाती हैं। इनमें बुजुर्गों, विधवा या परित्यक्ता महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध पेंशन योजनाएं प्रमुख हैं।

इन योजनाओं का मकसद ऐसे लोगों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, जिनके लिए रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण होता है। समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना भी इसी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

किन वर्गों को मिल सकता है पेंशन का लाभ?

मध्य प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के अंतर्गत पात्रता के आधार पर अलग-अलग वर्गों को सहायता दी जाती है। इसमें वृद्धजन, विधवा महिलाएं, परित्यक्ता महिलाएं और दिव्यांगजन शामिल हो सकते हैं। प्रत्येक योजना के लिए सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता और नियम अलग-अलग हो सकते हैं।

इसलिए किसी भी योजना का लाभ लेने से पहले संबंधित योजना की पात्रता शर्तों की जांच करना जरूरी है।

ऑनलाइन मिल रही योजना से जुड़ी जानकारी

डिजिटल व्यवस्था के विस्तार के साथ सरकारी योजनाओं की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही है। हितग्राही सामाजिक सुरक्षा और पेंशन से संबंधित जानकारी के लिए मध्य प्रदेश सरकार के संबंधित पोर्टल और विभागीय माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए योजना की पात्रता, आवेदन से संबंधित प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और लाभार्थी से जुड़ी अन्य जानकारी हासिल की जा सकती है। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने में सुविधा मिलती है।

आवेदन के लिए दस्तावेज जरूरी

पेंशन योजना के लिए आवेदन करते समय निर्धारित दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है। आवेदक को अपनी पहचान, निवास और संबंधित श्रेणी से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं। दस्तावेजों की आवश्यकता योजना के अनुसार अलग हो सकती है।

आवेदन करने से पहले सभी जानकारी सही तरीके से जांचना जरूरी है, ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न आए।

सरकारी योजना का लाभ लेने से पहले करें यह काम

किसी भी सोशल सिक्योरिटी पेंशन के लिए आवेदन करने से पहले यह देखना जरूरी है कि आवेदक संबंधित योजना की पात्रता पूरी करता है या नहीं। साथ ही योजना की वर्तमान शर्तों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी आधिकारिक सरकारी स्रोत से ही प्राप्त करनी चाहिए।

मध्य प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाएं कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए आर्थिक सहायता का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध होने से पात्र लोगों को अपने लिए लागू योजना की जानकारी प्राप्त करने और आवेदन प्रक्रिया समझने में पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिल सकती है।

बड़े तालाब की हदों पर बड़ा खुलासा! मुनारों से 15 फीट आगे पानी, तालाब के अंदर सीवेज लाइन और 50 मीटर के भीतर पक्का निर्माण

भोपाल। बड़े तालाब की वास्तविक सीमा, कैचमेंट और संभावित अतिक्रमणों की जांच के लिए एनजीटी द्वारा गठित सात सदस्यीय विशेष टीम का ग्राउंड ट्रुथिंग सर्वे मंगलवार को चौथे दिन भी जारी रहा। मुगलिया छाप से लेकर सेंट्रल पार्क और भारत भवन तक हुए निरीक्षण में कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनका राजस्व रिकॉर्ड और तकनीकी दस्तावेजों से सत्यापन किया जाना जरूरी है।

 

Drona sarve

सर्वे की शुरुआत मुगलिया छाप क्षेत्र में ड्रोन सर्वे से हुई। इसके बाद टीम सेंट्रल पार्क कॉलोनी पहुंची। यहां तालाब की पुरानी सीमा दर्शाने वाले मुनारों के आगे करीब 15 फीट तक पानी फैला हुआ दिखाई दिया। पार्क के कुछ हिस्सों में जलभराव के संकेत भी मिले।

टीम ने सेंट्रल पार्क के अंदर बने बड़े निजी निर्माणों और कोठियों का भी मौके पर निरीक्षण किया। इन निर्माणों की तालाब की सीमा, कैचमेंट और प्रतिबंधित क्षेत्र से वास्तविक दूरी का रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापन किया जाएगा।

इसके बाद बिशनखेड़ी रोड, मयंक नर्सरी, गोरा सेवानिया सीमा, एसपीएस के पास, नाथू बरखेड़ा बॉर्डर पुलिया और नाथू बरखेड़ा रोड समेत कई इलाकों में ग्राउंड ट्रुथिंग की गई।

