लोअर लेक में अवैध निर्माण और सीवेज प्रदूषण पर NGT सख्त, चार सप्ताह में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

भोपाल। राजधानी की लोअर लेक में कथित अवैध निर्माण, बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के मामलों में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने संबंधित विभागों को चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई और अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 21 दिसंबर 2026 को होगी।

NGT की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने 15 अक्टूबर 2026 को मूल आवेदन क्रमांक 58/2026 (CZ) की सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए। यह मामला राशिद नूर खान बनाम कलेक्टर, भोपाल एवं अन्य से संबंधित है। सुनवाई न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ के समक्ष हुई।

प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण पर उठे सवाल

आवेदक राशिद नूर खान की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने लोअर लेक क्षेत्र में कथित अवैध और अनधिकृत निर्माण का मुद्दा उठाया। वहीं, नगर निगम की ओर से संबंधित कार्यों को मौजूदा संरचनाओं की मरम्मत बताया गया।

ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध या अनधिकृत निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। पीठ ने वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के नियम 4 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

झील में गंदे पानी का प्रवाह रोकने के निर्देश

लोअर लेक में बिना उपचारित सीवेज पहुंचने का मामला भी सुनवाई के दौरान उठा। नगर निगम ने बताया कि अमृत 2.0 योजना के तहत नालों के इंटरसेप्शन और डायवर्जन का काम चल रहा है।

इस पर ट्रिब्यूनल ने नगर निगम और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) को निर्देश दिए कि झील में बिना उपचारित सीवेज का प्रवाह रोकने के लिए की गई कार्रवाई और नालों के डायवर्जन की प्रगति का विवरण चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत किया जाए।

अब संबंधित विभागों की रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि झील में प्रदूषण रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और चल रहे कार्यों की स्थिति क्या है।

पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के मामले में भी जवाब तलब

मामले में पेड़ों को कथित तौर पर जहरीले रसायनों से नुकसान पहुंचाने और उनके सूखने या मृत्यु से जुड़े आरोप भी उठाए गए। इस संबंध में वन विभाग, नगर निगम और ट्री ऑफिसर की ओर से कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किए जाने पर पीठ ने नाराजगी जताई।

ट्रिब्यूनल ने संबंधित अधिकारियों को पेड़ों को हुए नुकसान, वृक्ष कटाई की अनुमति और प्रतिपूरक वनीकरण से संबंधित कार्रवाई एवं अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

भोज वेटलैंड के संरक्षण पर निगाहें

भोपाल की लोअर लेक, भोज वेटलैंड का हिस्सा है। भोज वेटलैंड को अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है। ऐसे में झील की जल गुणवत्ता, आसपास के पर्यावरण और प्राकृतिक पारिस्थितिकी का संरक्षण महत्वपूर्ण है।

इस मामले में अब नगर निगम, PHE, वन विभाग और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर निगाहें रहेंगी। चार सप्ताह में मांगी गई रिपोर्ट से पता चलेगा कि कथित अनधिकृत निर्माण, सीवेज प्रदूषण और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के मामलों में क्या कार्रवाई की गई।

अगली सुनवाई 21 दिसंबर 2026 को निर्धारित है।

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