 तालाब के अंदर मिली सीवेज लाइन

सर्वे के दौरान टीम के सामने बड़े तालाब के अंदर से गुजरती एक बड़ी सीवेज लाइन भी सामने आई। मौके पर मौजूद टीम के सदस्यों को इसकी जानकारी दी गई। सीवेज लाइन तालाब की जल गुणवत्ता और प्रदूषण के लिहाज से गंभीर जांच का विषय बन सकती है।

 बिशनखेड़ी में डंपिंग, भारत भवन के पास निर्माण

बिशनखेड़ी तालाब से लगे क्षेत्र में बड़े निर्माण के लिए डंपिंग गतिविधि भी दिखाई दी। इससे प्राकृतिक जल प्रवाह और जल गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

वहीं भारत भवन क्षेत्र में तालाब की सीमा से करीब 50 मीटर के भीतर बड़ा पक्का निर्माण टीम के संज्ञान में आया। इसकी वास्तविक दूरी और वैधानिक स्थिति का राजस्व एवं तकनीकी अभिलेखों से सत्यापन किया जाएगा।

ड्रोन और ग्राउंड सर्वे से हो रहा मिलान

टीम ने अलग-अलग स्थानों पर ड्रोन सर्वे और ग्राउंड ट्रुथिंग के जरिए मौके की स्थिति रिकॉर्ड की। अब राजस्व रिकॉर्ड, पुराने नक्शे, जल सीमा, कैचमेंट क्षेत्र और वर्तमान भौतिक स्थिति का आपस में मिलान किया जाएगा।

आज के सर्वे के साथ Upper Lake के इस चरण का Ground Truthing पूरा हो गया। सर्वे में CPCB, MPPCB, मध्यप्रदेश वेटलैंड अथॉरिटी, वन विभाग, नगर निगम भोपाल और राजस्व विभाग के प्रतिनिधियों के साथ याचिकाकर्ता एवं विशेष सदस्य राशिद नूर खान और पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडेय मौजूद रहे। MPPCB के नोडल अधिकारी नीतेश चौरसिया भी टीम के साथ रहे।

यह सर्वे बड़े तालाब की वास्तविक सीमा और कैचमेंट क्षेत्र को वैज्ञानिक एवं दस्तावेजी आधार पर स्पष्ट करने के लिए किया जा रहा है। कल टीम कलियासोत-केरवा क्षेत्र का सर्वे करेगी।

PM-USP CSSS Scholarship Renewal 2026-27

PM-USP CSSS Scholarship Renewal 2026-27: 31 अक्टूबर तक करें आवेदन, जानें पात्रता, जरूरी दस्तावेज...

0
भोपाल | KOLAR18.COM | Social Welfare & Education News कॉलेज और विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने...
Women and Child Development;

महिला एवं बाल विकास पर केंद्र-राज्य मंथन, पोषण और महिला सुरक्षा पर फोकस

0
नई दिल्ली। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का दो दिवसीय विभागीय सम्मेलन 8 और 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया जा...
yogi modi modal

उत्तर प्रदेश Social Welfare योजनाएं 2026: पेंशन, छात्रवृत्ति और सरकारी योजनाओं की जानकारी

0
पेंशन, छात्रवृत्ति, महिला कल्याण, दिव्यांगजन सहायता और गरीब परिवारों के लिए प्रमुख सरकारी योजनाओं की संक्षिप्त जानकारी उत्तर प्रदेश में सामाजिक कल्याण योजनाओं का दायरा...
maaldhari-family

गुजरात में मालधारी परिवारों के पुनर्वास की नई योजना: ₹15 लाख सहायता, 100 वर्ग...

0
गुजरात। गुजरात सरकार ने बर्दा वन्यजीव अभयारण्य (Barda Wildlife Sanctuary) में रहने वाले मालधारी परिवारों के स्वैच्छिक पुनर्वास के लिए नई योजना की घोषणा...
mann ki baat 1st episode

विजयादशमी के दिन शुरू हुई थी ‘मन की बात’: 3 अक्टूबर 2014 से सितंबर...

0
विशेष जानकारी | मन की बात पहले 14 मिनट के प्रसारण से 100वें एपिसोड और 2026 के आधिकारिक रेडियो आर्काइव तक की महत्वपूर्ण तारीखें। शुरुआत 3 अक्टूबर 2014 अवसर विजयादशमी पहला...